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गांधी जयन्ती विशेष: बापू के जीवन से जुड़ी कुछ अनकही बातें जिसे जानना जरूरी है!

अर्चित गुप्ता | 0
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| अक्टूबर 2 , 2017 , 09:00 IST | नई दिल्ली

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जन्मदिन 2 अक्टूबर को हुआ था। उनके जन्म दिवस के दिन को हम सब गाँधी जयंती के रूप में हर साल मनाते हैं। महात्मा गांधी का जन्म वर्ष 1869 को पोरबन्दर में गुजरात में कर्मचन्द गांधी और पुतलीबाई के यहां हुआ था। मोहनदास करमचन्द गांधी भारत एवं भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के एक प्रमुख राजनैतिक एवं आध्यात्मिक नेता थे।

वे सत्याग्रह (व्यापक सविनय अवज्ञा) के माध्यम से अत्याचार के प्रतिकार के अग्रणी नेता थे, उनकी इस अवधारणा की नींव सम्पूर्ण अहिंसा के सिद्धान्त पर रखी गयी थी जिसने भारत को आजादी दिलाकर पूरी दुनिया में जनता के नागरिक अधिकारों एवं स्वतन्त्रता के प्रति आन्दोलन के लिये प्रेरित किया।

उन्हें दुनिया में आम जनता महात्मा गांधी के नाम से जानती है। संस्कृत भाषा में महात्मा अथवा महान आत्मा एक सम्मान सूचक शब्द है। गांधी को महात्मा के नाम से सबसे पहले 1915 में राजवैद्य जीवराम कालिदास ने संबोधित किया। उन्हें बापू (गुजराती भाषा में બાપુ बापू यानी पिता) के नाम से भी याद किया जाता है।

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जानिये महात्मा् गांधी के जीवन से जुड़ी कुछ अद्भुत बातें:

1.महात्मा गांधी के नाम को रिकॉर्ड पांच बार नोबेल पीस प्राइज के लिए नॉमिनेट किया गया था।

2.महात्मा गांधी को 'राष्ट्रपिता' सबसे पहले सुभाष चंद्र बोस ने कहा था

3.अपने पूरे जीवन में गांधी जी ने कभी कोई राजनीति पद नहीं लिया।

4.जिस अंग्रेजी सरकार के खिलाफ गांधीजी ने आंदोलन छेड़ दिया था उसी सरकार ने महात्मा गांधी की मौत 21 साल बाद उनके सम्मान में स्टैंप जारी किया।

5.महात्मा गांधी ने आइंस्टीन, हिटलर, टॉलस्टॉय जैसे दुनिया की कई बड़ी हस्तियों से मुलाकात की थी।

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6.गांधी जी ने डरबन, और जॉहिनसबर्ग में फुटबाल क्लब स्थापित करने में अहम भूमिका अदा की थी।

7.दक्षिण अफ्रीका में महात्मा गांधी को 15 हजार डॉलर मिलते थे जिसकी कीमत आज लगभग 10 लाख रुपए के बराबर है, इसके बावजूद गांधी जी भारत आए।

8.महात्मा गांधी को सम्मान देने के लिए एप्पल के फाउंडर स्टीव जॉब्स गोल चश्मा भी पहनते थे।

9.बापू के नाम से हमारे देश में 53 प्रमुख सड़कें हैं, इसके अलावा विदेशों में भी उनके नाम की 48 सड़के हैं।

10.स्वतंत्रता दिवस की रात गांधी जी ने उपवास रखा था, इसी वजह से वह नेहरू जी का भाषण भी नहीं सुन पाए थे।  

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