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जामिया मिलिया से छिनेगा अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा! केन्द्र देगा नया हलफनामा

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अगस्त 7 , 2017 , 14:22 IST | नयी दिल्ली

दिल्ली स्थित जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी को केंद्र सरकार अल्पसंख्यक संस्थान नहीं मानती है। सरकार का तर्क है कि इस संस्थान को संसद के कानून के तहत बनाया गया है और केंद्र से इसे आर्थिक मदद मिलती है इसलिए इसे मिला माइनॉरिटी स्टेटस गलत है।

अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा छिनने के लिए केंद्र सरकार जल्द दिल्ली हाईकोर्ट में चल रहे संबंधित मामले में नया हलफनामा दायर करेगी जिसमें लिखा जाएगा कि जामिया को अल्पसंख्यक दर्जा दिया जाना एक गलती थी। एचआरडी मंत्रालय अब अदालत को यह भी बताएगा कि जामिया मिलिया इस्लामिया का उद्देश्य कभी भी अल्पसंख्यक संस्था नहीं था, क्योंकि इसे संसद के एक अधिनियम द्वारा स्थापित किया गया था और केंद्र सरकार द्वारा वित्तपोषित किया जाता है।

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इससे पहले 22 फरवरी 2011 में तत्कालीन यूपीए-2 सरकार के कार्यकाल के दौरान राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग (एनसीएमईआई) ने अपने आदेश में कहा था कि यह एक अल्पसंख्यक संस्थान है। तत्कालीन अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने जनवरी 2016 में तत्कालीन शिक्षा मंत्री समृति ईरानी के कार्यकाल में ही सलाह दी थी कि मंत्रालय जामिया के माइनॉरिटी स्टेटस पर कोर्ट में अपना पक्ष बदल सकता है। अटॉर्नी जनरल ने यह भी जानकारी दी थी कि एनसीएमईआई का आदेश कानून के मुताबिक नहीं है।

केंद्र का मानना है कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और जामिया मिलिया इस्लामिया को केंद्रीय विश्वविद्यालय और अल्पसंख्यक संस्थान दोनों का दर्जा नहीं दिया जा सकता।

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(फाइल फोटो)

आपको बता दें कि संविधान के अनुच्छेद 30 (1) सभी धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों को स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों सहित शैक्षिक संस्थानों को स्थापित करने और चलाने का अधिकार देता है। इसी के तहत कांग्रेस शासन में एनसीएमई 2011 में आदेश के अनुपालन में था कि जेएमआई विश्वविद्यालय ने अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रओं के लिए आरक्षण रोक दिया और मुस्लिम उम्मीदवारों के लिए प्रत्येक पाठ्यक्रम में अपनी आधी सीटें अलग कर दी। इसमें से प्रत्येक पाठ्यक्रम में कुल सीटों का तीस प्रतिशत मुस्लिम आवेदकों के लिए निर्धारित किया गया था, 10 फीसदी मुस्लिम महिला आवेदकों के लिए और अन्य 10 प्रतिशत मुस्लिम अन्य पिछड़ा वर्ग और अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित किया गया था, जैसा कि केंद्र सरकार की सूची के तहत अधिसूचित किया गया था।

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(फाइल फोटो)

जब इस आदेश को कानूनी रूप से चुनौती दी गई थी, तब मानव संसाधन विकास मंत्रालय तत्कालीन मंत्री कपिल सिब्बल के अधीन यूपीए सरकार के एक उच्च न्यायालय में शपथ पत्र प्रस्तुत करते हुए कहा था कि सरकार एनसीईएमआई द्वारा घोषित घोषणा का सम्मान करती है। जेएमआई अधिनियम की धारा 2 (ओ) के मुताबिक 1920 में अलीगढ़ में मुस्लिम राष्ट्रवादी नेताओं द्वारा स्थापित जामिया विश्वविद्यालय की स्थापना महात्मा गांधी द्वारा कॉलोनियल शासन के समर्थन या चलाने वाले सभी शैक्षणिक संस्थानों के बहिष्कार के जवाब में की गई थी। जामिया मिलिया इस्लामिया समाज नामक एक पंजीकृत समाज द्वारा चलाया गया और 1962 में जेएमआई एक समन्वित विश्वविद्यालय बन गया। 1988 में केंद्रीय कानून के माध्यम से इसे केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिला।


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