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पुणे यूनिवर्सिटी का फरमान, सिर्फ शाकाहारी छात्रों को ही दिया जाएगा गोल्ड मेडल

श्वेता बाजपेई, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| नवंबर 11 , 2017 , 11:27 IST | पुणे

महाराष्ट्र की सावित्रीबाई फुले के द्वारा जारी किये गए फरमान पर विवाद शुरू हो गया है। दरअसल विश्‍वविद्यालय ने अपने इस सर्कुलर में कहा है कि विश्‍वविद्यालय अब सिर्फ सिर्फ उन छात्रों को ही गोल्ड मेडल देगा जो शाकाहारी और किसी प्रकार का नशा न करता हो।

सर्कुलर के अनुसार 10 ऐसी शर्तें तय की गई हैं जो महर्षि कीर्तंकर शेलार मामा गोल्‍ड मेडल के लिए पात्रता तय करते हैं। इनमें से सातवीं शर्त है छात्र को किसी भी तरह का नशा नहीं करना चाहिए और उसे शाकाहारी होना चाहिए।

विश्वविद्यालय ने अपने इस कदम का बचाव करते हुए कहा है कि यह शर्त मेडल के प्रायोजकों द्वारा रखी गई है। एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि चूंकि सभी पुरस्‍कार बाहरी लोगों द्वारा स्‍पॉन्‍सर किए जाते हैं, तो हम उनके ही नियम व शर्तों का पालन करते हैं। इस साल यह सर्कुलर 31 अक्टूबर को पुन: जारी किया गया है। हालांकि छात्र संगठन इसका विरोध कर रहे हैं।

बता दें कि यह मेडल योग महर्षि रामचंद्र गोपाल शेलार और त्यागमूर्ति श्रीमति सरस्वती रामचंद्र शेलार के नाम पर योग गुरु ट्रस्ट द्वारा दिया जाता है। साथ ही यह मेडल साइंस और नॉन साइंस के पोस्ट ग्रेजुएट स्टूडेंट्स को दिया जाता है। हालांकि यूनिवर्सिटी का कहना है कि उन्होंने यह शर्तें तय नहीं की है और ट्रस्ट के सामने इस मामले को उठाया जाएगा।

सर्कुलर पर शिवसेना और एनसीपी ने कड़ी प्रतिक्रिया व्‍यक्‍त की है। शिवसेना के युवा सेना अध्यक्ष आदित्य ठाकरे ने विश्वविद्यालय की निंदा की है। ठाकरे ने कहा कि कोई क्या खाए क्या ना खाए ये उसका अपना फैसला होना चाहिए। यूनिवर्सिटी को केवल पढ़ाई पर ध्‍यान देना चाहिए।

एनसीपी की नेता और सांसद सुप्रिया सुले ने ट्वीट कर कहा, 'पुणे यूनिवर्सिटी का फैसला निराशाजनक और चौंकाने वाला है। अपने राज्‍य की शिक्षा पर गर्व है, हमारी यूनिवर्सिटीज को क्‍या हो गया है। कृपया खाने की जगह शिक्षा पर ध्यान दें।'

वहीं कांग्रेस ने इस सर्कुलर को बेवकूफाना बताया है। कांग्रेस नेता विश्वजीत कदम ने कहा कि यह एक एजुकेशन डिग्री है न कि छात्रों के खाने-पीने की आदतों के आधार पर दिया जाने वाला कोई पुरस्कार है।

सर्कुलर में खाने के अलावा यह भी लिखा गया है कि मेडल के लिए अप्लाई करने वाले छात्र को भारतीय सभ्यता-संस्कृति में भी रुचि होनी चाहिए। साथ ही उसका योग प्राणायाम और ध्यान में रूची होना अनिवार्य है।


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