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20 साल में नक्सलवाद से हुई 12000 मौतें, लाल आंतक से निपटने के लिए कोई शॉर्टकट नहीं: राजनाथ

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| मई 8 , 2017 , 15:36 IST | नई दिल्ली

गृहमंत्री राजनाथ सिंह  ने कहा है कि नक्सल समस्या से निपटने के लिए कोई शॉर्टकट रास्ता नहीं है और इसके लिए लंबी रणनीति बनाने की जरूरत है। उन्होंने नक्सल प्रभावित 10 राज्यों के सीएम के साथ दिल्ली में हुई मीटिंग के दौरान यह बात कही।

यह मीटिंग नक्सल समस्या से निपटने की स्ट्रैटजी पर चर्चा के लिए बुलाई गई। इस दौरान राजनाथ ने बताया कि बीते 20 साल में नक्सल समस्या की वजह से देश में 12 हजार से ज्यादा जानें गई हैं। बता दें कि 24 अप्रैल को छत्तीसगढ़ के सुकमा में नक्सली हमला हुआ था, जिसमें 25 जवान शहीद हो गए थे। इसके बाद इस समस्या से निपटने के तरीके तलाशने के लिए यह मीटिंग बुलाई गई थी। 

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केंद्र ने बदली रणनीति

राजनाथ सिंह ने कहा कि सुकमा हमले के बाद केंद्र सरकार ने नक्सलवाद के खिलाफ अपनी स्ट्रैटजी में बदलाव किया है।

उन्होंने कहा, "मुझे भरोसा है कि पूरी ताकत और नई स्ट्रैटजी के साथ हम नक्सलियों का कामयाबी से सामना करेंगे। नक्सल समस्या का फौरन हल नहीं निकला जा सकता। इसका कोई शॉर्टकट भी नहीं है। इसे शॉर्ट टर्म, मीडियम टर्म और लॉन्ग टर्म तरीकों से सुलझाया जा सकता है।

राजनाथ ने कहा, "मुझे भरोसा है कि विकास को रोकने और बंदूक की नोक पर लोकतंत्र का गला घोंटने की कोशिश कभी भी कामयाब नहीं होगी।"

90% नक्सली वारदात 35 जिलों में

मीटिंग में हो मिनिस्ट्री के ऑफिशियल्स ने बताया कि मौजूदा वक्त में 90% नक्सली वारदात 35 जिलों में हो रही हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि 10 राज्यों के 68 जिले नक्सलवाद की समस्या से प्रभावित हैं।

ये बातें तय हुईं मीटिंग में

ऑपरेशन की अगुआई राज्य करें पैरा मिलिट्री फोर्स मदद करेंगी।
हर बटालियन के साथ यूएवी या मिनी यूएवी होनी चाहिए।

इंटेलिजेंस एजेंसी और सिक्युरिटी फोर्सेस को लोकल पब्लिक के साथ नेटवर्क डेवलप करने की जरूरत है।

फिलहाल यूएवी (अनमैन्ड एरियल व्हीकल) का इस्तेमाल काफी कम हो रहा है, जिसे बढ़ाने की जरूरत है।

3 राज्यों के सीएम नहीं पहुंचे

- मीटिंग में राजनाथ सिंह के अलावा केंद्रीय मंत्री सुरेश प्रभु, जयंत सिन्हा, नरेंद्र सिंह तोमर, पीयूष गोयल और मनोज सिन्हा शामिल हुए। - मीटिंग में नक्सल प्रभावित 10 राज्यों

इसमें छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, वेस्ट बंगाल, बिहार, महाराष्ट्र, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश के सीएम और ऑफिशियल्स को बुलाया गया था। हालांकि, इसमें वेस्ट बंगाल की सीएम ममता बनर्जी, तेलंगाना के सीएम केसी राव और आंध्र प्रदेश के सीएम एन. चंद्रबाबू नायडू मौजूद नहीं थे।

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