ख़ास रिपोर्ट

अल-जजीरा को क्यों बंद करवाना चाहता है सऊदी अरब? (क़तर संकट विशेष)

कुलदीप सिंह, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 1
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| जून 25 , 2017 , 10:45 IST | नई दिल्ली

कई दिनों से जारी क़तर राजनैतिक संकट और गहराता दिख रहा है। क़तर ने शनिवार को सऊदी अरब की उस सूची को रिजेक्ट कर दिया है जिसमें अल-जजीरा चैनल बंद करने और संबंध सुधारने की एवज़ में मुआवज़े की मांगे रखी गईं थी। 

अल-जजीरा खाड़ी देशों का प्रमुख समाचार चैनल है, जो वहां पर प्रगतिवादी सोच को बढ़ावा देने का कार्य करता है। वहीं सऊदी अरब रुढ़िवादी मुस्लिम विचारधारा का हिमायती है। 

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उधर अमेरिकी सरकार ने क़तर राजनीतिक संकट को पारिवारिक झगड़ा कहना शुरू कर दिया है। 

व्हाइट हाउस प्रवक्ता शॉन स्पाइसर ने कहा,

हमारे हिसाब से ये राजनयिक संकट एक पारिवारिक झगड़ा है और ये चारों देश इसका हिस्सा हैं उन्हें खुद ही इसका निपटारा करना चाहिए. अगर हम इन देशों के बीच बातचीत करा सकें तो ठीक है. ये देश अपने आप से इसका समाधान निकालना चाहते हैं और उन्हें निकालना भी चाहिए

 

सऊदी अरब समेत चार अन्य अरब देशों ने क़तर के सामने 13 मांगों की एक सूची रखी थी।

न्यूज़ एजेंसी एपी के जरिए पहली बार दुनिया के सामने आने वाली इन मांगों ने दोनों पक्षों के बीच तकरार को बढ़ा दिया है।

सऊदी अरब ने क्या मांगा था क़तर से?

- क़तर मुस्लिम ब्रदरहुड के साथ सभी तरह के संबंध तोड़ें जो कि अरब देशों में प्रतिबंधित है।

- अल-जज़ीरा, अरबी21 और मिडिल ईस्ट आई न्यूज़ चैनलों को आर्थिक मदद देना बंद   करे

- मुआवजे के रूप में एक मात्रा में धनराशि दे

- सऊदी अरब और अन्य देशों में विपक्षी पार्टियों को दी गई आर्थिक मदद से जुड़ी विस्तृत जानकारी दे

- अमरीकी प्रशासन के बताए चरमपंथी संगठनों को आर्थिक मदद देना बंद करे

- इन चार देशों द्वारा चरमपंथ के मामले में लंबित उन सभी व्यक्तियों को सौंपे

- चार देशों के उन नागरिकों को बेअसर करने से इनकार करे और क़तर में मौजूद ऐसे लोगों को बाहर निकाले

- गल्फ़ को-ऑपरेशन काउंसिल के साथ राजनीतिक, आर्थिक और सभी अन्य तरीकों के साथ क़तर खुद को जोड़े

- बीते दिनों में कुवैत और ओमान जैसे कुछ अरब देशों को छोड़कर ज्यादातर अरब देशों ने क़तर के साथ अपने राजनीतिक संबंध ख़त्म कर लिए हैं और अपने हवाई क्षेत्रों को कुवैत के लिए बंद कर दिया है।

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क्या है क़तर विवाद? 

- क़तर के ईरान के साथ अच्छे संबंध है जिसे सऊदी अरब और अमेरिका नापंसद करते हैं।क़तर का कहना है कि वे ईरान के साथ अच्छे संबंध इस कारण रख रहा है, ताकि उसके संपर्क का उपयोग कर शांतिपूर्ण बातचीत से बंधकों या नागरिकों को सीरिया गृहयुध्द से प्रभावित क्षेत्रों से आसानी से निकाला जा सके।

- क़तर पर सीरिया में ईरान के सहयोगी बशर अल असद के लड़ाकों का समर्थन करने का आरोप है।

- कतर पर मुस्लिम ब्रदरहुड, जो एक इस्लामी संगठन है, का भी समर्थन करने का आरोप है।

- सऊदी अरब मुस्लिम ब्रदरहुड को सऊदी और खाड़ी देशों में सदियों से चले आ रहे शाही शासन के खिलाफ खड़ी होने वाली ताकत मानता है।  

- कुछ सउदी लोगों ने कतर पर विश्वासघात का भी आरोप लगाया था।

- 2011 में अरब वसंत (Arab Spring) के दौरान, कतर ने मिस्र के प्रदर्शनकारियों के बदलाव के विरोध में आंदोलन का और मुस्लिम ब्रदरहुड का समर्थन किया था।

- इसके विपरीत, सऊदी अरब होस्नी मुूबारक का समर्थन कर रहा था और वर्तमान में अब्देल फतह अल-सिसि का समर्थन कर रहा है। 

- कतर पर आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया है। कुछ देशों ने विद्रोही समूहों को धन देने का दोषी पाया, जिसमें सीरिया का अल-क़ायदा से जुड़ा संगठन अल-नुसरा फ्रंट भी है, हालांकि सउदी ने भी ऐसा ही किया था।

- कतर सबसे बड़े अमेरिकी बेस की मध्य पूर्व में अल उदेद एयर बेस में मेजबानी करता है, जो संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा इराक, सीरिया और अफगानिस्तान में अपने अभियान हेतु उपयोग करता है।

 

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कतर पर अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी का शासन है, विवाद की ताजा शुरुआत 27 मई 2017 को हुई जब अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी ने बयान दिया कि वो चाहते हैं कि क़तर ईरान से मजबूत रिश्ते रखे ये बात सऊदी अरब के नेता शाह सलमान को बिल्कुल पसंद नहीं आई। सऊदी अरब को न्यूज़ नेटवर्क अलजजीरा के बढ़ते वर्चस्व से भी परेशानी है। 

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