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मोदी जी कुछ करिए..देश कुलभूषण जाधव पर कोई त्रासदी फिल्म नहीं देखना चाहता !

icon कुलदीप सिंह | 0
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| अप्रैल 13 , 2017 , 11:58 IST | नई दिल्ली

किसी चलते फिरते शख्स को जासूस बता देना फौजी दबदबे वाले देश में बेहद आसान काम है, पाकिस्तान कुलभूषण जाधव को सूली पर चढ़ाकर आतंकवाद पर खोई हुई साख दोबारा हासिल करने का ख्वाब देख रहा है।

भारतीय नौसेना में अधिकारी रहे कुलभूषण जाधव मार्च 2016 से पाकिस्तानी फौज के कब्जे में हैं। फौज का दावा है कि जाधव को ईरान से सटी सीमा पर रणनीतिक दृष्टि से महत्तवपूर्ण बलूचिस्तान इलाके से गिरफ्तार किया गया था, जहां वो पाकिस्तान विरोधी आतंकी गतिविधियों को हवा देने का काम कर रहा था। भारत का पक्ष है कि पूर्व नौसेना अधिकारी कुलभूषण जाधव को 2016 में ईरान के तटवर्ती शहर चाबहार से आईएसआई ने अगवा किया और पाकिस्तानी फौज को सौंप दिया। भारत के मुताबिक कुलभूषण चाबहार में रिटायरमेंट के बाद व्यापार कर रहा था, जबकि पाकिस्तान का दावा है कि वो बलूचिस्तान में पाक विरोधी आंदोलन की आग में घी डाल रहा था। पाकिस्तान ने कुलभूषण जाधव के कथित इकबालिया बयान का एक वीडियो महीनो पहले ही मीडिया में लीक कर दिया था जिसमें कुलभूषण ने खुद को भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ का एजेंट होना स्वीकारा था। इसे बड़ी कूटनीतिक चूक कहा जा सकता है कि जब पाकिस्तान यू-ट्यूब के ज़रिए कुलभूषण जाधव को जासूस साबित करने पर आमादा था तब भारत की सरकार ने कुछ नहीं किया न सीधे और न ही बैकडोर से।

एक ख़बर ये भी है कि महीनों से पाकिस्तान की कैद में रहे कुलभूषण यादव को स्थानीय अदालत ने मौत की सजा इसलिए सुनाई क्योंकि जाधव को अगवा करने वाली पाकिस्तानी टीम का एक पूर्व अफसर मुहम्मद हबीब जहीर भारत के कब्जे में है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जहीर कुलभूषण को सजा सुनाए जाने के कुछ दिन पहले ही भारत-नेपाल सीमा पर भारतीय एजेंसियों के हत्थे चढ़ गया था, हबीब जहीर कोई राज न खोल दे इसलिए आनन-फानन में एकतरफा कार्रवाई करते हुए जाधव को मौत की सजा सुना दी गई। सच क्या है ये तो घटनाक्रम के किरदार बेहतर जानते हैं लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि कुलभूषण जाधव की जान बचाई जा सकती है क्या? जवाब है हां ....

अगर मोदी सरकार चाहे तो ये मुमकिन है कुलभूषण जाधव की फौरन रिहाई तो नहीं लेकिन कम से कम उसकी मौत की सजा तो टाली ही जा सकती है। आप पूछेंगे कैसे? ठीक वैसे ही जैसे मोदी ने 2014 का चुनाव जीतने के बाद नवाज शरीफ से दोस्ती बढ़ाकर दुनिया को चौंका दिया था, ठीक वैसे ही जैसे मोदी ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को अहमदाबाद में झूला झुलवाकर दुनिया को ये दिखा दिया था कि भारत-चीन में पारंपरिक दुश्मनी की भावना नहीं बल्कि व्यापार को बढ़ावा देने की चाहत ज्यादा है। ये मोदी मैजिक का ही कमाल है कि भारत 2014 के बाद से लगातार अंतराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान को अलग-थलग करता आया है। मुमकिन है कि ये भी जाधव को फांसी देने के पीछे की एक वजह बनी हो लेकिन अब मोदी ही हैं जो जाधव की फांसी के फैसले को अपने करिशमाई नेतृत्व से बदलवा सकते हैं। इस काम को अंजाम देने के लिए भारत को अपने रुख में थोड़ा नरमी लानी होगी और मोदी को शायद बातचीत की पहल करने का बहाना भी ढूंढना पड़े। मोदी चाहें तो कुलभूषण को दूसरा सरबजीत बनने से रोक सकते हैं और ऐसी व्यवस्था कर सकते हैं कि सरबजीत की तर्ज पर जाधव की पाकिस्तानी जेल में हत्या न की जाए।

मोदी चाहें तो भारतीय विदेश मंत्रालय पाकिस्तान पर इतना दबाव बना सकता है कि वो चाहकर भी कुलभूषण जाधव की हत्या न करवा सके। ख़बरों के मुताबिक भारत कुलभूषण जाधव के मामले को अंतराष्ट्रीय अदालत में ले जा सकता है और वहां पाकिस्तान पर वियना समझौते के उल्लंघन का आरोप साबित कर कुलभूषण को फौरी मदद पहुंचा सकता है। ऐसे हो या वैसे हो जैसे भी हो पाकिस्तान को कुलभूषण की जिंदगी छीनने से रोका जा सकता है। ज्यादा बेहतर तरीका होगा कि कुलभूषण जाधव मामले पर दोनों देशों के बीच प्रधानमंत्री स्तर की बातचीत के प्रयास हों, ज्यादा बेहतर होगा कि एक बार फिर चीन के सहयोग से अकड़ दिखा रहे पाकिस्तान को अहसास कराया जाए कि पड़ोसी से लंबा बिगाड़ रखना व्यापार और तरक्की के लिए अच्छी बात नहीं है। पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नासिर खान जांजुआ ने कहा है कि भारत और पाकिस्तान हमेशा दुश्मन नहीं बने रह सकते। संसद में तो मोदी के मंत्रियों ने (सुष्मा स्वराज और राजनाथ सिंह) कहा है कि किसी भी कीमत पर जाधव को बचाएंगे और अगर पाकिस्तान ने जाधव को फांसी दी तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इन बयानों से जनता का गुस्सा तो शांत किया जा सकता है लेकिन इससे दोनों देशों के बीच तनाव घटने की बजाए शायद बढ़ ही जाए। यहां तो जबरदस्त कूटनीति ही काम आ सकती है उस पर भी अगर मोदी जैसा करिश्माई नेता इसकी पहल करे तो बात बन सकती है।

कुलभूषण के बदले कैदियों का लेन-देन भी एक रास्ता है, जो भी हो लेकिन कुलभूषण जाधव को लेकर भारत सरकार को कुछ ठोस उपाय खोजना होगा क्योंकि भारतीयों के गुस्से की वजह से बड़ी राजनैतिक कीमत चुकाने का जोखिम मोदी भी नहीं लेना चाहेंगे। सच तो ये है कि देश सरबजीत की तरह कुलभूषण जाधव की त्रासदी पर कोई बॉलीवुड फिल्म बनते देखना नहीं चाहता।