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'उत्कल मणि' गोपबंधु दास के साहित्यिक योगदान पर ओडिशा में विशेष कार्यक्रम

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जून 25 , 2017 , 19:40 IST | कटक

ओडिशा के कटक में पत्रकार, साहित्यकार और स्वतंत्रता सेनानी पंडित गोपबंधु दास के 'समाज' अखबार के सौ साल पूरे होने के मौके पर श्रद्धा उत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कटक शहीद भवन में आयोजित समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने पंडित गोप बंधु दास को याद किया।

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इस मौके पर पंडित गोप बंधु दास की स्मृति में एक स्मारिका का भी विमोचन हुआ। कार्यक्रम में गेस्ट ऑफ ऑनर 'न्यूज वर्ल्ड इंडिया' के मैनेजिंग एडिटर अनिल राय थे। गोपबंधु दास को याद करते हुए अनिल राय ने कहा कि शिक्षा के प्रति पंडित गोपबंधु दास की सोच आज भी प्रासंगिक है। 

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अनिल राय ने कहा कि पंडित गोपबंधु दास 'समाज' समाचार पत्र के संस्थापक थे। आजादी की लड़ाई में ये अखबार क्रांति की अलख जगाने वाला सशक्त जरिया साबित हुआ था।

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इस मौके पर मौजूद तमाम हस्तियों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। समाज प्रबंधन बोर्ड के चेयरमैन दीपक मालवीय ने पंडित गोपबंधु दास को उत्कल मणि के साथ-साथ राष्ट्रीय नेता बताया। पंडित गोपबंधु दास उत्कल मणि के नाम से भी जाने जाते थे। साहित्यकार के साथ-साथ वो समाजसेवी भी थे। ओडिशा में राष्ट्रीयता और स्वतंत्रता संग्राम छेड़ने वालों में उनका नाम पहले लिया जाता है।

जानिए गोपबंधु दास का साहित्यिक इतिहास

गोपबंधु दास सामाजिक कार्यकर्ता, स्वतंत्रतता संग्राम सेनानी एवं साहित्यकार थे। उन्हें उत्कल मणि के नाम से जाना जाता है। ओडिशा (उड़ीसा) में राष्ट्रीयता एवं स्वाधीनता संग्राम की बात चलाने पर लोग गोपबंधु दास का नाम सर्वप्रथम लेते हैं। ओडिशा के पुण्यक्षेत्र पुरी में जगन्नाथ मंदिर के सिंहद्वार के उत्तरी पार्श्व में चौक के सामने उनकी एक संगमर्मर की मूर्ति स्थापित है। उत्कल के विभिन्न अंचलों को संघटित कर पूर्णांग ओडिशा बनाने के लिये उन्होंने प्राणपण से चेष्टा की। विशिष्ट दैनिक पत्र "समाज" के ये संस्थापक थे।

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गोपबंधु दास का जन्म सन् 1877 ई. में पुरी जिले के सत्यवादी थाना के अंतर्गत "सुआंडो" नामक एक क्षुद्र पल्ली (गांव) में हुआ था।

गोपबंधु दास की साहित्यिक कृतियां

उड़िया सहित्य में वे एक नए युग के स्रष्टा हुए, उसी युग का नाम सत्यवादी युग है। सरलता और राष्ट्रीयता इस युग की विशेषताएं हैं। "अवकाश चिंता", "बंदीर आत्मकथा" और "धर्मपद" प्रभृति पुस्तकों में से प्रत्येक ग्रंथ एक एक उज्वल मणि है। "बंदीर आत्मकथा" जिस भाषा और शैली में लिखी गई है, उड़ियाभाषी उसे पढ़ते ही राष्ट्रीयता के भाव से अनुप्राणित हो उठते हैं। "धर्मपद" पुस्तक में "कोणार्क" मंदिर के निर्माण पर लिखे गए वर्णन को पढ़कर उड़िया लोग विशेष गौरव का अनुभव करते हैं। 

देखिए समारोह का पूरा वीडियो


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