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LOHRI 2018 : जानिए कब, क्यों और कैसे मनाई जाती है लोहड़ी

अर्चित गुप्ता | 0
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| जनवरी 13 , 2018 , 12:21 IST | नई दिल्ली

लोहड़ी उत्तर भारत और पंजाब का सबसे प्रसिद्ध त्योहार है। आज पूरे देश में लोग लोहड़ी बड़े धूम धाम के साथ मना रहे है। लोहड़ी की शाम लोग आग का घेरा बनाकर दुल्ला भट्टी की कहानी सुनाते हुए रेवड़ी, मूंगफली और लावा खाते हैं।

आइये जानते है क्यों और कैसे मनाया जाता है यह त्यौहार:

कैसे मनाते हैं लोहड़ी?

पारंपरिक तौर पर लोहड़ी फसल की बुआई और उसकी कटाई से जुड़ा एक विशेष त्यौहार है। इस दिन अलाव जलाकर उसके इर्दगिर्द डांस किया जाता है। लड़के भांगड़ा करते हैं। लड़कियां और महिलाएं गिद्धा करती है।

इस दिन विवाहिता पुत्रियों को मां के घर से 'त्योहार' (वस्त्र, मिठाई, रेवड़ी, फलादि) भेजा जाता है। वहीं, जिन परिवारों में लड़के का विवाह होता है या जिन्हें पुत्र प्राप्ति होती है, उनसे पैसे लेकर मुहल्ले या गांव भर में बच्चे ही रेवड़ी बांटते हैं।

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लोहड़ी और दुल्ला भट्टी की कहानी:

लोहड़ी को दुल्ला भट्टी की एक कहानी से भी जोड़ा जाता हैं। लोहड़ी की सभी गानों को दुल्ला भट्टी से ही जुड़ा तथा यह भी कह सकते हैं कि लोहड़ी के गानों का केंद्र बिंदु दुल्ला भट्टी को ही बनाया जाता हैं।

दुल्ला भट्टी मुग़ल शासक अकबर के समय में पंजाब में रहता था। उसे पंजाब के नायक की उपाधि से सम्मानित किया गया था!

उस समय संदल बार के जगह पर लड़कियों को गुलामी के लिए बल पूर्वक अमीर लोगों को बेच जाता था जिसे दुल्ला भट्टी ने एक योजना के तहत लड़कियों को न की मुक्त ही करवाया बल्कि उनकी शादी की हिन्दू लडको से करवाई और उनके शादी के सभी व्यवस्था भी करवाई।

दुल्ला भट्टी एक विद्रोही था और जिसकी वंशवली भट्टी राजपूत थे। उसके पूर्वज पिंडी भट्टियों के शासक थे जो की संदल बार में था अब संदल बार पकिस्तान में स्थित हैं। वह सभी पंजाबियों का नायक था।

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इसलिए मनाते हैं यह पर्व:

पौराणिक मतानुसार लोहड़ी को लाल लाही, लोहिता व खिचड़वार नाम से भी जाना जाता है। इस दिन कंस ने को मारने हेतु लोहिता राक्षसी को गोकुल में भेजा था, जिसे श्रीकृष्ण ने मार डाला था। इसी कारण लोहिता पर्व मनाया जाता है।

सिन्धी समाज में भी इसे लाल लाही पर्व के रूप में मनाया जाता है। लोहड़ी का पर्व मूलतः आद्यशक्ति, श्रीकृष्ण व अग्निदेव के पूजन का पर्व है। लोहड़ी पर अग्नि व महादेवी के पूजन से दुर्भाग्य दूर होता है, पारिवारिक क्लेश समाप्त होता है तथा सौभाग्य की प्राप्त होती है।


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