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RSS से जुड़े संगठन ने NCERT को दिया सुझाव, किताबों से हटे, 'टैगोर, ग़ालिब और पाश'

श्वेता बाजपेई, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जुलाई 24 , 2017 , 15:12 IST | नई दिल्ली

आरएसएस से जुड़े शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास ने एनसीईआरटी को लिखित सुझाव भेजे हैं और कहा है कि स्कूल की किताबों से अंग्रेजी, उर्दू और फारसी के शब्द हटाएं। न्यास ने क्रांतिकारी कवि पाश, मिर्जा गालिब के शेर, रविन्द्रनाथ टैगोर के वैचारिक लेख, चित्रकार मकबूल फिदा की आत्मकथा के अंश, मुगल बादशाहों की दया से जुड़े किस्से, बीजेपी को हिंदू पार्टी बताना,नेशनल कांफ्रेंस को सेकुलर बताना, सिख दंगों पर मनमोहन सिंह की माफी और 2002 के गुजरात दंगों में दो हजार लोग मारे गए थे, जैसे वाक्य हटाने के लिए कहा।

बता दें कि एनसीईआरटी ने हाल ही में आम जनता से पाठ्य पुस्तकों में बदलाव से जुड़े सुझाव मांगे थे। न्यास ने एनसीईआरटी को पांच पन्ने में अपने सुझाव भेजे हैं। इस न्यास के प्रमुख दीनानाथ बत्रा हैं जो आरएसएस के शैक्षणिक शाखा विद्या भारती के प्रमुख रह चुके हैं।
न्यास के सचिव अतुल कोठारी ने अंग्रेजी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि इस किताब में कई बातें आधारहीन हैं। यह एक कोशिश है एक ही समुदाय के लोगों को अपमानित करने की। इसमें तुष्टिकरण भी झलकता है आप कैसे बच्चों को दंगों के बारे में पढ़ा आप उन्हें कैसे प्रेरित करना चाहते हैं। शिवाजी महाराज, महाराणा प्रताप, विवेकानंद और सुभाष चंद्र बोस जैसी महान हस्तियों के लिए कोई जगह नहीं है।' कोठारी ने आगे बताया, 'हमें ये चीजें आपत्तिजनक लगीं और हमने अपना सुझाव एनसीईआरटी को भेजा है। हमें आशा है कि ये सुझाव लागू होंगे।

न्यास इससे पहले एके रामानुजन के लेख “तीन सौ रामायण: पांच उदाहरण और अनुवाद पर तीन विचार” को दिल्ली विश्वविद्यालय के स्नातक पाठ्यक्रम से हटाने के लिए कैंपेन चला चुका है। दीनानाथ बत्रा के नेतृत्व में न्यास इतिहासकार वेंडी डोनिगर की किताब “द हिन्दू: एन अल्टरनेटिव हिस्ट्री” को वापस लेने के लिए भी अभियान चला चुका है। न्यास के अभियान के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय ने रामानुजन का लेख पाठ्यक्रम से हटा दिया था और डोनिगर की किताब के प्रकाशन पेंगुइन ने किताब को वापस ले लिया था।


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