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एमसीडी चुनाव: नतीजों के बाद बीजेपी, आप और कांग्रेस के लिए अब आगे क्या?

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अप्रैल 26 , 2017 , 17:19 IST | नई दिल्ली

एमसीडी चुनाव के नतीजे बीजेपी, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस तीनों के लिए अलग-अलग मायने रखती है। बीजेपी को पता है कि दिल्ली एमसीडी में भी मोदी लहर ने ही पार्टी को प्रचंड जीत दिलाई है। आप के लिए चुनावी नतीजे खतरे की घंटी है। क्योंकि दिल्ली विधानसभा चुनाव से जो आप की राजनीति में धमक कायम हुई थी वो एमसीडी चुनाव में जाकर घराशाई हो गई। कांग्रेस भी कोई खास कमाल नहीं कर पाई।

Bjp vs aapp

वैसे बीजेपी गदगद इसलिए भी है कि पार्टी नेतृत्व को लग रहा है कि इस लहर से वो दिल्ली विधानसभा चुनाव भी जीत जाएगी।

मोदी लहर के लिए जश्न मनाने का है समय

चुनावी नतीजों को लेकर बीजेपी जश्न मना सकती है। पार्टी रणनीतिकारों ने अलग फैसला लेते हुए इस चुनाव को पूरी तरह अपनी ओर मोड़ दिया। वर्तमान पार्षदों या उनके रिश्तेदारों को टिकट न देने का बड़ा निर्णय हुआ और पीएम मोदी को चुनाव का चेहरा बना दिया गया।

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नतीजा यह हुआ कि तीनों एमसीडी में बीजेपी की अभूतपूर्व जीत हुई। दिल्ली के लोग जानते हैं कि पिछले दस सालों में बीजेपी शासित एमसीडी में अनेक नेताओं पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे और यह भी कहा गया कि साफ-सफाई और अन्य मामलों कोई काम नहीं हुआ। इसके बावजूद दिल्ली के लोगों ने इस चुनाव में बीजेपी को जिता दिया। भ्रष्टाचार और काम में लापरवाही जैसी बातें मुद्दा ही नहीं बन पाईं।

हर बात में मोदी-बीजेपी पर आरोप लगाना केजरीवाल को पड़ा भारी

आम आदमी पार्टी की हार का एक बड़ा कारण यह भी है कि लोगों ने बीजेपी को जिताने के लिए नहीं, बल्कि आप को हराने के लिए भी वोटिंग की है। वरना ऐसा क्यों होता कि बीजेपी शासित एमसीडी पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप भूला दिए गए।

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इस हार के बाद आप नेताओं ने एक बार फिर से ईवीएम पर सवाल खड़े किए हैं, लेकिन दिल्ली के लोग मानते हैं कि आप सरकार ने काम कम किए और उनका प्रचार ज्यादा किया। लोग इस बात से भी खफा थे कि सीएम आरोप लगाते हैं कि उपराज्यपाल और केंद्र सरकार उन्हें काम नहीं करने दे रहे, जबकि इन्हीं हालात में शीला दीक्षित ने भी काम करते हुए दिल्ली को एक नई पहचान दी थी। इस बात की संभावना बढ़ रही है कि इस हार के बाद आप में केजरीवाल के नेतृत्व पर सवाल उठने लगे।

15 साल तक दिल्ली पर राज करने वाली कांग्रेस हाशिए पर

इस हार के बाद जितनी समस्याएं आम आदमी पार्टी के सामने आने वाली हैं, उससे कहीं ज्यादा समस्याएं कांग्रेस को झेलनी पड़ सकती हैं। जिस कांग्रेस ने लगातार 15 साल दिल्ली पर राज किया, उसकी हालत राजधानी में बेहद खराब हो गई है। इन नतीजों ने यह बता दिया है कि अगर कांग्रेस पहले की तरह सभी नेताओं को साथ लेकर चलती तो नतीजे शायद इससे बेहतर आ सकते थे।

नतीजों ने यह भी बता दिया है कि माकन का रूखा व्यवहार और 'एकला चलो' की नीति ने उन्हें नुकसान तो पहुंचाया है। शायद माकन को भी इस गलती का अहसास हुआ है, तभी उन्होंने अपने इस्तीफे के ऐलान किया है।

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