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नासा ने जारी किया 'बौने ग्रह' प्लूटो का नया नक्शा, देखिए तस्वीरें

श्वेता बाजपेई, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जुलाई 15 , 2017 , 18:59 IST | वाशिंगटन

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने प्लूटो तथा उसके सबसे बड़े उपग्रह चारोन का नया नक्शा जारी किया है, जो उनकी जटिल रचना का खुलासा करता है।

नासा के न्यू होराइजन अंतरिक्ष यान ने 14 जुलाई, 2015 को प्लूटो के लिए ऐतिहासिक उड़ान भरी थी, जिसके बाद से ही वह प्लूटो तथा उसके उपग्रहों की तस्वीरें उपलब्ध कराने के साथ ही अन्य आंकड़े इकट्ठी कर रहा है, जिसने सौर मंडल की बाहरी सीमा पर इस रहस्यमय दुनिया के प्रति हमारी समझ को बदलकर रख दिया है।

 

वैज्ञानिक उन आंकड़ों का अभी भी विश्लेषण कर रहे हैं, जिसे न्यू होराइजंस ने भेजा है। 
उड़ान के दो साल पूरे होने के मौके पर वैज्ञानिकों का दल प्लूटो तथा चारोन के एक उच्च गुणवत्ता वाली विस्तृत तस्वीर के सेट का अनावरण कर रहा है। अंतरिक्षयान फिलहाल पृथ्वी से 5.7 अरब किलोमीटर की दूरी पर है और अपने अगले लक्ष्य तक पहुंचने के लिए रहस्यमय क्विपर बेल्ट की गहराई में पहुंच गया है।

नासा ने कहा कि साल 2019 के नववर्ष के दिन न्यू होराइजन क्विपर बेल्ट ऑब्जेक्ट को बेहद तेजी से पार करेगा, जिसका नाम 2014 एमयू 69 है।

 

क्या है प्लूटो का इतिहास?

प्लूटो का व्यास लगभग २,३०० किमी है, यानि पृथ्वी का १८%। उसका रंग काला, नारंगी और सफ़ेद का मिश्रण है। कहा जाता है के जितना अंतर प्लूटो के रंगों के बीच में है इतना सौर मण्डल की बहुत कम वस्तुओं में देखा जाता है, यानि उनपर रंग अधिकतर एक-जैसे ही होते हैं। सन् १९९४ से लेकर २००३ तक किये गए अध्ययन में देखा गया के प्लूटो के रंगों में बदलाव आया है। उत्तरी ध्रुव का रंग थोड़ा उजला हो गया था और दक्षिणी ध्रुव थोड़ा गाढ़ा। माना जाता है के यह प्लूटो पर बदलते मौसमों का संकेत है।

१९३० में अमेरिकी खगोलशास्त्री क्लाइड टॉमबौ ने प्लूटो को खोज निकाला और इसे सौर मण्डल का नौवा ग्रह मान लिया गया। धीरे-धीरे प्लूटो के बारे में कुछ ऐसी चीजें पता चलीं जो अन्य ग्रहों से अलग थीं

इसकी कक्षा अजीब थी। बाक़ी ग्रह एक के बाहर एक अंडाकार कक्षाओं में सूरज की परिक्रमा करते हैं लेकिन प्लूटो की कक्षा वरुण की कक्षा की तुलना में कभी सूरज के ज़्यादा समीप होती है और कभी कम।

इसकी कक्षा बाक़ी ग्रहों की कक्षा की तुलना में ढलान पर थी। बाक़ी ग्रहों की कक्षाएँ किसी एक ही चपटे चक्र में हैं, जिस तरह जलेबी के लच्छे एक ही चपटे अकार में होते हैं। प्लूटो की कक्षा इस चपटे चक्र से कोण पर थी। ध्यान रहे के इस कोण की वजह से प्लूटो और वरुण की कभी टक्कर नहीं हो सकती क्योंकि उनकी कक्षाएँ एक दुसरे को कभी काटती नहीं हालांकि चित्रों में कभी ऐसा लगता ज़रूर है।

इसका आकार बहुत ही छोटा था। इस से पहले सब से छोटा ग्रह बुध (मरक्युरी) था। प्लूटो बुध से आधे से भी छोटा था।