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कोर्ट के फैसले से दाग तो धुल गए लेकिन राजेश और नूपुर तलवार को रात में नींद आएगी?

अमितेष युवराज सिंह, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अक्टूबर 12 , 2017 , 18:17 IST | नयी दिल्ली

आरुषि और हेमराज मर्डर केस में राजेश तलवार और नूपुर तलवार निर्दोष साबित हो चुके हैं। दोनों को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बेकसूर करार दिया है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि आरुषि को उसके पापा-मम्मी ने नहीं मारा। नि:संदेह कोर्ट के इस फैसले के बाद दोनों ने भारी राहत की सांस ली है। बरी होने का फैसले आते ही गाजियाबाद की जेल में बंद राजेश और नुपुर तलवार भावुक हो गए। फैसला सुनते ही नुपुर तलवार रो पड़ीं। हाईकोर्ट ने कहा कि दोनों को तुरंत जेल से बरी किया जाए।

इस सनसनीखेज मर्डर केस में नोएडा पुलिस ने दावा किया था कि आरुषि-हेमराज का कातिल कोई और नहीं बल्कि उसके पिता डॉक्टर राजेश तलवार हैं। इस थ्योरी के पीछे पुलिस ने ऑनर किलिंग की दलील रखी। 23 मई, 2008 को पुलिस ने बेटी की हत्या के आरोप में राजेश तलवार को गिरफ्तार किया था।

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पहले इस केस को यूपी पुलिस देख रही थी। 31 मई, 2008 को आरुषि-हेमराज मर्डर केस की जांच सीबीआई के हवाले कर दी गई। कत्ल के आरोप में डॉक्टर राजेश तलवार सलाखों के पीछे थे। आरुषि केस देश भर में सुर्खियां बना हुआ था। तलवार का नार्को टेस्ट भी कराया गया। शक की सुई तब तक तलवार से हटकर उनके नौकरों और कंपाउंडर तक पहुंच गई थी। तलवार परिवार के करीबी दुर्रानी परिवार का नौकर राजकुमार को गिरफ्तार कर लिया गया। इस बीच 50 दिन जेल में गुजारने के बाद राजेश को जमानत मिल गई। फिर 2010 में दो साल बाद सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी। सुनवाई चलती रही और फिर शक की सुई आरोपों की शक्ल में एक बार फिर तलवार दंपति पर टिक गई।

गाजियाबाद कोर्ट ने तलवार दंपति को सबूत मिटाने का दोषी पाया। दोनों के खिलाफ आरुषि-हेमराज मर्डर केस में शामिल होने के आरोप तय किए गए। साल 2012 में आरुषि की मां नूपुर तलवार को कोर्ट में सरेंडर करना पड़ा और फिर जेल जाना पड़ा। नवंबर 2013 में तमाम जिरह और सबूतों को देखने के बाद सीबीआई कोर्ट ने आरुषि के पिता राजेश और मां नूपुर तलवार को उसकी हत्या के जुर्म का दोषी माना और उन्हें उम्र कैद की सजा सुनाई गई।

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राजेश और नुपूर ने सीबीआई कोर्ट की उम्र कैद की सज़ा के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील की और अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राजेश और नूपुर को बेदाग करार दिया है।

सवाल है कि आज दोनों बेशक बरी हो गए लेकिन इतने दिनों से जिस तरह के दाग उनपर लगाए जा रहे थे उनका क्या। उन्हें इतने दिनों से अपनी ही बेटी का कातिल माना जा रहा था। लोग उनके बारे में तरह-तरह की बातें कर रहे थे। इतने दिनों की जिल्लत भरी जिंदगी के लिए कौन जिम्मेदार है?

गाजियाबाद की डासना जेल से आजादी मिलने के बाद राजेश तलवार और नूपुर तलवार सुकून की जिंदगी जी जाएंगे इसकी उम्मीद कम है क्योंकि उनकी बेटी की हत्या की गुत्थी तो अभी भी नहीं सुलझी है।


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