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प्रधानमंत्री मोदी ने क्यों कहा, मैं राजनीति में खुद को बाहरी व्यक्ति मानता हूं

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| फरवरी 16 , 2018 , 18:32 IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि वह खुद को राजनीति में बाहरी व्यक्ति (आउटसाइडर इन पॉलिटिक्स) मानते हैं और वह भीतर से एक राजनेता नहीं हैं। मोदी ने छात्रों के साथ परीक्षा पर चर्चा कार्यक्रम में बातचीत करते हुए कहा, "मैंने राजनीति में देर से प्रवेश किया। बहुत से लोग इसे स्वीकार नहीं कर पाते हैं।"

उन्होंने कहा, "मैं राजनीतिक प्रणाली में हूं, लेकिन मैं स्वभाव से राजनेता नहीं हूं। मेरा स्वभाव कुछ करने का है।" मोदी ने यह टिप्पणी कक्षा 11वीं के छात्र के सवाल पर की। छात्र ने मोदी से सवाल किया था कि क्या वह अपनी बोर्ड परीक्षा यानी अगले लोकसभा चुनावों के लिए तैयार हैं।
मोदी ने कहा कि उनके पास सवा अरब भारतीयों का 'आशीर्वाद' है और चुनाव नतीजे उनके कार्यो का सिर्फ 'सह उत्पाद' (बाई-प्रोडक्ट) हैं। 

दिल्ली के जवाहर नवोदय विद्यालय के छात्र दिलीप ने पूछा, "क्या आप अपनी परीक्षा के लिए तैयार हैं या थोड़ा नर्वस हैं?" मोदी ने जवाब दिया, "मेरा हमेशा से मानना है कि आपको अध्ययन करते रहना चाहिए, सीखने की कोशिश करें और सारा ध्यान सीखने पर केंद्रित करें। अपने अंदर के छात्र को जितना संभव हो ऊर्जावान बनाएं। इसे अपनी जीवनशैली बनाएं..परीक्षा, परिणाम व अंक को सह उत्पाद होना चाहिए।"

उन्होंने कहा, "आप ने अपना काम किया है तो परिणाम आएगा। यदि आप अंकों पर जाते हैं तो वास्तव में हम जो चाहते हैं, उसे शायद नहीं कर सकते..मैं इसी सिद्धांत पर राजनीति में काम करता हूं।" उन्होंने कहा, "मेरा पूरा समय, ऊर्जा, ताकत व मानसिक क्षमता सब सवा अरब भारतीयों पर खर्च होनी चाहिए। चुनाव आएंगे-जाएंगे, वे बाइ प्रोडक्ट हैं।" मोदी ने कहा, "हमारी स्थिति ऐसी है कि आप साल में एक बार परीक्षा देते हैं, हम दिन में 24 घंटे परीक्षा देते हैं।"

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उन्होंने याद किया कि कैसे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पूर्ववर्ती जनसंघ गुजरात चुनावों में सभी सीटें हार गई थी। उन्होंने कहा, "उनके 103 उम्मीदवार थे। जो भी लड़ना चाहता था, उसे टिकट दिया गया। 103 उम्मीदवारों में 99 की जमानत जब्त हो गई थी।" उन्होंने कहा, "चार उम्मीदवार बच गए। उनकी जमानत राशि जब्त नहीं हुई, जिससे उन्होंने पार्टी की और मिठाइयां बांटीं।" उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी कविता की एक पंक्ति का हवाला दिया-'हार नहीं मानूंगा।' मोदी ने कहा, "हर किसी की ऐसी सोच होनी चाहिए।"


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