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रक्षा मंत्री बनने पर बोलीं सीतारमण- ये ईश्वर की कृपा, जानिए कैसे 'पावरफुल लेडी' बनीं निर्मला

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| सितंबर 3 , 2017 , 19:41 IST | नई दिल्ली

मोदी सरकार में निर्मला सीतारमण रक्षा मंत्रालय की अहम जिम्मेदारी संभालेंगी। रविवार को उन्होंने राष्ट्रपति भवन में कैबिनेट मंत्री के तौर पर शपथ ली। आजादी के बाद वे देश की पहली फुल टाइम रक्षा मंत्री बनी हैं। इससे पहले 1975 में प्रधानमंत्री रहते हुए इंदिरा गांधी ने सालभर तक डिफेंस मिनिस्ट्री संभाली थी। सीतारमण ने अहम जिम्मेदारी मिलने को दैवीय कृपा बताया है। दूसरी ओर, अरुण जेटली ने नए रक्षा मंत्री को शुभकामनाएं देते हुए सीतारमण के प्रमोशन को बेहतर काम का फल करार दिया। सीतारमण 6 सितंबर को जेटली से डिफेंस मिनिस्ट्री का चार्ज लेंगी।

शपथ लेने के बाद सीतारमण (58) ने रक्षा मंत्री बनाए जाने को बड़ी जिम्मेदारी बताया। उन्होंने कहा कि,

मेरे लिए ये बड़ा दिन है। मुझे उम्मीदों पर खरा उतरना है। अब टारगेट पूरे कर खुद को साबित करना होगा

खास बात ये है कि अब दो महिलाएं मैं और सुषमाजी कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्युरिटी (CCS) में रहेंगी।

इतना ही नहीं निर्मला सीतारमण ने आगे कहा कि,

कोई छोटे कस्बे से उठकर पार्टी में शामिल होता है। बाद में पार्टी लीडरशिप के सपोर्ट से इस अहम जिम्मेदारी तक पहुंचता है। मुझे लगता है कि ये किसी ब्रह्मांडीय या दैवीय शक्ति के असर के बगैर संभव नहीं हो सकता है

महज राजनीतिक कारण या पावर लेडी हैं सीतारमण

बीते तीन साल के दौरान बतौर कॉमर्स मिनिस्टर निर्मला सीतारमण की ऐसी क्या उपलब्धियां रहीं कि परफॉर्मेंस को आधार बनाकर उन्हें यह जिम्मेदारी दी गई? या फिर दी गई इस जिम्मेदारी का महज राजनीतिक कारण है कि निर्मला एक 'पावर लेडी' बनकर उभरी हैं। बीजेपी के लिए दक्षिण भारत से अबतक वेंकैया नायडू सबसे बड़ा चेहरा था। उन्हें उपराष्ट्रपति बना दिए जाने के बाद पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती दक्षिण में एक नया चेहरा देने की थी।

Nirmala 1

निर्मला तमिलनाडु से हैं। दक्षिण के राज्यों में सभी राजनीतिक दलों से उनके अच्छे संबंध रहे हैं और उनका पूरा राजनीतिक सफर विवादों से दूर रहा है। ऐसे में वेंकैया की जगह लेने के लिए बीजेपी के पास निर्मला से बेहतर कोई और नेता नहीं था।

अंग्रेजी के साथ तमिल भाषा भी पर पकड़ है निर्मला की

तमिलनाडु से होने के साथ-साथ निर्मला की पढ़ाई-लिखाई दिल्ली में हुई है। इसी वजह से अंग्रेजी के साथ-साथ हिंदी पर भी उनकी पकड़ रही है। साथ ही वह तमिल के अलावा अन्य दक्षिण क्षेत्र की भाषाओं में भी संवाद कर सकती हैं। वह पूर्व में पार्टी की प्रवक्ता पद की जिम्मेदारी भी बखूबी निभा चुकी हैं। लिहाजा, निर्मला के रूप में बीजेपी को राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़े चेहरे की कमी को पूरा करने का मौका मिल गया है।

 


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