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बाबा राम रहीम के इस लाल बैग ने पंचकूला में भड़काई थी हिंसा

श्वेता बाजपेई, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अगस्त 31 , 2017 , 15:05 IST | चंडीगढ़

अपने आश्रम की दो साध्वियों के साथ बलात्कार करने के मामले में 20 साल की सजा पा चुके डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम ने अदालत से फरार होने की योजना बनाई थी। आईआरबी के इंस्पेक्टर जनरल केके राव ने खास बातचीत में बताया कि बाबा ने कोर्ट से ही भागने का एक बहुत ही खतरनाक प्लान बना रखा था, जिसके बारे में किसी को भी कोई भनक नहीं थी।

जैसे ही बाबा के खिलाफ फैसला आया बाबा ने हमें बताया कि उसे गाड़ी में रखा अपना लाल बैग चाहिए जिसमें से वो अपने कपड़े निकालेगा। हमने किसी को बैग लाने के लिए भेजा। जब तक बैग कोर्टरूम में पहुंचा तो मैंने देखा कि कोर्ट के करीब दो किलोमीटर दूर तक हिंसा शुरू हो चुकी थी।

राव ने बताया कि “साफ है कि उस लाल बैग में कुछ सिग्नल छिपा था। राम रहीम ने पहले ही अपने आदमियों को ये बता रखा था कि अगर वो गाड़ी से लाल बैग निकलता देखें तो समझ जाएं कि उसके खिलाफ फैसला आया है और फिर उसके समर्थक हिंसा शुरू कर दें ताकि पुलिस का ध्यान भंग हो और वो वहां से भाग निकले।”

राव ने ये बात भी कंफर्म की कि ये वही लाल बैग था जिसे डिप्टी अटॉर्नी जनरल गुरदास सिंह सलवारा ने उठाया था और अगले ही दिन हरियाणा सरकार ने उन्हें बर्खास्त कर दिया था।

राम रहीम का लाल बैग वाला प्लान तो नहीं चला लेकिन फिर उसने नई चाल चली। फैसला आने के बाद गुरमीत अपनी मुंहबोली ‘बेटी’ हनीप्रीत सिंह के साथ बिना किसी बात के कोर्ट रूम से बाहर ही नहीं आया और जानबूझकर कोर्ट परिसर में खड़ा रहा।कोर्टरूम के बाहर कोर्ट परिसर में खड़े होकर, वो ये जानना चाहता था कि उसके समर्थकों को उसकी सजा के बारे में पता लगा है या नहीं। जब उसे पता लगा कि आंसू गोले छोड़े जा रहे हैं तो फिर उसे पता लगा कि हिंसा शुरू हो चुकी है।

उन्होंने कहा कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का संदेह उस वक्त और गहरा गया जब गुरमीत और उसकी गोद ली गई बेटी पंचकूला अदालत परिसर के गलियारे में काफी लंबे समय तक खड़े रहे, जबकि उन्हें वहां खड़ा नहीं होना था। राव ने बताया, वे गाड़ी में बैठने से पहले समय ले रहे थे ताकि उसके लोग यह बात फैला सकें कि वह अदालत से बाहर निकलने वाला है।

उन्हें बताया गया कि आप यहां नहीं खड़े हो सकते। भीड़ करीब दो-तीन किलोमीटर दूर थी और वह नजदीक भी आ सकती थी। हम सेक्टर एक में कोई हिंसा नहीं चाहते थे, क्योंकि इससे मरने वालों की संख्या बहुत बढ़ सकती थी।

उन्होंने कहा कि पुलिस ने गुरमीत को उसकी गाड़ी में बिठाने की बजाय पुलिस उपायुक्त (अपराध) सुमित कुमार की गाड़ी में बिठाने का फैसला किया। जब हम उसे गाड़ी में बिठा रहे थे कि तभी कुछ कमांडो, जो काफी साल से डेरा प्रमुख के साथ तैनात थे, ने गुरमीत को घेर लिया।

राव ने कहा, इसके बाद, सुमित कुमार और उनकी टीम की उनसे झड़प हुई। उसके कमांडो को पीटा भी गया। हमने ख्याल रखा कि कोई फायरिंग नहीं हो। डेरा प्रमुख के कमांडो हथियारबंद थे। आईजी ने बताया कि पुलिस को एक खतरे की भनक गुरमीत के काफिले की 70-80 गाड़ियों से लगी। ये गाड़ियां पास के एक थिएटर परिसर में रखी थीं।


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