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पृथ्वी को बचाने के लिए NASA करेगा डिफेंस सिस्टम का टेस्ट, जानिए क्या है खतरे की वजह

सतीश वर्मा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अगस्त 5 , 2017 , 16:11 IST | कैलीफोर्निया

धरती के विनाश की खबर को नासा ने खारिज कर दिया है। अब धरती पर कोई खतरा नहीं है। इस सर्दी यानि अक्टूबर महीने की 12 तारीख को धरती की ओर तेज गति से आ रही पुच्छल तारे(Asteroid 2012 TC4) को नासा के प्लानेटरी डिफेंस सिस्टम हैंडल कर रहा है और नासा ने बयान जारी कर कहा है कि, इस पुच्छल तारे से पृथ्वी को कोई खतरा नहीं है। नासा ने धरती को बचाने के लिए विशेष तौर पर प्लानेटरी डिफेंस सिस्टम सेटअप किया है और इसी साल 12 अक्टूबर को नासा इसका परीक्षण भी करेगा। 

नासा का प्लानेटरी डिफेंस सिस्टम सक्षम

नासा ने कहा है कि इस पुच्छल तारे या कहें तो उल्कापिंड से निबटने के लिए नासा का प्लानेटरी डिफेंस सिस्टम पूरी तरह सक्षम है। नासा मे अपने बयान में कहा है कि Asteroid 2012 TC4 पृथ्वी की सतह से 6800 किलोमीटर दूर ही रहेगा और यह पृथ्वी की सतह के नजदीक नहीं आएगा। इस उल्कापिंड का आकार भी छोटा ही है। इसका आकार 30 से 100 फीट का है।

नासा का दावा- धरती से 68000 किमी दूर है उल्का पिंड

नासा हेडक्वार्टर के साइंटिस्ट माइकल केली के मुताबिक Asteroid 2012 TC4 का पृथ्वी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। नासा के साइंटिस्ट पिछले सात दिनों से इस पुच्छल तारे को ट्रैक कर रहे हैं। साल 2012 से ही इस पुच्छल तारे को नासा के साइंटिस्ट इसका अध्ययन कर रहे हैं। पिछले पांच सालों के अंदर यह धरती की सतह से काफी दूर निकल गया है।

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माइकल केली ने बताया कि इस पुच्छल तारे के ट्रैकिंग के लिए एक स्पेशल नेटवर्क गठित किया गया है और यह हमारे प्लानेटरी डिफेंस सिस्टम के लिए अहम परीक्षण साबित होगा। दुनिया भर में इस पुच्छल तारे के अध्ययन के लिए कई सारे स्पेस लैब बनाए गए हैं जहां दिन रात साइंटिस्ट काम कर रहे हैं।

नासा पूरे साल ऐसे 1500 से ज्यादा छोटे तारे और उल्कापिंड पर अपने स्पेस लैब में स्टडी करती है। महीने में एक बार कोई न कोई छोटा तारा या उव्कापिंड चांद या धरती के सामने से गुजरता ही है।

नासा उल्कापिंड की गति को कर रहा कम

बता दें कि नासा ऐसे कई टेक्नीक पर रिसर्च कर रही है जिसके तहत पुच्छल तारे या उल्कापिंड को ग्रह से दूर रखा जाए। या इनकी गति कम की जाए। हालांकि उल्कापिंड या पुच्छल तारे को खत्म कर गिरा देना संभव नहीं हैं, हां इतना जरूर है कि इसकी स्पीड को कम की जा सकती है और इसे ग्रहों से दूर रखा जा सकता है, ताकि ग्रहों पर भूकंप और तूफान के खतरे को कम किया जा सके।

बहरहाल नासा ने ये स्पष्ट कर दिया है कि 100 साल तक पृथ्वी पर कोई खतरा नहीं है और 100 साल के अंदर धरती से कोई पुच्छल तारे या उल्कापिंड नहीं टकरा सकते हैं।

इस तरह धरती को बचाने के लिए नासा कर रही काम (वीडियो)


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