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ये हैं यूपी के 63 मासूमों की मौत के जिम्मेदार?

icon अमितेष युवराज सिंह | 0
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| जनवरी 1 , 1970 , 05:30 IST | गोरखपुर

गोरखपुर के सरकारी अस्पताल में हुई 63 बच्चों की मौत का जिम्मेदार कौन है। आखिर किसकी लापरवाही से इतना बड़ा हादसा हुआ। इन मासूमों की मौत का जिम्मेदार है गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज और फर्म पुष्पा गैस एजेंसी? जिसने अमानवीय व्यवहार करते हुए इतनी जानें ले ली। इस हादसे पर कई बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।

पहला सवाल

इस हादसे के लिए अॉक्सीजन देने वाली फर्म पुष्पा गैस एजेंसी जिम्मेदार है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह घटना ऑक्सीजन की कमी की वजह से हुई है, क्योंकि फर्म पुष्पा गैस एजेंसी को इसकी सप्लाई का ठेका दिया गया था उसका बिल बकाया था और काफी दिनों से कंपनी की ओर से बकाए बिल की मांग की जा रही थी। लेकिन लाल फीताशाही की वजह से बकाया नहीं किया गया और कंपनी ने अचानक ऑक्सीजन की सप्लाई बंद की दी। फर्म पुष्पा गैस एजेंसी का सरकारी अस्पताल के साथ 3 साल पहले कॉन्ट्रैक्ट हुआ था,अस्पताल पर कंपनी का 69 लाख रुपए बकाया है। 

दूसरा सवाल

गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज को पहले से मालूम था बकाया रकम नहीं मिलने पर फर्म पुष्पा गैस एजेंसी ऑक्सीजन की सप्लाई बंद कर देगी, तो अस्पताल ने पहले से इसकी वैकल्पिक तैयारी क्यों नहीं करके रखी। अस्पताल भी फर्म पुष्पा गैस एजेंसी की तरह इन बच्चों की मौत का जिम्मेदार है।

तीसरा सवाल

इस हादसे के लिए यूपी सरकार भी इतनी ही जिम्मेदार है जितना सरकारी अस्पताल और ऑक्सीजन कंपनी है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा कंपनी को समय पर पेमेंट क्यों नहीं दी गई और दूसरा अस्पताल में अन्य कोई दूसरी व्यव्स्था भी क्यों नहीं की गई। आखिर कब तक लोग सरकार की लापरवाही की वजह से अपनी जान गंवाते रहेंगे।

हादसे पर यूपी सरकार का क्या कहना है?

मासूमों की मौत पर सियासय शुरू हो गई है। यूपी सरकार का कहना है कि कोई भी मौत ऑक्सीजन की कमी के कारण नहीं हुई है।

यूपी में स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल है, ये हम नहीं सूबे के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह का कहना है। राज्य स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में पिछड़ा हुआ है। गोरखपुर की दुर्दशा के बारे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी वाकिफ हैं, उन्होंने हर हाल में बदहाल व्यवस्था को दुरुस्त करने का फरमान सुनाया है।

गोरखपुर में जापानी इन्सेफलाइटिस बीमारी का कहर ?

- सीएम के के गृह जनपद गोरखपुर में इन्सेफलाइटिस का कहर लगातार जारी है। इन्सेफलाइटिस का पहला मामला 1977 में सामने आया था। यह दो तरह का है। पहला जापानी इन्सेफलाइटिस या जापानी बुखार, जो मच्छरों से फैलता है। हालांकि जापानी बुखार का टीका विकसित कर लिया गया है। इसकी वजह से इलाज हो पा रहा है।

- दूसरा इन्सेफलाइटिस (जेईएस) गंदे पानी से भी होता है। इसके इलाज कैसे हो इसके लिए रिसर्च जारी है। इस बीमारी का टीका अभी नहीं खोजा गया है। इसका असर जुलाई से शुरू होता है और नवंबर के आसपास कम हो जाता है। इसके वायरस तेजी से शरीर में पहुंचते हैं और फिर तत्काल बुखार आता है। इससे मेंटल या फिजिकल डिसएबिलिटी का भी खतरा रहता है।

- रिपोर्टस के मुताबिक, 2000 से लेकर 2200 इन्सेफलाइटिस के मरीज गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में आते हैं। इसमें 450 से 500 के बीच मरीजों की मौत हर साल हो जाती है। अब तक इस बीमारी से यूपी के गोरखपुर समेत 12 ज़िलों में एक लाख से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। साल 2016 में इन्सेफलाइटिस से होने वाली मौतों की संख्या 15 फीसदी बढ़कर 514 हो गई। यह आंकड़ा सिर्फ गोरखपुर मेडिकल कॉलेज का है।


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अमितेष युवराज सिंह

लेखक न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर हैं

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