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जानिए संजय-मेनका की अनकही प्रेम कहानी, पढ़ कर पिघल जाएगा आपका दिल

सतीश वर्मा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जून 23 , 2017 , 20:34 IST | नई दिल्ली

जब आप भारतीय प्रेम कहानी को गांधी फैमिली के बरअक्स देखते हैं तो आपको इस परिवार के प्रेम कहानियों में काफी ट्विस्ट और उतार-चढ़ाव देखने को मिलेंगे। गांधी फैमिली में इंदिरा गांधी से लेकर उनके दोनों बेटे संजय गांधी और राजीव गांधी के प्यार के किस्से में एक खास बात दिखने को मिलेगी। इंदिरा गांधी ही नहीं बल्कि उनके दोनों बेटों ने बड़े ही सादगीपूर्ण अंदाज में लो प्रोफाइल लव पार्टनर की तलाश की और फिर उनसे शादी भी किए। कोई दिखावा नहीं, कोई प्रचार नहीं।

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आज हम आपको बताने जा रहे हैं संजय गांधी और मेनका गांधी की प्रेम कहानी के बारे में। नेहरू गांधी परिवार का सबसे महत्वाकांक्षी राजनेता के रुप में संजय गांधी को जाना जाता है। खास कर इमरजेंसी के दौरान संजय गांधी देश के एक शक्तिशाली राजनेता के रुप में उभरे थे। हालांकि संजय गांधी ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में अपना करियर आजमाना चाहते थे, लेकिन राजनीतिक विरासत ने उन्हें राजनीति की तरफ मोड़ दिया। जबकि मेनका गांधी अपने जवानी की दिनों कॉलेज की एक खूबसूरत लड़की के रुप में जानी जाती थी। कॉलेज के ब्यूटी कांटेस्ट की विनर रह चुकी मेनका गांधी मॉडलिंग भी कर रही थीं।

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जब दे मीट, मॉडलिंग के दौरान संजय से मिली मेनका

यह वह दौर था जब मेनका गांधी का पहला मॉडलिंग एसाइनमेंट बांबे डाइंग कंपनी के लिए था। इस एड की शूटिंग के दौरान संयोग से संजय गांधी भी वहां मौजूद थे और इसी दौरान संजय ने अपना दिल मेनका के नाम कर दिया। मेनका भी संजय के इश्क में गिरफ्त हो गईं।

संजय और मेनका के बीच दोस्ती को और मजबूत बनाने का काम किया वीनू कपूर ने। वीनू कपूर मेनका गांधी के रिश्तेदार थे और संजय के खास दोस्त। वीनू की शादी की कॉकटेल पार्टी में पहली बार संजय और मेनका आमने-सामने हुए। मेनका की उम्र उस समय 17 साल थी। वैसे तो संजय गांधी शर्मीला स्वभाव का था लेकिन दोनों के बीच फिर मुलाकातों का सिलसिला आगे बढ़ता गया। इन्हीं दिनों संजय गांधी का एक ऑपरेशन हुआ तो मेनका संजय से मिलने रोज प्रधानमंत्री आवास पर जाने लगीं।

जब संजय और मेनका ने लिए सात फेरे

मेनका गांधी का मां संजय और मेनका के रिश्तो से नाखुश रहती थी। मेनका की मां ने शादी से साफ इनकार कर दिया था। इस रिश्ते से नाराज मेनका की मां ने मेनका को भोपाल भेज दिया। यह बात साल 1974 की है। लेकिन मेनका भोपाल में नहीं रह पाई और वापस दिल्ली आ गईं।

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1974 के जुलाई महीने के किसी खास दिन की बात है जब प्रधानमंत्री आवास मे संजय और मेनका के रिश्तों को विधिवत अमलीजामा पहनाया गया। पीएम आवास में संजय और मेनका की सगाई समारोह आयोजित की गई। इंदिरा गांधी ने मेनका को इस खास दिन तनछुई साड़ी और गोल्ड सेट उपहार में दिए। दो महीने बाद 23 सिंतबर 1974 को इंदिरा गांधी परिवार के पारिवारिक दोस्त मोहम्मद युनूस के घर पर संजय और मेनका की शादी संपन्न हुई और दोनों ने विधिवत भारतीय परंपरा और संस्कार में शादी के सात फेरे लिए।

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वो मनहूस दिन

भाग्य को शायद मंजूर नहीं था मेनका और संजय गांधी का साथ। यह रिश्ता ज्यादा दिन तक नहीं चल पाया। 23 जून 1980 का वह मनहूस दिन था जब संजय गांधी प्लेन क्रैश में मारे गए। उस समय वरुण महज तीन महीने का था। संजय की असामयिक मौत के सदमा से मेनका अभी उबर भी नहीं पाई थी कि साल भर के अंदर ही मेनका को पीएम आवास छोड़ना पड़ा। दरअसल इंदिरा गांधी और मेनका गांधी के बीच रिश्तों में खटास आ गई थी। मेनका गांधी ने वरुण को साथ ले इंडिरा गांधी के पीएम आवास को सदा के लिए छोड़ बाहर निकल गईं।

 


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