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राजकुमार राव की सॉलिड एक्टिंग के साथ आतंक की दुनिया को दिखाती है 'ओमेर्टा'

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| मई 4 , 2018 , 16:01 IST

शाहिद, सिटी लाइट्स, अलीगढ़ जैसी बेहतरीन फिल्में बानाने वाली हंसला मेहता और राजकुमार राव की जोड़ी एक बार फिर अपनी फिल्म 'ओमेर्टा' दर्शकों के लिए लेकर आई है। ये फिल्म सिनेमाघरों में शुक्रवार को रिलीज़ हो गयी है। फिल्म को कई फेस्टिवल्स में पहले ही दिखाया जा चुका है जहां इसकी तारीफ़ भी हुई हैं। इस फिल्म को सेंसर में मंजूरी के लिए काफी पापड़ बेलने पड़े।

आइए जानते हैं कि फिल्म कैसी है-

कहानी-

फिल्म की कहानी ओमार शाहिद शेख (राजकुमार राव) की है जो पैदा तो पाकिस्तान में हुआ, लेकिन उसका पालन-पोषण और परवरिश लंदन में हुई है। ओमार, बोसनिया में मुसलामानों पर हुए हमलों का बदला लेने के लिए पहले पाकिस्तान जाता है और फिर वहां से भारत के दिल्ली में रहकर कई घटनाओं को अंजाम देता है। फिल्म में 1992 से लेकर 2002 तक की अवधि में ओमार के क्रियाकलापों के बारे में बताया गया है। जिसमें दिल्ली में विदेशियों की किडनैपिंग, कांधार विमान समझौता, वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला और साथ ही ब्रिटिश जर्नलिस्ट डेनियल पर्ल की हत्या के साथ-साथ और भी कई अहम घटनाओं का जिक्र है। फिल्म में तमाम संदर्भों को किस तरह दिखाया गया है इसके लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।

डायरेक्शन -

यह फिल्म मात्र 98 मिनट की है जो कि हंसल मेहता की आज तक की सबसे छोटी फिल्म है।ऐसी फिल्म हंसल मेहता जैसे फिल्ममेकर ही बना सकते हैं। फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर बहुत बढ़िया है। कई ऐसे सीन हैं जो आपको सोचने पर विवश करते हैं कि क्या सच में इतना खतरनाक आतंकवादी था ओमार। फिल्म की रिसर्च वर्क कमाल है। फिल्म देखते हुए ऐसा बिल्कुल नहीं लगता कि इसे बनाने के लिए हंसल मेहता ने एक बार भी ओमार या उसके परिवार से मुलाक़ात नहीं की हो। फिल्म की रफ़्तार बहुत ही शानदार है।

राजकुमार ने की है जबरदस्‍त एक्‍ट‍िंग-

फिल्‍म में राजकुमार राव मुख्‍य किरदार में हैं। कहने की जरूरत नहीं कि उन्‍होंने आतंकी उमर शेख को पर्दे पर किस गहराई से उतारा है। उन्‍होंने एक बार फिर साबित किया है कि वो जबरदस्‍त हैं। ब्रिटिश अंदाज में उच्‍चारण से लेकर देसी लहजे और खतरनाक मुस्‍कान से लेकर गिरफ्तारी तक- राजकुमार ने उमर के हर अंदाज और आचरण को पर्दे पर जिंदा कर दिया है। हालांकि, उनके इर्द-गिर्द फिल्‍म में किसी और एक्‍टर के लिए करने को ज्‍यादा कुछ नहीं है, लेकिन फिर भी टिमोथी रायन ने डेनियल पर्ल के किरदार में राव के गंभीर अभ‍िनय के बराबर काम किया है।

कमजोर कड़ियां -

हंसल मेहता ने फिल्‍म को तथ्‍यों और किरदार के वैचारिक स्‍तर तक ही रखा है। फिल्‍म इस बात पर केंद्र‍ित नहीं है कि उमर ने अपने वहशी इरादों को कैसे अंजाम दिया। हंसल मेहता ने ऐसे में खुद अपने लिए सीमाएं बांध लीं और जाहिर तौर पर राजकुमार राव के लिए एक्‍शन के तौर पर करने के लिए ज्‍यादा कुछ नहीं बचा। लिहाजा, ‘ओमर्टा’ आपको भावनात्‍मक रूप से जोड़ने में नाकाम साबित होती है।

क्यों देखें:

फिल्म की कहानी पूरी तरह से सच्ची घटनाओं पर आधारित है। जो आपको 90 के दशक की कई बड़ी व अहम आतंकवादी घटनाओं के बारे में जानकारी देती है। फिल्म का निर्देशन और अभिनय दोनों ही बेहतरीन हैं। फिल्म आपको एंटरटेन शायद न करे लेकिन आपको जानकारी काफी सारी दे देगी।


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