ख़ास रिपोर्ट

भारत में महामारी बन सकता है मोटापा, इससे मुक्ति जरुरी

कुलदीप सिंह, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अक्टूबर 10 , 2017 , 19:34 IST | नई दिल्ली

मोटापा परेशानियों का कारण बनता है, फिर भी जो लोग सचेत नहीं हैं, वे इसे बीमारी मानने को तैयार नहीं होते। इतना ही नहीं, मोटापे से ग्रस्त लोग कोई टीका-टिप्पणी भी सहन नहीं करते। मोटापे को कोई भले ही न माने, लेकिन चिकित्सक तो कहते हैं कि यह कई रोगों को बुलावा देता है। विश्व मोटापा दिवस पर एक सार्थक पहल करते हुए दक्षिणी दिल्ली स्थित हैबिलाइट बरिएट्रिक्स ने मोटापा संबंधी जानकारी देने के लिए एक कार्यक्रम की शुरुआत की है। इस कार्यक्रम के जरिए सेंटर के चिकित्सक यह जानकारी दे रहे हैं कि कैसे मोटापे के कारण गैर-संचारी रोग (नॉन कम्युनिकेबल डिजीज) की गिरफ्त में आ जाते हैं और ऐसी स्थिति में वह खुद को कैसे बचा सकते हैं। 

हैबिलाइट बरिएट्रिक्स के संस्थापक, डॉ. कपिल अग्रवाल, वरिष्ठ सलाहकार, बरिएट्रिक एवं लैप्रोस्कोपिक सर्जन बताते हैं कि भारत में मोटापे के रोगियों के साथ बड़ी समस्या यह है कि वह अपनी बीमारी को एक रोग नहीं मानते हैं और इसके गंभीर परिणामों की अनदेखी करते हैं।

हैबिलाइट सपोर्ट ग्रुप के साथ हम लोगों को यह जानकारी प्रदान कर रहे हैं कि मोटापा एक गंभीर रोग है और कैसे यह मोटापा अन्य गंभीर गैर-संचारी रोगों का कारण बन सकता है। इसलिए इसके उपचार के लिए पेशेवर स्वास्थ्य सलाहकार की आवश्यकता होती है।

डॉ. अग्रवाल ने बताया कि भारत दुनिया में तीसरा सबसे अधिक मोटी आबादी वाला देश है। भागदौड़ भरी जीवन शैली के साथ तेजी से बढ़ता शहरीकरण मोटापे के बढ़ते स्तरों के लिए मुख्य कारक है। वहीं कुछ लोग इसके नतीजों के बारे में अनजान हैं कि मोटापा गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) के लिए जिम्मेदार है।

हमारे देश में 10 प्रतिशत आबादी सामान्य मोटापे और 5 प्रतिशत आबादी अत्यधिक मोटापे की शिकार है।

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कुपोषण पर भारी है मोटापा 

एक महत्वपूर्ण अध्ययन में कहा गया है कि देश की 1.2 अरब की आबादी में से करीब 13 फीसदी लोग मोटापे से पीड़ित हो सकते हैं। यह विडंबना ही है क्योंकि हाल तक देश में कुपोषण एक बड़ी समस्या रहा है। अब ऐसा लगता है कि मोटापा कुपोषण पर हावी होता जा रहा है। 

बीमारियों का कारण मोटापा

मोटापा या सामान्य से अधिक वजन होने की समस्या दरकिनार भले ही कर दी जाए लेकिन यह जीवनशैली के कारण होने वाली बीमारियों जैसे शुगर, हाई ब्लड प्रेशर, स्ट्रोक और दिल की बीमारी का खतरा बढ़ाने वाला एक कारक हो सकती है। चेन्नई स्थित मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन के डॉ. राजेंद्र प्रदीप ने कहा, 'कमर के आकार में वृद्धि उम्र में कमी का संकेत है।' डॉ. प्रदीप अध्ययन के प्रमुख लेखक हैं।

वजन बढ़ने के क्या हैं कारण

अध्ययन में भारत में वजन बढ़ने का मुख्य कारण बढ़ते शहरीकरण, मशीनीकृत परिवहन का उपयोग, फास्ट फूड का सेवन, लंबे समय तक टीवी देखना और ऐसी चीजों का अधिक सेवन है जिनमें पोषक गुण कम होते हैं। आईसीएमआर की महानिदेशक डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने बताया कि वर्तमान में भारत में स्वास्थ्य पर असर डालने वाले मुख्य कारक उच्च रक्त चाप और अत्याधिक ब्लड शुगर आदि हैं। संस्थान के अध्ययन द इंडिया डायबिटीज स्टडी (आईएनडीआईएबी) में कहा गया है कि 15.3 करोड़ लोग मोटापे की समस्या से पीड़ित हो सकते हैं और यह संख्या अमेरिका की आबादी की लगभग आधी है।

हर पांचवे भारतीय का वजन अधिक है

इस अध्ययन में कमर के 90 सेमी से अधिक नाप वाले पुरुषों और 80 सेमी से अधिक नाप वाली महिलओं को सामान्य से अधिक वजन वाले बताया गया है। अध्ययन में कहा गया है कि कम से कम 8.8 करोड़ भारतीय मोटापे के शिकार हो सकते हैं और जल्द ही उनका वजन सामान्य से अधिक हो सकता है। इसका मतलब है कि हर पांचवे भारतीय का वजन अधिक है।


पृथ्वी पर हर छठा व्यक्ति मोटापे से ग्रस्त

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, पृथ्वी पर हर छठा व्यक्ति मोटापे से ग्रस्त है और हर साल मोटापे की वजह से करीब 28 लाख लोगों की जान जाती है। आज मोटापा खुद एक बीमारी बनता जा रहा है।

गुड़गांव स्थित पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. के श्रीनाथ रेड्डी ने कहा- अस्वास्थ्यकर भोजन, धूम्रपान की आदत के साथ चयापचय संबंधी जोखिम जैसे हाई बीपी, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल के कारण भारत में हर साल 52 लाख लोगों की असमय मौत हो जाती है। इन खतरों से बचने के लिए जब तक भारत में प्रभावी ऐहतियात की रणनीतियां नहीं अपनाई जाएंगी तब तक यह खतरे बढ़ते रहेंगे।

प्रमुख भारतीय मधुमेह विशेषज्ञ और गुड़गांव स्थित मेदान्ता अस्पताल में एंडोक्राइनोलॉजी एवं डायबिटीज विभाग के प्रमुख डॉ अंबरीश मित्तल ने कहा, 'भारत में सबसे बड़ी समस्या बच्चों में मोटापे की है। संपन्नता और शहरीकरण से जुड़े मोटापे की समस्या के कारण मधुमेह, उच्च रक्तचाप और दिल की बीमारी जैसी गैर संचारी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। युवाओं में बढ़ती मधुमेह की समस्या की जड़ भी मोटापे की बढ़ती समस्या से जुड़ी है। चुनौती बहुत बड़ी है और इससे निपटने के लिए हमें खानपान, अभ्यास और खासतौर पर बच्चों के लिए स्कूलों और कार्य स्थलों में स्वास्थ्यकर आहार विकल्प के बारे में जागरूकता की जरूरत है।'

(आईएएनएस इनपुट) 


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