ख़ास रिपोर्ट

NYT रिपोर्टर की जुबानी, भारत के गांवों में बेहद आसान है हत्या कर खुल्ला घूमना (केस स्टडी)

सतीश वर्मा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| सितंबर 13 , 2017 , 14:21 IST | पीपलीखेड़ा

हरियाणा के पीपलीखेड़ा गांव में पुलिस अपने इंवेस्टीगेशन में एक औरत के मर्डर को एक्सीडेंट बताकर केस क्लोज कर देती है। एक आम भारतीय पत्रकार के लिए यह एक रुटीन खबर होती है और वह भी इसे क्लोज कर देता है। मगर न्यूयार्क टाइम्स की एक रिपोर्टर एलेन बरी के लिए केस वहीं खत्म नहीं होती है, उसके लिए यह महज एक केस नहीं था बल्कि एक अनसुलझी पहेली थी। वो अमेरिका से वापस भारत आती है गीता मर्डर केस की अनसुलझी पहेलियों को सुलझाती है। इस केस की अनसुलझी पहेलियों को सुलझाने के दौरान उसे भारत की न्यायिक-सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था की गंदी सच्चाईओं से भी सामना करना पड़ता है जिसकी वो उम्मीद नहीं कर रही थी।

हरियाणा के पीपलीखेड़ा गांव में एक पति मुकेश अपने पत्नी गीता को इसलिए मार देता है कि वो उसे पसंद नहीं करता था और उसका संबंध किसी दूसरी लड़की के साथ था। केस ओपन एंड शट था। बीच आंगन में गीता के पति ने दर्जन भर लोगों के सामने मोटे बांस के डंडे से पीट-पीट कर अपनी पच्नी गीता का कत्ल बेरहमी से करता है और लोग मूकदर्शक बन कर देखते रहते हैं। गीता के घर के बगल में हैंड पंप के पास ढोपड़ी में रह रही अंजुम नाम की महिला भी अपनी आंखों के सामने कत्ल होते देखी थी और उसी ने न्यूयार्क टाइम्स के रिपोर्टर को कत्ल की पूरी कहानी आंखो-देखी बयां की।

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(मुकेश और गीता)

दरअसल इस मर्डर मिस्ट्री के तह के पीछे जाने की जिद से न्यूयार्क टाइम्स के रिपोर्टर को एक साथ भारत की कई सच्चाई को जानने का मौका मिला। रिपोर्टर एलेन बेरी हरियाणा के इस मामूली से गांव में कई सामाजिक मसलों पर रिपोर्टिंग करने आई थीं। लेकिन रिपोर्टिंग के बाज जब वह वापस अमेरिका लौटीं तो गांव के किसी एक शख्स ने उसे वापस अमेरिका से भारत बुलाया इस मर्डर मिस्ट्री को सुलझाने। एलेन बेरी जब पीपली खेड़ा गांव आई थी तो वो गांव के सरपंच जेहरुद्दीन मेवाती के यहां बतौर मेहमान ठहरी थीं। वापस गीता मर्डर मिस्ट्री को सुलझाने वो पीपलीखेड़ा गांव आई तो गांव का सरपंच मेवाती भी कत्ल के एक अहम गुनाहगार के रुप में उसके सामने आया।

आईए अब जानते हैं क्या थी गीता मर्डर मिस्ट्री की अनसुलझी पहेली

मुकेश की पत्नी गीता की कत्ल होती है। गीता को उसके पति मुकेश के द्वारा बीच आंगन में बेरहमी से दर्जनों लोगों के सामने कत्ल किया जाता है। लेकिन सुबह जब पुलिस आती है तो पुलिस कत्ल की पूरी थ्योरी को एक्सीडेंट में बदल कर केस को क्लोज कर चुकी होती है। एलेन बेरी जब दोबारा केस खोलने की मांग थानेदार जहांगीर खान से करती है तो थानेदार कहता है कि गीता छत पर सोई थीं, रात में पेशाब लगा, छत से उतरने के दौरान सीढियों पर लडखड़ा कर गिर गईं, उसके सर में गंभीर चोट आई थी और ब्रेन हेमरेज से उसकी मौत हो गई। मगर ऐलेन जहांगीर खान से कहती है कि गीता के सिर में ही नहीं उसके शरीर के कई अंगों में गंभीर चोट के निशान थे। जहांगीर खान दलील देता है कि सीढ़ियों पर गिरने से भी शरीर के कई अंगों में चोट आ सकती है। लेकिन ऐलेन फिर थानेदार से कहती है कि गीता के शरीर पर जो चोट के निशान हैं उसे देखकर साफ लगता है किसी ने उसे बेरहमी से पीटा है। उसके शरीर पर हिंसा के निशान हैं। थानेदार रिपोर्टर को झिड़क देता है औऱ बहस से भाग जाता है।

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(थानेदार जहांगीर खान)

क्यों पुलिस और सरपंच ने गीता के कातिल पति को बचाया

थानेदार से बहस के बाद ऐलन गीता के पति मुकेश से मिलने जाती है। महेश खुलेआम ऐलन के सामने स्वीकारता है कि उसी ने गीता का कत्ल किया है। वो ऐलन को धमकी भी देता है वो उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता है। ऐलन वहां से वापस फिर थानेदार के पास लौटती है। थानेदार अब समझ चुका होता है कि यह अंग्रेजी मेम इस केस के तह तक पहुंच कर ही दम लेगी। वो सच बता देता है कि किस तरह महेश ने पुलिस के बड़े अधिकारियों को घूस देकर केस क्लोज करने के लिए कहा था। मर्डर को किस तरह पुलिस एक्सीडेंट थ्योरी में बदल देता है। और यह सब गांव के सरपंच जेहरुद्दीन मेवाती के इशारों पर हो रहा था। सरपंच के लिए महेश का परिवार उसके लिए अहम वोट बैंक था। उसके पूरे परिवार में 150 से ज्यादा वोटर थे और एक खास जाति के वोट बैंक में महेश का दबदबा था।

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(सरपंच जेहरुद्दीन मेवाती)

बाद में वापस अमेरिका लौटने से पहले ऐलन निराश होकर सरपंच जेहरुद्दीन मेवाती से भी मिलती है। मेवाती भी इसी सच को बयां करता है। मेवाती कहता है कि भारत के छोटे शहरों और गांव की सच्चाई यही है। यहां हत्या का कोई मोल नहीं है, यहां हमारे लिए गीता से ज्यादा जरूरी महेश के परिवार के 150 वोटर थे। गीता मर गई तो इससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ा। लेकिन हम पुलिस को महेश को गिरफ्तार करने के लिए कहते थे हम अगली चुनाव हार जाते।

 

 

 

 


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