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जीप में पत्थरबाज को बांधने वाले मेजर गोगोई ने बताई पूरी कहानी, कहा- अगर न करता तो...

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| मई 23 , 2017 , 20:22 IST | श्रीनगर

घाटी में पत्थरबाजों से निपटने के लिए एक स्थानीय कश्मीरी युवक को आर्मी की जीप से बांधकर मानव ढाल की तरह इस्तेमाल करने वाले राष्ट्रीय राइफल्स के मेजर लीतुल गोगोई ने घटना पर चुप्पी तोड़ी है।

गोगोई ने मंगलवार को मीडिया के सामने आकर पूरी घटना की जानकारी दी। साथ ही कहा कि,

उनका यह कदम स्थानीय लोगों की जान बचाने के लिए उठाया गया था। अगर बेहद हिंसक हो चुकी भीड़ पर वे फायरिंग करवाते तो कम से कम 12 लोगों की जान चली जाती

बता दें कि गोगोई वही अफसर हैं, जिन्हें सेना प्रमुख ने आतंकवाद निरोधी कार्रवाई के लिए सम्मानित किया है।

सेना ने साफ किया है कि उनके इस सम्मान से जीप वाली घटना का कोई संबंध नहीं है, लेकिन इस मामले पर राजनीति शुरू हो गई है। कई पार्टियों ने मेजर को सम्मानित किए जाने पर तीखी प्रतिक्रियाएं दी हैं।

क्या बताया मेजर गोगोई ने

गोगाई ने बताया कि घटना इस साल 9 अप्रैल की है, जब बडगाम में उप चुनाव हो रहे थे। वे चुनाव में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय पुलिस और अन्य सिक्यॉरिटी फोर्सेज से कॉर्डिनेट कर रहे थे। गोगाई ने बताया कि,

उन्हें सुबह 9 बजकर 15 मिनट पर खबर मिली कि गुंडीपुरा के पास कुछ पोलिंग ऑफिसर्स और सुरक्षाकर्मी पोलिंग स्टेशन के अंदर फंस गए हैं क्योंकि भीड़ बाहर पथराव कर रही है। इसके बाद, वह क्विक रिएक्शन टीम के साथ मौके पर पहुंचे

रास्ते में उन्हें कई रोड ब्लॉक मिले, जिन्हें साफ करते हुए वे 30 मिन बाद मौके पर पहुंच जाए। वहां पहुंचकर उन्होंने हालात काबू में किया और पोलिंग स्टेशन के अंदर जाकर यह सुनिश्चित किया कि पोलिंग अफसर और सुरक्षाकर्मी पूरी तरह सुरक्षित हैं।

महिलाएं, बच्चे फेंक रहे थे पत्थर

गोगोई ने आगे बताया कि यहीं उन्हें डेढ़ किमी दूरी पर स्थित उतलीग्राम से एक और डिस्ट्रेस कॉल मिली। इसके बाद वह मौके के लिए रवाना हो गए। रोड ब्लॉक साफ करते हुए जब वह मौके पर पहुंचे तो वहां लोग पथराव कर रहे थे।

पथराव करने वालों में महिलाएं और बच्चे भी थे, जो छतों पर चढ़कर पत्थर फेंक रहे थे। मेजर ने बताया कि वे अपनी गाड़ियां से निकलने में असमर्थ थे। वे लाउडस्पीकर पर घोषणा कर रहे थे कि वे बस पोलिंग अफसरों को लेने के लिए आए हैं, लेकिन कोई उनकी बात सुनने के लिए तैयार नहीं था।

ऐसे पकड़ा गया फारूक डार

मेजर ने बताया कि,

उन्हें खुद से करीब 30 मीटर की दूरी पर एक शख्स दिखा, जो पथराव करने के साथ साथ भीड़ को उकसा रहा था। इसके बाद उन्हें अपनी क्विक रेस्पॉन्स टीम के साथियों से उस शख्स को पकड़ने के लिए कहा। उस शख्स ने बाइक से भागने की कोशिश की, लेकिन पथराव से बचते हुए सुरक्षाकर्मियों ने उसे पकड़ लिया। पकड़ा जाने वाला शख्स फारूक अहमद डार था, जिसे बाद में जीप से बांधा गया था

गोगोई ने कहा कि इस शख्स को लेकर वह पोलिंग बूथ की ओर बढ़ने लगे। बूथ में कई सुरक्षाकर्मी फंसे हुए थे। हालांकि, भीड़ और ज्यादा हिंसक हो गई और पथराव तेज हो गया। इसके अलावा, वहां घोषणा होने लगी, जिसके बाद स्थानीय लोगों की भीड़ बढ़ने लगी। तभी भीड़ ने उनपर पेट्रोल बम भी फेंका, हालांकि, वो फटा नहीं।

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मौके पर थी 1200 लोगों की भीड़

गोगोई के मुताबिक, लाउडस्पीकर पर ऐलान करने के बावजूद जब भीड़ ने उनकी बात नहीं सुनी तो उन्हें उस स्थानीय शख्स को जीप पर बांधने का ख्याल आया। ऐसा करते ही पत्थरबाजी रुक गई और उन्हें सभी पोलिंग अफसरों और सुरक्षाकर्मियों को लेकर वहां से निकलने का मौका मिल गया।

गोगोई ने जोर देकर कहा कि उनका यह कदम सिर्फ स्थानीय लोगों को बचाने के लिए था। मौके पर 1200 से ज्यादा लोगों की भीड़ थी, जो उनकी बात नहीं सुन रही थी। अगर वह फायरिंग का आदेश देते तो कम से कम 12 लोग मारे जाते।

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