ख़ास रिपोर्ट

घाटी में शांति का 'विलेन' है हुर्रियत कांफ्रेंस, जानिए क्या है इतिहास

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
259
| जुलाई 4 , 2017 , 19:51 IST | नई दिल्ली

अलगाववादी गठबंधन हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के पाकिस्तान फंडिंग के खुलासे के बाद हुर्रियत के नेताओं पर कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू होने लगी है। भारतीय सुरक्षा एजेंसी की यह एक बड़ी जीत है। आईए हम आपको बताते हैं कि अलगाववादी संगठन का आखिर क्या है मकसद। घाटी में अमन-चैन के सबसे बड़े खलनायक के रुप में जाने वाले इस संगठन का क्या है इतिहास।

H3

9 मार्च 1993 को हुई थी हुर्रियत की स्थापना

हुर्रियत कांफ्रेस की स्थापना का मक़सद राजनीतिक जरिए से कश्मीर के अलगाव के लक्ष्य को हासिल करना है। इसकी स्थापना 9 मार्च 1993 को की गई थी। भारतीय अधिकारियों का मानना है कि हुर्रियत कॉन्फ्रेंस जम्मू-कश्मीर में सक्रिय चरमपंथी संगठनों का प्रतिनिधित्व करती है। हुर्रियत कॉन्फ्रेंस की कार्यकारिणी में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर मतभेद हैं।

H1

गिलानी चरमपंथी संगठन की करते हैं वकालत

सैयद अली शाह गिलानी जैसे नेता के बारे में बताया जाता है कि वे चरमपंथी संगठनों की वकालत करते हैं। कश्मीर के अलगाव को लेकर भी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के प्रमुख नेताओं में आम राय नहीं है। कुछ नेता कश्मीर के पाकिस्तान में विलय की मांग करते हैं वहीं जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ़्रंट कश्मीर की स्वतंत्रता की बात करती है।
अब्दुल गनी भट कश्मीर को राजनीतिक मुद्दा बताते हैं जबकि सैयद अली शाह गिलानी इसे एक धार्मिक मुद्दा मानते हैं। कश्मीर में विदेशी चरमपंथियों की भूमिका को लेकर भी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस में मतभेद हैं।

23 विभिन्न धार्मिक-सामाजिक संगठनों का गठबंधन है हुर्रियत

ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस जम्मू और कश्मीर के 23 विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक संगठनों का गठबंधन है। ये एक राजनीतिक मोर्चा है और कश्मीर के भारत से अलगाव की वकालत करता है। हुर्रियत कॉन्फ्रेंस ने एलान किया है कि वह जम्मू और कश्मीर राज्य में होने वाले विधानसभाचुनावों में हिस्सा नहीं लेगी।
हुर्रियत ने पाकिस्तान को भी बातचीत में शामिल करने की मांग की

नवंबर 2000 में भारत सरकार के शांति प्रक्रिया शुरु करने के पहल के बाद हुर्रियत कॉन्फ्रेंस ने पाकिस्तान को भी बातचीत में शामिल करने की मांग की। हुर्रियत कॉन्फ्रेंस ने अपना एक दल पाकिस्तान भेजकर चरमपंथी संगठनों से बातचीत करने की मांग भी की।

हुर्रियत के नेताओं ने कबूला पाकिस्तान से पैसा लेने की बात

हाल ही में एक निजी चैनल पर दिखाए गए स्टिंग वीडियो में हुर्रियत के तीन बड़े धड़ों के नेताओं से कश्मीर में आज़ादी और अलगाववाद से हमदर्दी रखने वाले फंडर के भेष में बात की गई। तीनों नेताओं ने पाकिस्तान से पैसा आने और उस पैसे से कश्मीर में हिंसा, आगज़नी और तोड़-फोड़ का ख़तरनाक खेल खेलने की बात कबूल की।

H4

नेताओं ने यह भी स्वीकार किया कि पैसा लेकर वे कश्मीर में मनचाहे समय तक अशांति और अस्थिरता फैला सकते हैं। इन नेताओं ने हुर्रियत के कट्टरपंथी नेता सैयद अली शाह गिलानी से लश्कर के प्रमुख हाफ़िज़ सईद के साथ सीधे संपर्क होने की बात भी कबूल की।


कमेंट करें