बिज़नेस

'मूडीज' ने बजाई आर्थिक खतरे की घंटी, चीन के बाद घटाई 'हांगकांग' की भी रेटिंग

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
1141
| मई 25 , 2017 , 20:34 IST | हांगकांग

ग्लोबल रेटिंग एजेंसी मूडीज की रिपोर्ट से एशिया के कई देशों में खलबली मची है। साथ ही इससे कई तरह की आशंकाओं को भी बल मिल रहा है।

एशिया में आर्थिक मंदी की आहट ?


चीन समेत एशिया के कई देशों में आर्थिक मंदी के बादल मंडराने लगे हैं। दरअसल अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी 'मूडीज' ने पहले एशिया की सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति यानि चीन की रेटिंग घटा दी और एक दिन बाद हांगकांग की क्रेडि‍ट रेटिंग को भी घटा दि‍या। मूडीज ने तर्क दिया है कि चीन के नजदीक होने की वजह से हांगकांग पर भी खतरा लगातार बढ़ रहा है।


मूडीज ने हांगकांग की रेटिंग को Aa1 से Aa2 कर दि‍या गया है, हालांकि एजेंसी ने इसका आउटलुक नि‍गेटि‍व से स्‍टेबल कर दि‍या है।

दरअसल रेटिंग एजेंसी मूडीज ने 28 साल बाद चीन की रेटिंग को Aa3 से घटाकर A1 कर दिया, जिसके बाद एशिया ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर इस बात की चर्चा होने लगी की क्या यह आर्थिक मंदी के संकेत हैं।

हांगकांग के संबंध में मूडीज की दलील :

मूडीज ने कहा कि चीन का स्‍टॉक मार्केट भी अलग टाई-अप के जरि‍ए शंघाई और शेनजेन से जुड़ा हुआ है। एजेंसी ने बयान जारी कर कहा है कि हांगकांग में डाउनग्रेड इस बात को दर्शाता है कि‍ चीन के क्रेडि‍ट ट्रेंड का असर हांगकांग के क्रेडि‍ट प्रोफाइल पर भी पड़ता रहेगा। ऐसा इसलि‍ए क्योंकि दोनों की इकोनॉमी, फाइनेंशि‍यल और पॉलिटिक्स एक-दूसरे के काफी करीब है। मूडीज का कहना है कि चीन के कर्ज में भारी बढ़ोत्तरी के बीच इकोनॉमिक ग्रोथ में स्लोडाउन आने की चिंताओं के बीच यह कदम उठाया है। यह कर्ज पिछले कई सालों तक चीन की आर्थिक वृद्धि को बढ़ाता रहा है। हालांकि, कुछ विश्लेषकों को चीन की कर्ज लेते रहने की आदत के छूटने को लेकर आशंका है। ऐसी स्थिति में हांगकांग को प्रभावि‍त होना लाजिमी है।  

Moody's-3

ग्लोबल इकोनॉमी क्या कहती है ? :

अर्थशास्त्र में सीधा नियम है कि ग्लोबलाइजेशन के दौर में अगर किसी बड़े देश की आर्थिक संकट गहराता है, तो आस-पास और उनसे जुड़े तमाम देशों में भी इसका व्यापक असर पड़ता है। हालांकि चीन और हांगकांग दोनों ही देशों ने मूडीज की रेटिंग पर सवाल उठाए हैं।

हांगकांग ने जताया कड़ा एतराज :

हांगकांग के वित्त सचिव पॉल चेन ने मूडीज के इस कदम का कड़ा विरोध किया है। पॉल कहा कि मूडीज ने बेहतर इकोनॉमि‍क फंडामेंटल, मजबूत फाइनेंशि‍यल रेग्युलेटरी सिस्टम और आर्थिक स्थिति को नजरअंदाज कर दिया है। वित्त सचिव ने तर्क देते हुए कहा कि बेल्ट और रोड प्रणाली से हांगकांग को नए बि‍जनेस सेंटर में उतरने में काफी मदद मि‍ली है। इससे शहरी अर्थव्यवस्था को भी काफी फायदा मि‍ला है। साथ ही बीते कई वर्षों से वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चीन विकास का आधार बना है।

ड्रैगन ने भी मूडीज को लताड़ा : चीन ने रेटिंग एजेंसी की मेथडोलॉजी पर सवाल उठाए हैं। चीन की फाइनेंस मिनिस्ट्री ने कहा कि मूडीज का रेटिंग डाउनग्रेड करने का फैसला उसकी गलत मेथडोलॉजी पर आधारित है। इसमें आर्थिक समस्याओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया और रिफॉर्म के प्रयासों को कम आंका गया है।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल उठता है कि क्या चीन के असर से भारत अछूता रहेगा। सरकार कह रही है कि देश की अर्थव्यवस्था पटरी है। लेकिन अगर पिछले 2-3 वर्षों का आकलन किया जाए तो कई क्षेत्रों में हम लगातार पिछड़ते जा रहा हैं। खासकर सरकार नए रोजगार पैदा करने में पूरी तरह नाकाम रही है।

 

सबसे खराब स्थिति तो आईटी सेक्टर की है, जहां कई लाख नौकरियां खतरे में हैं। नोटबंदी ने तो छोटे और मंझौले उद्योग की कमर ही तोड़कर रख दी है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि अगर मूडीज के रिपोर्ट सही साबित होते हैं, तो भारत अपने आप को कैसे बचाएगा।


कमेंट करें