राजनीति

PM मोदी के सवाल-जवाब पहले से तय होते हैं वरना शर्मिंदगी होती: राहुल गांधी

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जून 5 , 2018 , 07:36 IST

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया कि उनके साक्षात्कार के सवाल उनकी पसंद के होते हैं और साक्षात्कार की पूरी स्क्रिप्ट पहले से तैयार रहती है। उन्होंने दावा किया कि यदि मोदी से वास्तव में प्रश्न पूछे जाएं तो उनके जवाब 'सभी के लिए शर्मिदगी भरे होंगे।' कांग्रेस अध्यक्ष ने एक ट्वीट में कहा, "मोदी पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जो अपनी पसंद के सवालों के जवाब देते हैं और अनुवादक के पास भी उन प्रश्नों के पहले से तैयार जवाब होते हैं।"



उन्होंने कहा, "अच्छा है कि वह वास्तविक प्रश्नों के जवाब नहीं देते हैं..अगर वह ऐसा करें तो यह हम सभी के लिए वास्तविक शर्मिदगी वाला होगा।"

उन्होंने ट्वीट के साथ एक वीडियो भी संलग्न किया है, जिसमें एक अनुवादक को सिंगापुर के नानयांग प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में आयोजित मोदी के संवाद सत्र में कथित रूप से पहले से तैयार किया हुआ जवाब पढ़ते सुना जा सकता है।

मोदी गत सप्ताह तीन दक्षिण एशियाई देशों की पांच दिवसीय यात्रा पर इंडोनेशिया, मलेशिया और सिगापुर गए थे। यह संवाद सत्र सिंगापुर के प्रतिष्ठित नानयांग प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में आयोजित हुआ था, जहां मोदी ने इस सत्र के दौरान कुछ सवालों के जवाब भी दिए थे।

दरअसल, कांग्रेस अध्यक्ष ने जो विडियो शेयर किया है, उसमें साफ दिखता है कि प्रधानमंत्री एशिया के सामने चुनौती विषय पर पूछे गए सवाल का जवाब हिंदी में देते हैं और उसके बाद अंग्रेजी अनुवादक पूरा एक पैसेज पढ़ती हैं, जिसमें कई फैक्ट और फीगर्स होते हैं जबकि पीएम मोदी ने जवाब में ऐसा कुछ भी नहीं कहा था। 

मोदी से सवाल क्या था..?

संवाद कार्यक्रम में मोदी से पूछा गया था कि एशिया के सामने क्या चुनौतियां हैं और इनका निदान क्या है?

मोदी ने ये जवाब दिया...

"21वीं सदी एशिया की है। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि हम एशिया के लोग इसे फील करते हैं या नहीं। सिर्फ सुनकर हमें यह खुशी हो रही है या भीतर भी वह भाव जग रहा है कि 21वीं सदी को एशिया की सदी बनाकर रहना है। यह बहुत बड़ी चुनौती है। आज भी हम दुनिया के और भूभाग से इतने प्रभावित हैं, क्योंकि सदियों से हमने उस प्रकार की जिंदगी गुजारी है इसलिए कभी हमें भी नहीं लगता है कि अब हमारी बारी है हम कुछ कर सकते हैं और हमें करना है।"

दावा- दुभाषिए ने अंग्रेजी में ये जवाब दिया...

"21वीं सदी एशिया की सदी है, क्या हम वास्तव में इसे महसूस करते हैं? मुझे लगता है ये सबसे बड़ी चुनौती है। क्या आपको यह नहीं लगता कि अब हमारी बारी है। वैसे भी एशिया बाकी दुनिया का प्रभावित करता आया है। एशिया में समृद्धि के अवसर और स्वतंत्रता सबसे ज्यादा बढ़ी है। जापान ने इसकी शुरुआत की थी और बाद में एशिया के दूसरे दिग्गजों ने इसका अनुसरण किया। चीन बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है।

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अब सतत विकास की बारी भारत की है। एशियाई देशों के सामने कई एक जैसी चुनौतियां हैं। खासकर दक्षिण एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया की समान ताकत, समान अवसर, समान कमजोरियों और समान चुनौतियां हैं। बाकी एक जैसी चुनौतियों में डिजिटल स्किल्स, उसके मुताबिक रोजगार पैदा करना, कृषि उत्पादन, पानी, प्रदूषण, तेजी से बढ़ता शहरीकरण, जलवायु परिवर्तन, जैवविविधता का संरक्षण, टिकाऊ इंफ्रास्ट्रक्चर, सस्ती स्वास्थ्य सुविधाएं, शामिल हैं।"


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