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जज्बे को सलाम! कैंसर को मात देकर रोजाना हजारों लोगों की प्यास बुझा रहा यह 'मटकामैन'

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जून 16 , 2017 , 13:06 IST | नयी दिल्ली

दिल्ली में रहने वाला एक शख्स रोजाना हजारों लोगों की प्यास बुझाता है। इस इंसान का नाम है अलग नटराजन। 68 साल के अलग नटराजन रिटायर्ड इंजीनियर हैं। उन्होंने लंदन में इंजीनियर के तौर पर 32 साल तक काम किया। 2005 में वो वापस भारत लौट आए। एक दिन उन्हें पता चला कि उन्हें आंत में कैंसर है। फिर कैंसर के खिलाफ लंबा लड़ाई शुरू हुई। इस लड़ाई में नजराटन की जीत हुई। नटराजन अब कैंसर मुक्त हैं और दिल्ली में रहते हैं। कैंसर ने उनकी जिन्दगी बदल दी।  

कैंसर को सफलतापूर्वक मात देने के बाद उनके मन में समाज सेवा की भावना पैदा हुई। उन्होंने कैंसर अस्पताल में स्वेच्छा से अपनी सेवाएं दी। इसके अलावा उन्होंने लोगों के अंतिम संस्कार के लिए गरीबों की यथासंभव मदद की। अब वो ज़रूरतमंदों को जो भी संसाधन उनके पास उपलब्ध है उनके मदद कर रहे हैं।

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दिल्ली में रहने वाले नटराजन रोज हजारों लोगों की प्यास बुझाते हैं। इस नेक काम में नजराजन सुबह चार बजे से लग जाते हैं। अलग नटराजन को डेढ़ घंटे लगते हैं 60 से ज़्यादा मटकों में पानी भरने में। इन मटकों को उन्होंने दक्षिणी दिल्ली में कई जगह रखा है ताकि आम और ग़रीब लोगों को पीने के लिए साफ़ पानी मिल सके।

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नटराजन दिल्ली के पंचशील पार्क में रहते हैं। लोगों को पानी पिलाने की वजह से लोग उन्हें 'मटकामैन' के नाम से जानने लगे हैं। दरअसल, उन्हें प्यासों को पानी पिलाकर समाज के लिए कुछ करने का विचार आया। इसके लिए उन्होंने एक मटका खरीदा और चल पड़े प्यासों की प्यास बुझाने। उन्होंने matkaman.com नाम से एक वेबसाइट भी बनाई है। उनका मानना है कि हमें जीवन में दूसरों की मदद करते रहना चाहिए।

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मटकों के अलावा उन्होंने जगह-जगह साइकिल पंप भी लगा रखे हैं। उनकी वेबसाइट के अनुसार वो गरीबों और मजदूरों में हर हफ्ते 40 से 50 किलो फल भी वितरित करते हैं।

अगर हम किसी की मदद नहीं कर सकते तो हमें किसी को चोट तो बिलकुल नहीं पहुंचाना चाहिए। अलग नटराजन एक मिसाल हैं हम सब के लिए, उनके साथ कई वॉलेंटियर भी जुड़े हैं जो उनकी इस नेक काम में मदद कर रहे हैं।


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