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'जब मोदी कैबिनेट भई कोतवाल तो डर काहे का'

icon कुलदीप सिंह | 0
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| अक्टूबर 11 , 2017 , 14:33 IST | नई दिल्ली

गुजरात चुनाव की तैयारियों के बीच बीजेपी के पालनहार अमित शाह के बेटे के व्यापार से जुड़ी सनसनीखेज़ ख़बर ने तहलका मचा दिया है। ख़बर प्रकाशित करने वाली वेबसाइट www.thewire.in पर 100 करोड़ की मानहानि का मुकदमा दायर किया जा चुका है।

केस की हक़ीकत क्या है? अमित शाह के 'काबिल बेटे' पर कांग्रेस के आरोप झूठे हैं या सच्चे?

क्या आरोपों को छुपाने-दबाने के लिए वेबसाइट www.thewire.in  पर मुकदमा किया गया है?

सवाल दर सवालों की लंबी फेरहिस्त तैयार हो रही है लेकिन मेरे ज़हन में तो बस एक ही सवाल है कि आखिर मोदी कैबिनेट बीजेपी अध्यक्ष के बेटे के बचाव में सार्वजनिक तौर पर लोहा क्यों ले रही है?


ख़बर प्रकाशित होने के बाद जब हल्ला मचा तो सबसे पहले केन्द्रीय रेल मंत्री जय शाह के बचाव में सामने आए और प्रेस कांफ्रेंस करके वेबसाइट की ख़बर को प्रोपेगेंडा बताया। केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने तो जय शाह के बचाव में यहां तक कह दिया कि ख़बर बेबुनियाद है इसमें जांच की कोई जरूरत नही है।


केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद तो एक कदम और आगे निकले और कहा कि जय शाह ने अपने व्यापार में कुछ भी गलत नहीं किया है। रविशंकर प्रसाद ने जय शाह पर लगे आरोपों को षडयंत्र बताते हुए कहा कि उनपर भ्रष्टाचार के झूठे आरोप लगाए गए हैं। इसके लिए उन्होंने 100 करोड़ की मानहानि का मुकदमा भी दर्ज कराया है। कमाल है न खाता न बही जो मंत्री जी कहें बस वही सही।


ज़रा सोचिए बीजेपी अध्यक्ष के बेटे पर हुए खुलासे पर कौन-कौन सफाई दे रहा है और पैरवी  कर रहा है ..देश का गृहमंत्री, देश का कानून मंत्री और देश का रेलमंत्री।

सरकार के तीन नुमाइंदे पार्टी अध्यक्ष के बेटे को बेकसूर बताने में एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं।
ऐसा लगता है कि बिना इन्वेस्टीगेशन के ही मोदी कैबिनेट केस को ख़त्म करने पर आमादा है। ख़बर पर बीजेपी और उसके नेताओं का डैमेज कंट्रोल करना समझ में आता है क्योंकि आरोप पार्टी अध्यक्ष की साख पर बट्टा लगाने वाले हैं। देश के करीब 70 फीसदी हिस्से पर बीजेपी का परचम फहराने वाले अब तक के सबसे सफल बीजेपी अध्यक्ष की इज्जत बचाना बीजेपी के लिए बड़ा एजेंडा होना चाहिए जनता की चुनी हुई सरकार के मंत्रियों का नहीं। द वायर की ख़बर ने कांग्रेस के हाथ गुजरात चुनाव में बड़ा राजनैतिक हथियार थमा दिया है। राहुल गांधी कह रहे हैं मोदी सरकार का नारा बदल गया 'बेटी बचाओ' अध्यक्ष जी का बेटा बचाओ अभियान बन गया है। राजनीतिक आरोपों प्रत्यारोपों के लिहाज़ से कांग्रेस-बीजेपी का आपस में उलझना नाजायज नहीं है लेकिन कानून मंत्री, गृहमंत्री और रेलमंत्री का जय शाह को निर्दोष साबित करना जनमानस में गलत संदेश देता है। 


जिस मनमोहन सरकार को बीजेपी और सरकार के मंत्री सत्ता में आने के तीन साल बाद भी पानी पी-पीकर कोसते हैं उस सरकार में भी आरोपों को खारिज करने का ये तरीका नहीं देखा गया था। जय शाह के बचाव में कूदे तीन तीन केन्द्रीय मंत्रियों की बॉडी लैंग्वेज से लगता है कि सरकार किसी भी स्तर पर बीजेपी अध्यक्ष के बेटे पर लगे आरोपों की कोई जांच नहीं करवाने वाली।


तो क्या ये स्थिति लोकतंत्र के लिए अच्छी है? एक पुरानी हिंदी लोकोक्ति है जब सैंया भये कोतवाल तो डर काहे का ? अमित शाह के बेटे के संदर्भ में कह सकते हैं 'जब मोदी कैबिनेट भई कोतवाल तो डर काहे का'

Jai Amit shah (2)

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यहां पढ़ें बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के बेटे पर क्या खुलासे हुए?

द वायर में छपी रिपोर्ट के मुताबिक जय शाह की कंपनी ‘टेम्पल इंटरप्राइजेज’ की कमाई में एक साल के दौरान करीबन 16000 गुना से ज्यादा की बढ़ोत्तरी हुई। कंपनी में यह वृद्धि भाजपा के 2014 में सरकार में आने के बाद हुई है।

रिपोर्ट के मुताबिक शाह की कंपनी की साल 2014-15 में कुल आय 50000 रूपए थी, जो साल 2015-16 में बढ़कर 80.5 करोड़ हो गयी। कमाई में इस वृद्धि का कारण राजेश खंडाला, जो कि राज्य सभा सदस्य परिमल नाथवानी के समधी हैं, द्वारा दिए गया एक लोन बताया जा रहा है। खंडाला ने शाह की कंपनी को करीबन 15.78 करोड़ का एक लोन दिया था।

इसके बाद साल 2016 में अचानक शाह की कंपनी ने कमाई ख़त्म होने का दावा करके कंपनी को पूरी तरह से बंद कर दिया था। इसके पीछे कंपनी ने पिछले साल हुए 1.4 करोड़ रूपए का घाटा होने का दावा किया है।

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कुलदीप सिंह

लेखक www.Khabarnwi.com के Editorial Head हैं और News World India समाचार चैनल में executive editor हैं. आप उन्हें twitter पर @kuldeeps1980 पर फॉलो कर सकते हैं.

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