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खतरे में अटल बिहारी वाजपेयी का 'राष्ट्रधर्म', मोदी सरकार ने रद्द की मान्यता!

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अप्रैल 10 , 2017 , 14:57 IST | नयी दिल्ली

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के द्वारा शुरू की गई 'राष्ट्रधर्म' पत्रिका के भविष्य पर संकट आ गया है। केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्रालय ने राष्ट्रधर्म पत्रिका की डायरेक्टेट ऑफ एडवरटाइजिंग एंड विजुअल पब्लिसिटी(डीएवीपी) की मान्यता को रद्द कर दी है। जिसके बाद यह पत्रिका केंद्र के विज्ञापनों की सूची से बाहर हो गई है। 

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राष्ट्रधर्म पत्रिका के संपादक थे वाजपेयी

बता दें कि राष्ट्रधर्म पत्रिका की शुरुआत 1947 में हुई थी, अटल बिहारी वाजपेयी इस पत्रिका के संस्थापक संपादक थे, तो वहीं जनसंघ के संस्थापक पं. दीनदयाल उपाध्याय पत्रिका के संस्थापक प्रबंधक थे।

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इस पत्रिका का मकसद संघ के द्वारा राष्ट्र के प्रति लोगों के धर्म के बारे में जागरुक करने का था।

804 पत्र-पत्रिकाओं की मान्यता हुई रद्द

सूचना प्रसारण मंत्रालय की ओर से एक पत्र जारी किया गया है, जिसमें कुल 804 पत्र-पत्रिकाओं की डीएवीपी मान्यता को रद्द किया गया है। इस लिस्ट में यूपी से 165 पत्रिकाएं शामिल हैं।

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इस वजह से मान्यता हुई रद्द

पत्र में बताया गया है कि अक्टूबर 2016 के बाद से इन पत्रिकाओं की कॉपी पीआईबी और डीएवीपी के ऑफिस में जमा नहीं कराई गई है। यह पहली बार है कि राष्ट्रधर्म पर इस प्रकार की कोई मुसीबत आई है।

राष्ट्रधर्म पत्रिका की ओर से जारी बयान में इस कार्रवाई को पूरी तरह से अनुचित बताया गया है। राष्ट्रधर्म के प्रबंधक पवन पुत्र बादल के अनुसार अभी उनके पास इस बात की कोई जानकारी नहीं है, लेकिन अगर ऐसा होता है तो यह गलत है।
उन्होंने बताया कि,

आपातकाल के दौरान इंदिरा गांधी सरकार ने हमारे कार्यालय को सील करवा दिया था, उस समय भी पत्रिका का प्रकाशन बंद नहीं हुआ था

उन्होंने कहा कि अगर किसी कार्यालय को कॉपी नहीं मिली है, तो उसे नोटिस देकर पूछना चाहिए था। बिना किसी नोटिस के कार्रवाई करना अनुचित है।

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