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मालाबार नौसैनिक अभ्यास से चीन को हुई परेशानी, G20 में मिले मोदी-शिंजो आबे

कुलदीप सिंह, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जुलाई 8 , 2017 , 21:13 IST | नई दिल्ली

बंगाल की खाड़ी में भारत, जापान और अमेरिकी नौसेनाओं के बीच चल रहे संयुक्त सैन्य अभ्यास के बीच भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के उनके समकक्ष शिंजो आबे ने जी-20 सम्मेलन से इतर द्विपक्षीय संबंधों में प्रगति की समीक्षा की, जिसमें कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर चर्चा हुई। दोनों देशों के बीच आठ महीने पहले ही असैन्य परमाणु सहयोग को लेकर एक संधि हुई है।

बंगाल की खाड़ी में चल रहे संयुक्त सैन्य अभ्यास को लेकर चीन चिंता व्यक्त कर चुका है।


मोदी और आबे के बीच शुक्रवार को हुई बैठक के बाद विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक वक्तव्य में कहा गया,

दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों में प्रगति की समीक्षा के लिए एक संक्षिप्त बैठक की।

वक्तव्य में कहा गया है, 

प्रधानमंत्री मोदी ने नवंबर, 2016 में अपनी जापान यात्रा के बाद से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों में प्रगति पर संतुष्टि व्यक्त की।

प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि वह इसी वर्ष अगले वार्षिक द्विपक्षीय सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए जापान के प्रधानमंत्री आबे के भारत आगमन का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने यह उम्मीद भी जताई कि आबे की आगामी भारत यात्रा दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करेगी।

क्या है मालाबार सैन्याभ्यास?

23 साल पहले भारतीय उपमहाद्वीप में भारत और अमेरिका की नौसेना के बीच समन्वय बढ़ाने के लिए मालाबार एक्सरसाइज शुरू की गई थी। 

1994 में शुरू हुए मालाबार नौसैन्य अभ्यास का ये 21 वां संस्करण है 

1998 में भारत द्वारा परमाणु परिक्षण करने के बाद दो साल तक ये सैन्याभ्यास बंद रहा था। 

10 जुलाई से शुरू होने वाली ये एक्सरसाइज 10 दिनों तक चलेगी 

इस अभ्यास में अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर USS-Nimitz, भारत का विमानवाहक पोत INS विक्रमादित्य और जापानी नौसेना का Izumo-class हेलिकाप्टर कैरियर हिस्सा लेगा। 

इस अभ्यास में भारतीय नौसेना के शिवालिक क्लास स्टेल्थ फ्रिगेट, रणवीर क्लास डिस्ट्रोयर हिस्सा ले सकते हैं।

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चीन को मालाबार एक्सरसाइज से क्यों है परेशानी?

चीन की नौसेना बंगाल की खाड़ी में भी साउथ चाइना सी की तरह अपना प्रभुत्तव बढ़ाने की कोशिश कर रही है। चीन भारत-अमेरिका-जापान की सेनाओं के साथ में सैन्याभ्यास करने को स्वाभाविक ख़तरा मानता है। 

दक्षिण चीन सागर में चीन और अमेरिका की सेनाओं के बीच पहले से ही तनातनी चल रही है। 

अमेरिका नॉर्थ कोरिया और चीन से लगी समुद्री सीमा पर अपनी मौजूदगी कायम रखना चाहता है ताकि जरूरत पढ़ने पर उसकी नौसेना दुश्मन पर त्वरित कार्रवाई कर सके।  


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