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GST ने तोड़ी कमर, पीएम के संसदीय क्षेत्र में ठप हो गया बनारसी साड़ी का कारोबार!

सतीश वर्मा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अक्टूबर 3 , 2017 , 15:09 IST | वाराणसी

जीएसटी ने वाराणसी के साड़ी उद्योग की कमर तोड़ दी है। 2000 करोड़ रुपये सालाना टर्नओवर वाले बनारसी साड़ी कुटीर उद्योग पर गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) लगने से घंघा चौपट हो गया है। पिछले तीन महीनों से कारोबार आधे से भी कम हो गया है। हालांकि, हैंडलूम, हैंडलूम फैब्रिक, सिल्क यार्न को तो जीएसटी में शामिल नहीं किया गया है लेकिन बनारसी साड़ी बनाने के लिए जो उपकरण लगते हैं, उन पर जीएसटी लगाया गया है। जकाट की पत्तियां (जिस पर बनारसी साड़ी की डिजाइन की कटिंग की जाती है), लोहे की फन्नी, लकड़ी का ताना-बाना जीएसटी के दायरे में है। इससे साड़ी की निर्माण लागत पर भारी असर पड़ा है।

Jamil ahmad

जीएसटी के विरोध में बुनकरों ने बाजार को 3 दिन रखा था बंद

बता दें कि कपड़े पर जीएसटी के विरोध में बनारसी साड़ी के कारोबारियों ने पिछले महीने तीन दिवसीय बंदी किया था। इस बंदी का जबर्दस्त असर रहा था। बंद का आह्वान बनारस वस्त्र उद्योग एसोसिएशन और बनारस साड़ी डीलर एसोसिएशन ने किया था। बंदी से 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार प्रभावित हुआ। साड़ी के साथ रेशम, जरी, कलाबत्तू के व्यापारियों ने भी दुकानें बंद रखीं। बंद को सफल बनाने के लिये व्यापारियों के समूह ने विभिन्न इलाकों में दुकानें बंद कराईं।

जीएसटी ने कैसे तोड़ी कमर, सुनिए व्यापारियों की जुबानी

Rajan behal

बनारसी वस्त्र उद्योग एसोसिएशन महामंत्री राजन बहल बताते हैं कि,

फाइव स्टार होटल में ठहर कर बनारसी साड़ी खरीदने वाले विदेशी निर्यातकों पर पहले 18 फीसदी टैक्स था लेकिन अब जीएसटी में इसे बढ़ाकर 28 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे बनारसी साड़ी के विदेशी निर्यातकों के काशी आने की संख्या घट गई है। टेलीफोन पर भी जीएसटी लगा दिया गया है। साड़ी का कारोबार फोन के जरिए ही ज्यादा होता है

Ramji

रेशम तागा संघ के संरक्षक मोहन लाल सरावगी बताते हैं कि,

बनारसी साड़ी की डिजाइन की नकल अब तक कहीं नहीं की जा सकी है। इसे टैक्स के दायरे में लाना, बनारस की पहचान से खिलवाड़ करना है

बनारसी वस्त्र उद्योग एसोसिएशन के महामंत्री राजन बहल ने कहा कि,

इस कुटीर उद्योग से करीब ढाई लाख परिवारों का सीधे भरण-पोषण जुड़ा है। इस पर किसी तरह का और किसी भी रूप में टैक्स लगाना अनुचित है

Noor ali

बनारसी वस्त्र उद्योग एसोसिएशन के संरक्षक नूर-उल-आइन ने बताया कि,

साड़ी व्यापारियों में सरकार के इस फैसले से नाराजगी है। कुटीर उद्योग होने से घरों में लोग इस उद्योग से जुड़कर अपना जीवन यापन कर रहे हैं। इस पर जीएसटी लागू करना व्यावहारिक नहीं है

बनारसी वस्त्र उद्योग एसोसिएशन के अध्यक्ष जगदीश शाह ने बताया कि,

कपड़ा उद्योग को सरकार के प्रोत्साहन की जरूरत है और इस पर करों का बोझ डाला जा रहा है। सरकार को अपना फैसला वापस लेना चाहिये

थोक वस्त्र व्यवसायी समिति के उपाध्यक्ष केशव जालान ने कहा कि,

कपड़ा उद्योग से जुड़े ज्यादातर बुनकर और छोटे व्यापारी पढ़े-लिखे नहीं है और वे जीएसटी की जटिल प्रक्रिया में उलझ कर रह जायेंगे

 


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