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नेहरू-एडविना को लेकर माउंटबेटन की बेटी का ख़ुलासा, प्यार था लेकिन जिस्मानी रिश्ता नहीं

सतीश वर्मा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अगस्त 1 , 2017 , 14:03 IST | नई दिल्ली

जवाहरलाल नेहरु और एडविना माउंटबेटन के रिश्तों को लेकर एडविना की बेटी पामेला हिक्स माउंटबेटन ने एक सनसनीखेज खुलासा किया है। पामेला की प्रकाशित नई किताब में इस रिश्ते को लेकर कई पहलुओं के बारे में विस्तार से लिखा गया है। पामेला ने लिखा है कि नेहरू और एडविना के बीच में कोई शारीरिक संबंध नहीं था। उन्होंने अपनी किताब में लिखा है कि नेहरू और एडविना कभी अकेले में एक साथ रहे ही नहीं जो शारीरिक संबंध कायम कर सकें।

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पामेला हिक्स माउंटबेटन अपने पिता और भारत के अंतिम वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन के सात जब भारत आई थीं तो उनकी उम्र 17 साल की थी। अब खुद एडविना की बेटी पामेला ने बड़ी मुखरता से नेहरू और एडविना के संबंध पर बात की है। उन्होंने कहा कि दोनों भले ही एक-दूसरे से प्रेम करते थे, लेकिन उनका संबंध कभी जिस्मानी नहीं रहा क्योंकि वे कभी अकेले नहीं मिले। दोनों ही एक-दूसरे का बेहद सम्मान करते थे। उन्होंने अपनी मां एडविना एश्ले और नेहरू के बीच 'गहरा संबंध ' विकसित होते हुए देखा।

नेहरू द्वारा एडविना को लिखे पत्र से खुला राज

पामेला ने लिखा है कि,

उन्हें पंडितजी में वह साथी, आत्मिक समानता और बुद्धिमतता मिली, जिसे वह हमेशा से चाहती थीं

पामेला इस संबंध के बारे में और जानने को इच्छुक थीं। लेकिन अपनी मां को लिखे नेहरू के पत्र पढ़ने के बाद पामेला को अहसास हुआ कि 'वह और मेरी मां किस कदर एक-दूसरे से प्रेम करते थे और सम्मान करते थे। 

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पामेला अपने पुस्तक में लिखती हैं कि,

वह यह जानने को उत्सुक थीं कि उनकी मां और नेहरू के बीच जिस्मानी संबंध थे या नहीं, लेकिन जब उन्होंने मां की नेहरू के नाम चिट्ठी पढ़ी तो उन्हें यह विश्वास हो गया कि ऐसा कुछ कभी नहीं हुआ था

पामेला ने कहा- पंडित नेहरू के पास यौन संबंध के लिए समय ही नहीं था

'डॉटर ऑफ एम्पायर : माय लाइफ एज ए माउंटबेटन ' पुस्तक में पामेला ने लिखा, ' तथ्य से बिल्कुल अलग बात यह थी मेरी मां या पंडितजी के पास यौन संबंधों के लिए समय नहीं था, दोनों बिरले ही अकेले होते थे। उनके आसपास हमेशा कर्मचारी, पुलिस और अन्य लोग मौजूद होते थे। ' यह किताब 2012 में ब्रिटेन में प्रकाशित हुई थी जो प्रकाशन कंपनी हशेत ने पेपरबैक की शक्ल में भारत में जारी किया है।

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नेहरू और एडविना का जीवन सार्वजनिक था

लॉर्ड माउंटबैटन के एडीसी फ्रेडी बर्नबाई एत्किन्स ने बाद में पामेला को बताया था कि नेहरू और उनकी मां का जीवन इतना सार्वजनिक था कि दोनों के लिए यौन संबंध रखना संभव ही नहीं था। पामेला यह भी लिखती हैं कि भारत से जाते हुए एडविना अपनी पन्ने की अंगूठी नेहरू को भेंट करना चाहती थीं। किताब के अनुसार, 'लेकिन उन्हें पता था कि वह स्वीकार नहीं करेंगे।

इसलिए उन्होंने अंगूठी उनकी बेटी इंदिरा को दी और कहा, यदि वह कभी भी वित्तीय संकट में पड़ते हैं, तो उनके लिए इसे बेच दें। क्योंकि वह अपना सारा धन बांटने के लिए प्रसिद्ध हैं।' माउंटबैटन परिवार के विदाई समारोह में नेहरू ने सीधे एडविना को संबोधित करके कहा था, आप जहां भी गई हैं, आपने उम्मीद जगाई है।

 


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