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प्रणब मुखर्जी का राष्ट्र के नाम आखिरी संदेश, कहा- लोकतंत्र में हिंसा की कोई जगह नहीं

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जुलाई 24 , 2017 , 21:14 IST | नयी दिल्ली

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने विविधता और सहिष्णुता को भारत की आत्मा बताते हुए कहा है कि अनेकता में एकता ही भारत की पहचान है। बतौर राष्ट्रपति राष्ट्र के नाम आखिरी संदेश में प्रणब मुखर्जी ने देश में बढ़ती हिंसा पर गहरी चिंता जताई।

उन्होंने कहा कि हमारा देश विविधताओं से भरा देश है, जिसमें अलग-अलग विचारों को नाकारा नहीं जा सकता। इस दौरान उन्होंने एक आधुनिक देश के लिए तर्क और आंतरिक समीक्षा को बेहद जरूरी बताया और मजबूत लोकतंत्र के लिए विकास और नीतियों का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने पर जोर दिया।

मुखर्जी ने कहा, 'मैं भारत के लोगों का सदैव ऋणी रहूंगा। जब मैं 5 साल पहले राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी तो संविधान की रक्षा का भी शपथ ली थी। पिछले 5 सालों में मैंने देश के संविधान की रक्षा के लिए हरसंभव कोशिश की। मैं अपने कार्यकाल के दौरान कई जगहों की यात्रा की। बुद्धिजीवियों, छात्रों से मिला और उनसे काफी कुछ सीखा। मैंने बतौर राष्ट्रपति खूब प्रयास किए। मैं अपने प्रयासों में कितना सफल हो पाया यह तो अब इतिहास में ही परखा जाएगा। संविधान मेरा पवित्र ग्रंथ रहा है। भारत की जनता की सेवा मेरी अभिलाषा रही है।'

गौरतलब है कि रविवार को संसद भवन में अपने विदाई समारोह के दौरान राष्ट्रपति ने अध्यादेशों की बाढ़ के लिए सरकार को तो संसद में हंगामे के लिए विपक्ष को नसीहत दी थी। राष्ट्रपति ने हिंसा की बढ़ती प्रवृत्ति पर गहरी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि हम रोज अपने आसपास हिंसा में बढ़ोत्तरी देख रहे हैं। जबकि हमें पता है कि हिंसा का हृदय अंधकार, अविश्वास और डर है। संवाद को हिंसा से मुक्त बनाने की जरूरत है।


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