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मेनका गांधी की दलील, मेडिकल मारिजुआना को बतौर दवा मिले कानूनी मान्यता

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अगस्त 1 , 2017 , 17:46 IST | नई दिल्ली

बम-बम भोले। अब चिलम फूंकना गैरकानूनी नहीं होगा। जी हां हम बात गांजा यानि मारिजुआना की कर रहे हैं। दरअसल गांजा जो कि एक प्रतिबंधित ड्रग्स है उसके बारे में महिला एवं बाल कल्याण मंत्री मेनका गांधी ने कहा है कि इसे बतौर दवा के रुप में कानूनी मान्यता मिलनी चाहिए, जैसा कि अमेरिका और अन्य़ पश्चिमी देशों में है। बता दें कि कई देशों में गांजा को इसलिए कानूनी मान्यता दी गई है ताकि ड्रग एब्यूज को कम किया जा सके।

Marjuana

बतौर दवा गांजा के इस्तेमाल की सलाह

नेशनल ड्रग डिमांड रिडक्शन पॉलिसी की ड्राफ्ट नोट पर चर्चा करते हुए मंत्रीपरिषद समूह की बैठक में मेनका गांधी ने गांजा को बतौर दवा के रुप में इस्तेमाल करने की सलाह दी है। मेनका गांधी ने मंत्रीपरिषद समूह की बैठक को संबोधित करते कहा कि विकसित देशों में गांजा को बतौर दवा कानूनी मान्यता प्रदान की गई है। जिसका नतीजा है कि इन देशों में ड्रग एब्यूज के मामले लगातार कम होते जा रहे हैं। इतना ही नहीं गांजा का इस्तेमाल मेडिकल साइंस में अब कैंसर के दवा के रुप में भी किया जा रहा है।

कैबिनेट मीटिंग में प्रतिबंधित कोडीन कफ सीरप जिसे बतौर नशे के रुप में इस्तेमाल किया जाता है उसके बिक्री और उपलब्धता पर भी नियंत्रण बनाए रखने की बात कही गई। इन कफ सीरप का इस्तेमाल धड़ल्ले से नशे के रुप में किया जाता है।

रेलवे स्टेशन, स्कूल के आसपास ड्रग एब्यूज पर रखी जाए कड़ी नजर

कैबिनेट मीटिंग में नशीले पदार्थों की बिक्री पर सख्त कार्रवाई की वकालत की गई। स्कूल-कॉलेज और रेलवे स्टेशन के पास ड्रग डिएडिक्श सेंटर खोलने की बात कही गई और इन जगहों पर ज्यादा सख्ती और पैनी नजर रखने की बात कही गई।

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केमिकल और फर्टिलाइजर मंत्री अनंत कुमार ने कहा कि पश्चिमी देशों की तुलना में भारत में सामाजिक जागरुकता की कमी है और यहां पर नशीले पदार्थ को कानूनी मान्यता देना खतरे से खाली नहीं होगा। स्कूल-कॉलेज के आसपास नशीले पदार्थों की बिक्री पर हमें तत्काल सख्ती से कदम उठा कर कार्रवाई करनी चाहिए।

 

 


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