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महाशिवरात्रि: इन उपायों से महादेव होंगे प्रसन्न, हरेंगे कष्ट करेंगे मंगल ...

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| फरवरी 13 , 2018 , 13:57 IST

महाशिवरात्रि शिवभक्तों का सबसे बड़ा त्योहार है। इस दिन सारा वातावरण शिवमय हो जाता है। महाशिवरात्रि इस बार 2 दिन मनाई जाएगी। दरहसल महाशिवरात्रि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि को होती है। इस साल 13 फरवरी को पूरे दिन त्रयोदशी रहेगी और आधी रात में 11 बजकर 35 मिनट से चतुर्दशी शुरू हो जाएगी।

जबकि 14 फरवरी को पूरे दिन और रात 12:47 मिनट तक चतुर्दशी रहेगी। ऐसे में लोग इस बात को लेकर काफी परेशान हो रहे हैं कि महाशिवरात्रि का व्रत 13 फरवरी को रखा जाए या 14 फरवरी को।

इस भ्रम की स्थिति को समाप्‍त करने के लिए धर्मसिंधु ग्रंथ का सहारा लिया गया है।

ग्रंथ में कहा गया है 'परेद्युर्निशीथैकदेश-व्याप्तौ पूर्वेद्युः सम्पूर्णतद्व्याप्तौ पूर्वैव..'.

इन पंक्तियों का हिंदी में अर्थ ये है कि अगर चतुर्दशी अगले दिन निशीथ काल में कुछ समय के लिए रहती है और पहले दिन पूरे भाग में हो तो पहले दिन ही महाशिवरात्रि का व्रत करना चाहिए। इसलिए इस बार 13 फरवरी को ही महाशिवरात्रि का व्रत करना चाहिए।

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महाशिवरात्रि भक्तों के लिए क्यों है खास:

भगवान शिव की आराधना के लिए इस पर्व का विशेष महत्व है। माना जाता है कि इस रात में विधिवत साधाना करने से भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त की जा सकती है। बता दें कि यूं तो हर महीने की कृष्णपक्ष चतुर्दशी को मास शिवरात्रि मनाया जाता हैं लेकिन फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को पड़ने वाली शिवरात्रि को महाशिवरात्रि की प्रधानता दी गई है। मान्यता है कि इस दिन ही भगवान शिव का माता पार्वती के साथ विवाह हुआ था। इस दिन शिवालयों में जलाभिषेक और पूजा अर्चना के लिए भक्त विशेष रूप से इकट्ठा होते हैं।

शिवपुराण के अनुसार शिवरात्रि का पूजन व व्रत करने से होती है फल की प्राप्ति:

शिवरात्रि का पूजन व व्रत करने से वर्षभर के शिवरात्रि के समान फल की प्राप्ति होती है। लगातार चौदह वर्ष तक शिवरात्रि का व्रत-पूजन करने से एक हजार अश्वमेघ यज्ञ के समान व सौ वाजपेय यज्ञ के समान फल की प्राप्ति होती है।

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भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए करें ये उपाय:

- 'ॐ नमः शिवाय:' पंचतत्वमक मंत्र है इसे शिव पंचक्षरी मंत्र कहते हैं। इस पंचक्षरी मंत्र के जाप से ही मनुष्य संपूर्ण सिद्धियों को प्राप्त कर सकता है। भगवान शिव का निरंतर चिंतन करते हुए इस मंत्र का जाप करें।

- व्रती दिनभर शिव मंत्र 'ॐ नमः शिवाय:' का जाप करें तथा पूरा दिन निराहार रहें। रोगी, अशक्त और वृद्ध दिन में फलाहार लेकर रात्रि पूजा कर सकते हैं।

- भगवान शिव को दूध, दही, शहद, सफेद पुष्प, सफेद कमल पुष्पों के साथ ही भांग, धतूरा और बिल्व पत्र अति प्रिय हैं।

- रात को शिव चालीसा का पाठ करें।


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मनोकामना के अनुसार इन चीजों से करें रुद्राभिषेक:

जल से रुद्राभिषेक करने पर- वृष्टि होती है।

कुशा जल से अभिषेक करने पर- रोग, दुख से छुटकारा मिलता है।

दही से अभिषेक करने पर- पशु, भवन एवं वाहन की प्राप्ति होती है।

गन्ने के रस से अभिषेक करने पर- लक्ष्मी प्राप्ति होती है।

मधु युक्त जल से अभिषेक करने से- बीमारी नष्ट होती है।

दूध से अभिषेक करने से- पुत्र प्राप्ति एवं सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।

गंगाजल से अभिषेक करने से- ज्वर ठीक हो जाता है।

दुग्धशर्करा मिश्रित अभिषेक करने से- सद्बुद्धि प्राप्ति होती है।

घी से अभिषेक करने से- वंश विस्तार होता है।

सरसों के तेल से अभिषेक करने से- रोग एवं शत्रु का नाश होता है।

शुद्ध शहद से - पाप क्षय होता है।

 


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