राजनीति

छत्तीसगढ़ में सत्ता परिवर्तन के लिए साथ आएंगे मायावती और अजीत जोगी!

प्रशांत त्यागी, संवाददाता, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जुलाई 6 , 2018 , 13:06 IST

छत्तीसगढ़ में नई राजनीतिक बिसात बिछाने की तैयारी चल रही है। इसके मुख्य सूत्रधार बन रहे हैं पूर्व मुख्यमंत्री अजित जोगी। जोगी राज्य में तीसरे विकल्प के तौर पर उभरने की कोशिश कर रहे हैं।  छत्तीसगढ़ में इस साल के आखिरी में चुनाव है। बीजेपी को हराने के लिए बनते बिगड़ते फार्मूले में अजित जोगी नया राजनीतिक गणित बैठा रहे हैं। 

अजित जोगी ने बीएसपी की अध्यक्ष मायावती से बुधवार को दिल्ली में मुलाकात की है, जिसमें 2018 के विधानसभा चुनाव और 2019 के आम चुनाव को लेकर चर्चा हुई है। हालांकि गठबंधन पर अभी औपचारिक बयान नहीं आया है, लेकिन छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस के नेता काफी उत्साहित हैं।  अजित जोगी को लग रहा है कि बीएसपी के साथ जाने से कांग्रेस के विकल्प के तौर पर उनकी पार्टी खड़ी हो सकती है। हालांकि मायावती ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं। मायावती कांग्रेस से भी बातचीत कर रही हैं, जिसका नतीजा आना बाकी है, क्योंकि मायावती राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ तीनों राज्यों में पार्टी की बिसात बिछाने में लगी हैं। इन तीनों राज्यों में बीएसपी अभी अपनी जोर आजमाइश में लगी है। लेकिन फिलहाल छ्त्तीसगढ़ में कांग्रेस गठबंधन के मूड में दिखाई नहीं दे रही है। 

छत्तीसगढ़ में क्यों साथ आ रहे हैं मायावती और जोगी


बता दें छत्तीसगढ़ में 31. 8 फीसदी वोटर्स आदिवासी समुदाय से हैं और 11.6 फीसदी वोटर्स दलित हैं। साफ है दोनो समुदाय के मिलकर करीब 43.4 फीसदी वोट होतें जो किसी भी पार्टी को सत्ता में पहुंचाने के लिए काफी हैं। अजीत जोगी खुद आदिवासी समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं। 

राज्य में चुनाव से पहले एक बड़े गठबंधन का प्रस्ताव मायावती के सामने अजित जोगी ने रखा है। जिसमें राज्य के और छोटे दलों को साथ लेकर गैरबीजेपी, गैरकांग्रेस का विकल्प रखा जाए। इसे लेकर बातचीत जल्दी शुरू हो जाएगी। मायावती भी कांग्रेस के अलावा और दलों के साथ बातचीत कर रही हैं, जिससे ऐन मौके पर किसी भी तरह की दिक्कत से बचा जा सके। मायावती को लग रहा है कि कांग्रेस के साथ जाने में उनके हिस्से में कम सीटें आएंगी। इससे पार्टी का नुकसान हो सकता है।इसको लेकर पार्टी के भीतर मंथन चल रहा है।

कांग्रेस छत्तीसगढ़ में बीएसपी के साथ जाने में चुपचाप है तो मध्य प्रदेश, राजस्थान में बीएसपी के साथ गठबंधन करना चाहती है। मायावती चाहती हैं कि छत्तीसगढ़ पर भी कांग्रेस बातचीत करे लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है। अजित जोगी और कांशीराम से काफी अच्छे संबध रहे हैं। 

 
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कांशीराम जहां दलित समुदाय के लिए राजनीतिक लड़ाई लड़ रहे थे। वहीं अजित जोगी अनुसूचित जनजाति के कांग्रेस में बड़े नेता थे। जाहिर है कि राजनीतिक मजबूरियां दोनों को एक साथ खीच कर साथ खड़ा करने की कोशिश कर रहीं हैं लेकिन मायावती सिर्फ रिश्ते के बुनियाद पर अजित जोगी के साथ तालमेल के लिए हामी भरेगी इसकी संभावना कम है.मायावती को राजनीतिक फायदा होगा तभी वो गठबंधन के लिए तैयार हो सकती हैं।

छत्तीसगढ़ में बीजेपी के रमन सिंह की सरकार 15 साल से चल रही है.जिसको हटाने के लिए कांग्रेस नाकाम रही है। खुद अजित जोगी जब कांग्रेस में थे तब भी रमन सिंह चुनाव जीत रहे थे। लेकिन इस बार बीजेपी के पक्ष में माहौल पहले जैसा नहीं है लेकिन कांग्रेस बीजेपी की सीधी टक्कर की जगह तीसरा विकल्प तैयार होता है तो बीजेपी को फायदा होगा, क्योंकि बीजेपी के खिलाफ जा रहा वोट कई हिस्सों में बंट सकता है। जिससे रमन सिंह चौथी बार सत्ता में वापसी कर सकते हैं।


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