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म्यांमार में भारतीयों से बोले पीएम मोदी- हमारी सीमा ही नहीं, भावनाएं भी जुड़ी हैं

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| सितंबर 6 , 2017 , 19:51 IST | यंगून

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को म्यांमार दौरे के दूसरे दिन यंगून में भारतीयों को संबोधित किया। उन्होंने स्थानीय भाषा में लोगों का अभिवादन किया। पीएम मोदी ने कहा कि आप सभी ने गणेश चतुर्थी का त्योहार मनाया। मैं यहां आना चाहता था। आज मौका मिला। आप सभी का शुक्रिया।

उन्होंने कहा कि इस जगह का भारत से पुराना नाता भी है। पीएम मोदी ने कहा हमारी सीमाएं ही नहीं, भावनाएं भी जुड़ी हुई हैं। सरकार में राजदूत होते हैं लेकिन आप लोग (विदेश में बसे भारतीय) राष्ट्रदूत हैं।

और क्या कहा पीएम ने

पीएम मोदी ने कहा अभी अभी आप सबने गणेश चतुर्थी का त्योहार मनाया है। ईद मनाई। आप सभी को इन त्योहारों की बहुत-बहुत शुभकामनाएं। आशा करता हूं कि ये त्योहार आपके लिए बहुत सुख-समृद्धि और शांति लाएं। मैं आज आपके साथ यहां मौजूद रहकर बहुत खुश हूं। मेरी इच्छा थी कि हिस्टोरिकल शहर में आऊं। ऐसे शहर को देखूं जो अपनी विरासत के लिए दुनिया में मशहूर है और जिसका भारत के साथ सदियों पुराना नाता है।

ऐसे लोगों से मिलूं जिन्होंने भारत और म्यांमार दोनों को अपने दिलों में समेटा हुआ है। मैं अपने सामने एक मिनी इंडिया के दर्शन कर रहा हूं। भारत के अलग-अलग क्षेत्रों से आए हुए लोग एक महान राष्ट्र के दिल में एक दूसरे महान राष्ट्र की धड़कन के रूप में जी रहे हैं। आपलोगों से मिलकर मुझे और भी खुशी हो रही है, क्योंकि एक ही जगह मैं परंपराओं और सांस्कृतिक विरासतों को देख रहा हूं, जिन्हें गंगा, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी, बृह्मपुत्र और इरावती जैसी माताओं ने अपने आंचल में पाला है।

म्यांमार भगवान ब्रह्मा की धरती

हजारों सालों से भारत-म्यांमार की सीमाएं ही नहीं, बल्कि भावनाएं भी एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। भारत में म्यांमार को ब्रह्मदेश या भगवान ब्रह्मा की धरती भी कहा जाता है। यही वो पवित्र धरती है, जिसने बुद्ध को सहेजा है। यहां के बौद्ध ग्रंथों और भिक्षुओं ने हिंदुस्तान के कोने-कोने में एक अटूट रिश्ते को पाला है। इस रिश्ते में धर्म, पाली भाषा और शिक्षा भी शामिल रहे हैं। भारत को और विश्व को म्यांमार ने स्वर्गीय गोयनका जी के माध्यम से विपासना का उपहार दिया है। मुझे खुशी है कि उनके सुपुत्र आज हमारे बीच हैं। आज भी रामायण को यामा के नाम से और शिव को परभूजिओ और विष्णु को बिथानों कहते हैं।

म्यांमार के बहाने सुभाष चंद्र बोस को मोदी ने किया याद

उन्होंने कहा कि भारत के स्वंत्रता का इतिहास बिना म्यांमार को नमन किए पूरा नहीं हो सकता है। ये वो धरती है जहां से सुभाष चंद्र बोस ने कहा था कि तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा। उनका ये नारा सुनकर भारत को अपनी जान से भी ज्यादा प्यार करने वाले हजारों लाखों नौजवान आजाद हिंद फौज में शामिल हो गए।

म्यांमार के बिना आजादी का इतिहास अधूरा

भारत के स्वंत्रता का इतिहास बिना म्यांमार को नमन किए पूरा नहीं हो सकता है। ये वो धरती है जहां से सुभाष चंद्र बोस ने कहा था कि तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा। उनका ये नारा सुनकर भारत को अपनी जान से भी ज्यादा प्यार करने वाले हजारों लाखों नौजवान आजाद हिंद फौज में शामिल हो गए।

मुझे भी आज आजाद हिंद फौज के कुछ साथियों के दर्शन का सौभाग्य मिला। जब नेता जी ने यहां आजाद हिंद सरकार का ऐलान किया और भारत ने अंग्रेजी शासन की जड़ें हिल गईं। यहां की मांडले जेल में 6 साल की कैद के दौरान लोकमान्य तिलक ने गीता रहस्य की रचना की। ये वो धरती है, जहां महात्मा गांधी, लाला लाजपत राय और रवींद्र नाथ टैगोर आए। 

विदेशी ताकतों से भारत को स्वतंत्र कराने के लिए देश के वीरों को अपना घर छोड़ना पड़ता था तो म्यांमार ही उनका दूसरा घर बन जाता था। 1857 की पहली आजादी की लड़ाई के बाद बादशाह बहादुर शाह जफर को दो गज धरती भी यहीं मिली थी।"


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