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खतरनाक साबित हुआ नक्सलियों का देसी जुगाड़, तीर बम ने मचाई सबसे ज्यादा तबाही

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अप्रैल 25 , 2017 , 18:59 IST | नई दिल्ली

सोमवार को सुकमा में हुए नक्सली हमले में नक्सलियों के जिस हथियार ने सबसे ज्यादा तबाही मचाई वो देसी हैंडमेड 'तीर बम' था। नक्सलियों ने परंपरागत तीर-धनुष को विस्फोटक से लैस कर सुरक्षाबलों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। 11 मार्च को भी छत्तीसगढ़ के सुकमा में नक्सलियों ने इन्हीं तीर बमों का प्रयोग किया था। इस हमले में सीआरपीएफ के 12 जवान शहीद हो गए थे।

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सीआरपीएफ के मुताबिक, हमले में नक्सलियों ने गोलियों के अलावा रॉकेट लॉन्चर, बम और एक स्पेशल तीर बम का इस्तेमाल किया। ऐसा कहा जा रहा है इसी से सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। ये तीर बम खास तरह के हैं। इनका आगे के हिस्सा उभरा हुआ है। इसी में बारूद भरा होता है। इससे 100 से 150 मीटर तक निशाना लगाया जा सकता है। सीआरपीएफ के अफसरों के मुताबिक, नक्सलियों ने करीब 100 से ज्यादा तीर बम का इस्तेमाल किया, लेकिन इसमें 1 दर्जन तो फटे ही नहीं।

 

चार मार्च 2015 को सर्चिंग के दौरान चेन्नी इलाके में पहली बार इस तरह के 19 बम मिले थे, लेकिन इनका सबसे ज्यादा इस्तेमाल इस हमले में किया गया। हालांकि इससे पहले भी नक्सलियों ने तीर बम का इस्तेमाल किया है, लेकिन तब नुक्सान इतना ज्यादा नहीं हुआ था।

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ऐसे होता है इस्तेमाल

तीर बम का इस्तेमाल धनुष के जरिये किया गया, जो 50 मीटर की दूरी से जवानों पर दागे गए। एल्यूमिनियम को गलाकर तैयार किये गये तीर बम में एक किनारे पर तीर फंसाने की जगह बनाई गई है। दूसरे किनारे पर एक पिन लगाई गई है। जानकारों के मुताबिक जब बम को फायर करना होता है कि नक्सली उसे तीर से फंसाकर पिन को निकाल देते हैं। इसके बाद बम को धनुष के सहारे टारगेट पर फेंक दिया जाता है। जहां यह गिरता है, जोरदार धमाका हो जाता है।


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