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दुनिया से खत्म होने वाला है IS का आतंक, पढ़ें क्या है इसके उदय की कहानी

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जुलाई 13 , 2017 , 17:33 IST | नई दिल्ली

ISIS दुनिया भर में आतंक का दूसरा नाम बन गया है। इसका काला झण्डा और लोगों के कटे हुए सर हम अक्सर टीवी पर देखते थे। लेकिन कई देशों ने आतंक के इस नाम को ख़त्म करने की ठान ली है। लम्बी लड़ाई के बाद इसके क़ब्ज़े वाले शहरो को आज़ाद कराया जा रहा है। सद्दाम हुसैन की मौत के बाद पैदा हुए बगद़ादी की मौत की भी ख़बर है।

इधर भारत ने आतंकवाद के ख़िलाफ़ अपनी लड़ाई को जारी रखते हुए फिलीपींस को आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट से लड़ाई के लिए 5 लाख डॉलर यानी तकरीबन 3.2 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद दी। ऐसा पहली बार है जब भारत ने किसी देश को आतंकी संगठन से सुरक्षा के लिए आर्थिक सहायता मुहैया कराई है। फिलीपींस के दक्षिणी इलाके के मारावी शहर में लगभग 2 महीने से ज्यादा समय से आईएस ने कब्जा कर रखा है और सुरक्षाबल इसे मुक्त कराने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

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आइए अब जान लेते हैं कैसे पैदा हुआ ये राक्षस आईएसआईएस। इसके जन्म के पीछे जाने-अनजाने अमेरिका का ही हाथ रहा, ठीक वैसे ही जैसे अमेरिका की मदद की वजह से ओसामा बिन लादेन और अल-कायदा का जन्म हुआ। 1980 में ईरान के खिलाफ इस्तेमाल के लिए कैमिकल हथियार देकर अमेरिका ने सद्दाम को सद्दान हुसैन बनाया, ठीक वैसे ही सीरिया में फ्रीडम फाइटर कह जाने वालों को अमेरिका ने हथियार और ट्रेनिंग दी और अब वही फ्रीडम फाइटर आईएसआईएस के बैनर तले लड़ रहे हैं।

जून 2014 से ISIS ने इराक और सीरिया में जो कहर बरपाना शुरू किया वो आजतक बदस्तूर जारी है। ISIS के आतंकवादी इराक और सीरिया के कई अहम शहरों पर कब्ज़ा किया और इन इलाकों में अपनी समानान्तर सरकार भी चलाई। पूरी दुनिया में आतंक और दहशत का पर्याय बन चुके चरमपंथी समूह आईएसआईएस की क्रूरता और जुल्म उसकी ओर से अक्सर जारी किए जाने वाले वीडियो के जरिए सामने आते रहें। इनमें लोगों का सिर कलम कर देना, गर्दन रेत देना या जिंदा जला देना इनके लिए आम था।

सद्दाम हुसैन की मौत के बाद जैसे ही अमेरिकी सेना इराक छोड़ कर बाहर आई वैसे ही वहां छोटे-मोटे कई गुट अपना वर्चस्व स्थापित करने के लिए लड़ने लगे और उन्हीं में से एक गुट का नेता था अल-कायदा का इराक में चीफ अबू-बकर-अल बगदादी। 2011 में अमेरिकी सेना की वापसी के साथ ही बगदादी ने अल-कायदा इराक का नाम बदलकर इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक रख लिया।

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बगदादी ने सद्दाम हुसैन की सेना के कमांडर और सिपाहियों को अपने साथ मिलाया। धीरे-धीरे उसके साथ हजारों लोग शामिल हो चुके थे, जिनमें से बड़ी संख्या में सद्दाम हुसैन की सेना के अधिकारी भी थे। इन्होंने सबसे पहले पुलिस और सेना को निशाने पर लिया। फिर भी बगदादी को इराक में उम्मीद के मुताबिक कामयाबी नहीं मिल रही थी जिससे हताश होकर बगदादी सीरिया पहुंच गया जहां अल-कायदा और फ्री सीरियन आर्मी सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद से मोर्चा ले रहे थे।

सीरियाई आर्मी के ख़िलाफ़ सीरिया में सफलता नहीं मिलने के बाद बगदादी ने जून 2013 में एक महीने के अंदर हारने की बात कहकर दुनिया भर के देशों से हथियार देने की अपील की और इस अपील के असर का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि हफ्ते भर के अंदर ही अमेरिका, इजराइल, तुर्की, सऊदी अरब और कतर ने हथियार, पैसे और ट्रेनिंग का इंतजाम करवा दिया। फ्रीडम फाइटर के नकाब में आईएस के आतंकियों ने अमेरिका तक से ट्रेनिंग ले ली। यहीं से शुरू हुआ आईएसआईएस का आतंक।

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लेकिन अब ये संगठन अपने ख़ात्मे की ओर है। आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ने अपने चीफ अबु बक्र अल-बगदादी की मौत की घोषणा की है। वैसे बगदादी की मौत की खबरें अक्सर आती रहती हैं। कुछ दिन पहले ही रूस ने उसके मारे जाने का दावा किया था, लेकिन बाद में खुद अपने दावे से पीछे हट गया था। इधर, इस्लामिक स्टेट ने जल्द ही अपने सुप्रीम लीडर के नाम की घोषणा करने की बात कही है।

समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, 'इस्लामिक स्टेट ने इराक के तल अफर शहर में बयान जारी किया है जिसमें बगदादी के मारे जाने की पुष्टि की है। हालांकि, इसके बारे में कुछ और जानकारी नहीं दी गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि, आईएस अपने विस्तार की दिशा में तेजी से बढ़ता रहेगा। यह रिपोर्ट इराक के प्रधानमंत्री हैदर अल-अब्दी के मौसूल के इस्लामिक स्टेट के कब्जे से मुक्त करा लेने की घोषणा के अगले दिन आई है। पिछले 9 महीने के संघर्ष के बाद इस शहर को आईएस के कब्जे से मुक्त कराया गया है।


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