राजनीति

नोटा पर तकरार: राज्यसभा चुनाव में NOTA के खिलाफ कांग्रेस पहुंची सुप्रीम कोर्ट

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
161
| अगस्त 2 , 2017 , 14:23 IST | नई दिल्ली

गुजरात में हो रहे राज्यसभा की तीन सीटों के चुनाव से पहले चुनाव आयोग के नोटा ऑप्शन के खिलाफ गुजरात कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इस याचिका में चुनाव आयोग के 2014 के अधिसूचना को चुनौती दी गई है जिसमें राज्यसभा चुनाव में नोटा के विकल्प की अनुमति दी गई थी। कांग्रेस ने राज्यसभी में भी इस मुद्दे को उठाया और इसकी टाइमिंग पर सवाल खड़े किए। कांग्रेस नेता और वकील कपिल सिब्बल ने इस पूरे मामले पर पार्टी का पक्ष रखते हुए कहा है कि चुनाव आयोग ने नोटा पर अंसवैधानिक कदम उठाया है, इस मसले पर पार्टी कोर्ट में बात करेगी। 

अप्रत्यक्ष चुनाव में नोटा का इस्तेमाल नहीं हो सकता

सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट के 2013 के उस आदेश को आधार बनाया है जिसमें कहा गया था कि राज्यसभा जैसे अप्रत्यक्ष चुनावों में नोटा का इस्तेमाल नहीं होगा। कांग्रेस पार्टी की इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को सुनवाई हो सकती है। कांग्रेस ने मंगलवार को कहा कि चुनाव आयोग बिना संवैधानिक संशोधन के राज्यसभा चुनाव में नोटा के विकल्प का इस्तेमाल नहीं कर सकता। कांग्रेस ने कहा कि यह संविधान के अनुच्छेद 84 का उल्लंघन है।

मतपत्र पर नोटा का इस्तेमाल संविधान के अनुच्छेद 84 का उल्लंघन

मीडियाकर्मियों से बातचीत में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने कहा कि,

नोटा का मतपत्र पर इस्तेमाल संविधान के अनुच्छेद 84 और जनप्रतिनिधित्व कानून का उल्लंघन है। यह चुनाव आनुपातिक प्रक्रिया के तहत होगी

उन्होंने आगे कहा, 'प्रतिनिधि पार्टी के नामांकन पर चुने जाते हैं और चुनाव की पवित्रता को बनाए रखने के लिए पार्टी के भीतर अनुशासन जरूरी है। इसिलए विधायकों को कोई और विकल्प देने की कोई गुंजाइश नहीं है। इसलिए संविधान और कानून के तहत यहां नोटा की आवश्यकता नहीं है। यह सिर्फ लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव के लिए है।

उनकी बात से सहमति जताते हुए कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा, 'हमने चुनाव आयोग से राज्यसभा में नोटा का इस्तेमाल न करने की अपील की है। अगर चुनाव आयोग को समय की जरूरत है, तो उन्हें मुद्दे को स्पष्ट करना होगा।'

राज्यसभा में नोटा पर हंगामा

इससे पहले आनंद शर्मा ने यह मुद्दा राज्यसभा में उठाया। मुद्दे पर विपक्षी दलों ने काफी हंगामा किया। विपक्षी दलों के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद, बीएसपी के सतीश मिश्रा, एसपी के रामगोपाल यादव और टीएमसी के डेरेक'ओ ब्रायन ने इसपर सत्तापक्ष से जवाब की मांग की।

इस पर नेता सदन अरुण जेटली ने कहा कि नोटा की अधिसूचना चुनाव आयोग ने जारी की थी। संवैधानिक स्वायत्त निकाय के रूप में आयोग द्वारा किए गए किसी फैसले पर चर्चा करने के लिए राज्यसभा उपयुक्त मंच नहीं है। सभापति ने जेटली के पक्ष से सहमति जताते हुए कहा कि प्रश्नकाल के दौरान इस विषय को उठाने की वह अनुमति नहीं दे सकते। विपक्ष का हंगामा नहीं थमने पर सभापति हामिद अंसारी ने दोपहर 12.10 पर सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी।

सदन की कार्यवाही फिर से शुरू होने पर बीएसपी के सतीश मिश्रा ने नोटा विकल्प जोड़ने से राज्यसभा का चुनाव ही अवैध हो जाने की आशंका जताते हुए सभापति से यह मुद्दा सदन में उठाने की अनुमति देने का अनुरोध किया।


कमेंट करें