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उस बच्चे को बचाने के लिए उसने कैमरा फेंका..भागा..कोशिश की लेकिन...(तस्वीरें)

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अप्रैल 19 , 2017 , 19:41 IST | दमिश्क

अक्सर सोशल मीडिया में कोई ऐसी तस्वीर देखने को मिल जाती है, जिसको देख आंख में पानी भर आता है। ठीक ऐसी ही एक तस्वीर ट्वीटर में छाई हुई है। बता दें यह तस्वीर सीरिया की है, जिसमें एक सीरियाई फोटोग्राफर अपने कैमरे को फेंककर बम धमाके में घायल बच्चे को बचाने पहुंच गया और उस बच्चे को उठाकर भागा, लेकिन कुछ वक्त बाद जब फोटोग्राफर बच्चे को देखता है तो उसे मरा हुआ देखकर फूट-फूटकर रोने लगता है।

दरअसल, पिछले हफ्ते शरणार्थियों को लेकर आ रही बसों का एक काफिला कुछ देऱ के लिए अलेप्पो के पास राशिदीन कस्बे में रुका... वहां की स्थानीय खबरों के मुताबिक एक व्यक्ति ने उसी समय छोटे-छोटे बच्चों को चिप्स के पैकेटों का लालच देकर अपनी तरफ बुलाय़ा, जिसके तुंरत बाद बम धमाका हुआ। इस धमाके में 126 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 80 से ज्यादा मासूम बच्चे थे।

इसके तुरंत बाद फोटोग्राफर और सामाजिक कार्यकर्ता अब्द अल्कादर हबस इसे देखकर कुछ वक्त के लिए बेहोश हो गए। हबस ने सीएनएन से की बातचीत में बताया कि वहां का नजारा भयावह था... खासतौर पर छोटे-छोटे मासूम बच्चों को अपनी आंखों के सामने तड़पते और मरते देखना...भयावह रहा। इसके बाद मैंने अपने साथियों के साथ मिलकर फैसला लिया कि हम अपने कैमरे एक ओर रख दें और जख्मियों को बचाना शुरू कर दें।

हबस बताते है कि वो पहले बच्चे के पास पहुंचे तो वो मर चुका था। जिसके बाद वो दूसरे बच्चे की तरफ गए और उसे उठाया वह बच्चा बड़ी मुश्किल से सांस ले पा रहा था और एम्बुलेंस की ओर भागे। उन्होंने बताया कि उस बच्चे ने कसकर मेरा हाथ पकड़ा और मुझे देखे जा रहा था।

Blast syria

ट्विटर में छाई हबस की इस तस्वीर को वहां पर मौजूद दूसरे फोटोग्राहर मोहम्मद अलगरेब ने कैमरे में क़ैद किया था। अलगरेब इस मुद्दे पर जानकारी देते हुए कहते है कि मैंने कुछ जख्मी लोगों की मदद की, मगर बाद में फोटों खींचना शुरू कर दिया। मैं वहां के हालातों को कैमरे में कैद कर लेना चाहता था, ताकि जिम्मेदारी और जवाबदेही तय हो सके और मुझे फक्र है कि मैं वहां पर मौजूद वो युवा पत्रकार था, जो वहां पर मौजूद जिन्दगियों को बचाने का प्रयास कर रहा था।

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