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खत्म हो जाएगा Atm-Credit-Debit कार्ड्स का चलन: अमिताभ कांत

icon कुलदीप सिंह | 0
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| अप्रैल 1 , 2017 , 19:33 IST | नई दिल्ली

नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अमिताभ कांत का कहना है कि भारत में प्रौद्योगिकी के बढ़ते प्रसार के कारण डिजिटल लेनदेन मोबाइल वॉलेट्स और बायोमीट्रिक माध्यमों के जरिए किए जाएंगे और एटीएम, क्रेडिट, डेबिट कार्ड्स के चलन खत्म हो जाएंगे।

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कांत ने पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) के व्यापार और निवेश सेवा सुविधाएं (टीआईएफएस) लॉन्च करने के मौके पर कहा कि प्रौद्योगिकी का भारत के विकास में महत्वपूर्ण योगदान रहेगा। उन्होंने कहा कि,

भारत में फिजिकल बैंकिंग लगभग समाप्त हो चुकी है और यहां प्रौद्योगिकी का इतनी तेज रफ्तार से प्रयोग हो रहा है कि अगले तीन-चार सालों में डिजिटल लेनदेन मोबाइल वॉलेट और बायोमीट्रिक माध्यमों से ही होगा

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वैश्विक मंदी में भी हमारी जीडीपी 7.6 फीसदी

कांत ने कहा कि एटीएम, क्रेडिट, डेबिट कार्ड्स का चलन पूरी तरह खत्म हो जाएगा। उन्होंने कहा कि दुनियाभर में छाई आर्थिक मंदी के बावजूद भारत का 7.6 प्रतिशत की दर से विकास हो रहा है।

कांत ने कहा कि,

अमेरिका और यूरोप की आबादी बूढ़ी होती जाएगी, जबकि भारत की युवा आबादी होगी

व्यापार के नियमों को आसान बनाने के सवाल पर उन्होंने कहा, "पिछले साल हमने 1200 नियम खत्म कर दिए। नीति आयोग के सीईओ कांत ने कहा कि भारत देश में आने वाले निवेश पर विपरीत प्रभाव डालने वाले नियम-कानूनों को समाप्त करता रहेगा। उन्होंने कहा कि भारत अपनी अर्थव्यवस्था के विस्तार के लिए अनुकूल परिस्थितियां पैदा करेगा।

1500 MNC ने हैदराबाद और बेंगलुरू में खोले हैं नवाचार केंद्र

उन्होंने कहा कि भले ही ट्रंप अमेरिकी अर्थव्यवस्था के संरक्षणवाद की बात करते हों, लेकिन यहां संरक्षणवाद की कोई चर्चा नहीं है। कांत ने कहा कि भारत वैश्वीकरण में यकीन रखता है और वह कभी भी संरक्षणवाद की बात नहीं करेगा। परिणामस्वरूप भारत ऐसी अर्थव्यवस्था के रूप में उभरेगा, जो निवेश और विकास को आकर्षित करेगा और आर्थिक सहभागिता का उत्कृष्ट केंद्र बन जाएगा।

कांत ने कहा कि भारत कई प्रकार से नवाचार का केंद्र बन चुका है। उन्होंने कहा कि करीब 1500 कंपनियों ने हैदराबाद और बेंगलुरू में अपने नवाचार केंद्र खोले हैं। भारत सस्ती इंजीनियरिंग का केंद्र है।

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कुलदीप सिंह

लेखक न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में कार्यकारी संपादक हैं

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