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ब्लैक मनी पर मोदी अटैक, कहा- बही को कर लें सही, 1 लाख कंपनियों पर लगे ताले

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जुलाई 1 , 2017 , 19:58 IST | नई दिल्ली

नरेंद्र मोदी ने गुड्स एंड सर्विसेस टैक्स (GST) की देशभर में लॉन्चिंग के बाद शनिवार को पहली बार भाषण दिया। चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के बीच पहुंचे मोदी ने कहा, ''बही को सही करने वाले मेरे साथियो! कोई भी देश बड़े से बड़े संकट से खुद को उबार कर सकता है। मेरी और आपकी देशभक्ति में कोई कमी नहीं है।

मोदी ने यह भी कहा, ''विदेश में कालेधन के खिलाफ कार्रवाई का क्या असर हो रहा है, इसकी गवाही स्विस बैंक के ताजा आंकड़ों से मिल रही है। स्विस बैंक ने बताया है- भारतीयों द्वारा जमा राशि अब तक के रिकॉर्ड में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है।
पीएम मोदी ने कहा कि तीस साल पहले 1987 में स्विस बैंकों ने बताना शुरू किया था कि किस देश के लोग, कितना पैसा वहां जमा करा रहे हैं। पिछले साल की जो रिपोर्ट अब आई है, उसके मुताबिक भारतीयों के जमा पैसे में 45% की कमी आई है।

मोदी ने कहा कि जितना मैं देश आगे बढ़ाना चाहता हूं, उतना ही आप भी चाहते हैं। लेकिन, कुछ सच्चाइयां हैं, जो कभी-कभी सोचने के लिए मजबूर करती हैं। आप लोगों ने अनुभवी लोगों से सुना होगा कि अगर किसी घर में आग लग जाए और संपत्ति जल जाए तो कहते हैं कि वो परिवार स्वपुरुषार्थ से बहुत जल्द खड़ा हो जाता है। कष्ट और तकलीफ होती है, लेकिन वे अपना कारोबार शुरू कर देते हैं। समय रहते संकट से बाहर आ जाते हैं। लेकिन, बुजुर्ग कहते हैं कि परिवार का ही सदस्य अगर चोरी करने की आदत रखता है, तो परिवार कभी खड़ा नहीं हो सकता है।

उन्होंने कहा कि नोटबंदी के बाद सीए को बहुत काम करना पड़ा। यहां तक सीए को अपनी छुट्टियां रद्द करनी पड़ी। एक लाख कंपनियों पर एक कलम में ताला लगा दियागया। रजिस्टर्ड कंपनियों को एक झटके में खत्म कर दिया। ऐसा बड़ा फैसला कोई देशभक्ति ही ले सकता है। शेल कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है और आने वाले दिनों में इनके खिलाफ और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

इससे पहले वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कार्यक्रम को संबोधित किया और जीएसटी के फायदे बताए। जेटली ने कहा कि GST लागू होना देश के लिए ऐतिहासिक कदम है और हमें इसे लागू करने का मौका मिला।

उन्होंने कहा कि भारत के बढ़ते बाजार और मजबूत अर्थव्यवस्था की वजह से आज पूरी दुनिया हमारी ओर देख रही है। जेटली की मानें तो विकसित होने के लिए मानसिकता बदलनी होगी और आधे-अधूरे रवैये के साथ देश को नहीं बदला जा सकता है।


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