राजनीति

आरक्षण पर कोविंद के 'बयान' को हथियार बनाएगा विपक्ष, पढ़िए क्या था बयान

सतीश वर्मा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जून 24 , 2017 , 16:31 IST | नई दिल्ली

राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए उम्मीदवार रामनाथ कोविंद के मुकाबले मीरा कुमार को मैदान में उतारने के बाद अब विपक्ष कोविंद के खिलाफ जोर शोर से प्रचार करने की भी तैयारी कर रहा है। इस प्रचार में कोविंद को यह कहते हुए निशाना बनाया जा सकता है कि आरक्षण को लेकर उनकी प्रतिबद्धता संदिग्ध है। विपक्ष यह आरोप भी लगाएगा कि बीजेपी के करीबी माने जाने वाले भगवा संगठनों ने पहले दलित राष्ट्रपति केआर नारायणन के चयन पर सवाल खड़े किए थे।

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VHP ने पहले दलित राष्ट्रपति के आर नारायणन की उम्मीदवारी का किया था विरोध

बताया जा रहा है कि इस सिलसिले में विपक्षी दलों के नेताओं के बीच एक पर्चा भी बांटा गया है, जिसमें इन तमाम बातों को विस्तार से बताया गया है। विपक्ष का कहना है कि जब केआर नारायणन देश के राष्ट्रपति बनने वाले थे, तब विश्व हिंदू परिषद ने उनकी उम्मीदवारी को हिंदुत्व के खिलाफ साजिश करार दिया था। विपक्षी दलों का आरोप है कि उस वक्त बीजेपी और आरएसएस ने इस बात का विरोध करने के बजाय चुप्पी साध ली थी।

विपक्ष का आरोप- कोविंद की जाति को गुजरात चुनाव में भुनाएगी बीजेपी

इसके अलावा विपक्ष इस बात पर भी सवाल खड़े करेगा कि किस तरह बीजेपी ने कोविंद की जाति को हाइलाइट कर के दलितों को लुभाने की कोशिश की है। विपक्ष के प्लान में ऐसे गैर-एनडीए दलों पर निशाना साधना भी शामिल होगा, जिन्होंने कोविंद को समर्थन देने का ऐलान किया है। इसके लिए विपक्ष कोविंद को ऐसे व्यक्ति के रूप में पेश करने की कोशिश करेगा जिसकी एससी, एसटी और ओबीसी जातियों को नौकरियों में मिलने वाले आरक्षण पर राय संदिग्ध है।

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राज्यसभा में कोविंद ने आरक्षण के खिलाफ दिया था बयान

विपक्ष अपने इन हमलों के लिए कोविंद द्वारा राज्यसभा में दिए गए भाषणों को आधार बनाएगा। 17 दिसंबर, 2004 में दिए गए एक भाषण में कोविंद ने कहा था कि 50 से ज्यादा सालों से जारी आरक्षण की वजह से एससी-एसटी-ओबीसी और सवर्ण जातियों के बीच कटुता पैदा हो गई है। उन्होंने कहा था कि आरक्षित और सामान्य वर्ग, 'दोनों ही न्यायसंगत' हैं। कोविंद ने यह भी कहा था कि एससी, एसटी वर्ग को इस बात की चिंता है कि सरकारी नौकरियों में उनका 22.5% हिस्सा दशकों से नहीं भरा जा सका है, क्योंकि आरक्षण को लागू करने का काम गैर-आरक्षित जातियों के पास है।


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