ख़ास रिपोर्ट

65 पूर्व IAS अधिकारियों ने लिखा खुला पत्र, बोले- बिगड़ रहा है देश का माहौल

सतीश वर्मा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 1
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| जून 13 , 2017 , 19:36 IST | नई दिल्ली

देश के जाने-माने 65 रिटायर्ड नौकरशाहों ने देश की सभी संवैधानिक संस्थानों और पब्लिक अथॉरिटी को खुला पत्र लिखकर देश में बढ़ रही धार्मिक असहिष्णुता, गाय के नाम पर हिंसा, सत्ता के नाम पर तानाशाही, बढ़ रही सांप्रदायिकता और देश की बहुलतावादी संस्कृति पर लगातार हो रहे हमले के खिलाफ चिंता जताई है।

खुले पत्र के माध्यम से पूर्व नौकरशाहों ने देश के सभी संवैधानिक संस्थाओं के प्रमुख इस पर अविलंब नियंत्रण कायम करने की अपील की है।

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इस खुले पत्र में पूर्व नौकरशाहों ने देश के मौजूदा माहौल पर करारा चोट किया है और देश के संवैधानिक संस्थानों के प्रमुख से इस पर लगाम लगाने की अपील की है।

ये है खुला पत्र

हम भारतीय प्रशासनिक सेवा और सेंट्रल सर्विस के विभिन्न बैचों के रिटायर्ड ऑफिसर का एक समूह हैं। हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि हमारे समूह का किसी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है। हम संविधान की उन सिद्धांत पर यकीन रखते हैं जिसके द्वारा देश में निष्पक्षता और तटस्थता की गारंटी दी गई है।

लेकिन हम बताना चाहते हैं कि पिछले दो-तीन सालों के अंदर देश के अल्पसंख्यक समुदाय में भयानक ढ़ंग से भय और असंतोष का माहौल पनपने लगा है।

हम बताना चाहते हैं कि पिछले दो-तीन सालों से देश में धार्मिक असहिष्णुता का माहौल जानबूझ कर बनाया जा रहा है। जान बूझ कर मुस्लिम समुदाय को लक्ष्य कर उनके खिलाफ हिन्दू समुदाय में नफरत की आग फैलाई जा रही है।

Modi

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के दौरान खुलेआम देश की एक खास राजनीतिक पार्टी ने अपने चुनावी भाषण में दीवाली में बिजली नहीं और रमजान में बिजली देने के नाम पर प्रांत में सांप्रदायिक नफरत फैलाने का काम किया। श्मशान-कब्रिस्तान के नाम पर दो समुदायों के बीच नफरत के बीज बोए गए।

इतना ही नहीं चुनाव के बाद जिस राजनीतिक दल की सरकार बनी उसके द्वारा कत्लखाने को बंद किए जाने का आदेश अल्पसंख्यक समुदाय के रोजी-रोटी पर सीधे निशाना कर के दिया गया था।

Akhlaq

गोरक्षा के नाम पर पूरे देश में मुस्लिमों पर, दलितों पर हमले किए जा रहे हैं। साल 2015 में घर में गोमांस रखने के आरोप में दादरी के बिसाहड़ा गांव में मोहम्मद अख़लाक़ की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। इसके बाद इस साल अप्रैल महीने में गोतस्कर समझ कर राजस्थान के अलवर शहर में कथित गोरक्षकों ने पहलू ख़ान की भी जान पीट-पीट कर ले ली।

Cow vigil

गोरक्षा के नाम पर, सतर्कता के नाम पर हम कौन सा समाज बना रहें हैं जो किसी को मारने की इजाजत देता है।

बोलने की आजादी और लिखने की आजादी पर लगातार हमले किए जा रहे हैं। देश को देशभक्तों और देशद्रोही में बांटा जा रहा है। जो उनके सांचे में फिट नहीं बैठते हैं उन्हें खुलेआम सोशल मीडिया और टीवी डिबेट में देशद्रोही का सर्टिफिकेट थमा दिया जाता है।

राष्ट्रवाद के नाम पर देश में एक किस्म का उग्र राष्ट्रवाद पनप रहा है जो देश के लोकतांत्रिक और संवैधानिक प्रारुप को ध्वस्त करने की साजिश रच रहा है।

देश के लेखकों-कलाकारों, बुद्धिजीवी-साहित्यकारों और पत्रकारों को सोशल मीडिया पर लगातार उग्र राष्ट्रवादी स्कूल में दीक्षा लिए भक्त ट्रोल करते हैं, जान से मारने की धमकी देते हैं और खुलेआम गाली देने से भी नहीं हिचकते हैं। अभिव्यक्ति की आजादी पर लगातार हमले किए जा रहे हैं।

हम पूर्व नौकरशाहों का समूह देश के सभी अग्रणी संवैधानिक संस्थानों के प्रमुख से अपील करते हैं कि भारतीय संविधान की प्रस्तावना में निहित भारत की धर्मनिरपेक्ष आत्मा को फिर से पुनर्जीवित किया जाए और देश में किसी भी स्तर पर सांप्रदायिक या जातीय आधार पर भेदभाव, अलगाव की नीति पर तत्काल लगाम लगाया जाए। खुला पत्र लिखने वालों में 91 वर्ष के आईएएस अधिकारी हर मंदर सिंह भी शामिल हैं। 

इन पूर्व नौकरशाहों ने लिखा खुला पत्र

विवेक अग्निहोत्री, पूर्व सचिव, राज्य सभा

एस एलावादी, पूर्व चेयरमैन, इलेक्ट्रीसिटी रेग्युलेटरी कमिशन

पी एम्ब्रोज. एडिशनल सेक्रेटरी, मिनिस्ट्री ऑफ शिपिंग

इशरत अजीज, पूर्व भारतीय उच्चायुक्त, ब्राजील

बालाचंद्रन, पूर्व मुख्य सचिव, पश्चिम बंगाल

सुंदर बरूआ, पूर्व सचिव, महाराष्ट्र सरकार

चंद्रमोहन, पूर्व प्रधान सचिव, शहरी विकास मंत्रालय

कल्याणी चौधरी, पूर्व एडिशनल सेक्रेटरी, पश्चिम बंगाल सरकार

अन्ना देवी, पूर्व एडिशनल सेक्रेटरी, महाराष्ट्र सरकार

विभा पुरी दास, पूर्व सचिव, आदिवासी मामलों के मंत्रालय, भारत सरकार

(और 55 पूर्व IAS अधिकारियों ने इस पत्र पर किए हैं हस्ताक्षर)

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