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RSS ने खोली नेता बनाने की 'पाठशाला', ढाई लाख दीजिए और नेता बन जाइए

राघवेन्द्र द्विवेदी, संवाददाता, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जून 29 , 2017 , 20:54 IST | नयी दिल्ली

अगर आपको नेता बनना है तो ढाई लाख फीस चुकाने और 9 महीने का कोर्स पूरा करने के बाद आप नेता बन सकते हैं। नेताओं को बनाने की ये कवायद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ी संस्था रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी की है। महाराष्ट्र के ठाणे ज़िले के उत्तान में एक संस्थान खोला गया है। संस्थान का नाम रखा गया है 'इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेटिक लीडरशिप' यानी भारतीय जनतांत्रिक नेतृत्व संस्थान। इसे खोला है रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी संस्था ने जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा से गहराई से जुड़ी है।

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रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी संस्था के उपाध्यक्ष विनय सहस्रबुद्धे ने 'न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया' को बताया कि हम इस संस्थान के माध्यम से पोस्ट ग्रेजुएट कार्यक्रम प्रारम्भ करने जा रहे हैं जो 9 महीने का होगा जिसमें इंटर्नशिप भी होगी और इसकी खूबी ये है कि इसमें सिर्फ थ्योरी नहीं होगी प्रैक्टिकल भी होगा यानी अनुभव के आधार पर सीखना। विनय सहस्रबुद्धे आरएसएस के पुराने कार्यकर्ता हैं और रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी संस्था के उपाध्यक्ष होने के साथ-साथ बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी हैं।

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पाठ्यक्रम अगस्त से शुरू किया जाएगा जिसमें स्नातक किया हुआ कोई भी शख़्स हिस्सा ले सकता है। अधिकतम 40 सीटों वाले इस पाठ्यक्रम की फीस ढाई लाख रुपये रखी गई है जिसमें आवास और खाने का खर्च भी शामिल है यानी पाठ्यक्रम के दौरान कैम्पस में रहने और खाने का बंदोबस्त होगा। इस कवायद के लिए संस्था की तरफ से नेताओं के चरित्र-निर्माण का हवाला दिया जा रहा है लेकिन ये पहल विपक्ष के गले नहीं उतर रही है।

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कांग्रेस नेता और पूर्व सांसद राशिद अल्वी का कहना है कि "बीजेपी के नेता साम्प्रदायिकता फैलाते हैं और देश को तोड़ने का काम करते हैं। आरएसएस को अभी इत्मीनान नहीं हुआ है। वो एक कदम और आगे बढ़कर ट्रेनिंग देना चाहता है जिसमें हिंसा भी हो सकती है, साम्प्रदायिकता भी हो सकती है.."।

जेडीयू के सांसद अली अनवर अंसारी आरएसएस को झूठ फैलाने में माहिर बताते हैं। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए वो कहते हैं "सब कुछ पेड वाला धंधा है। कहने के लिए पाठ्यक्रम है बाद में वो अफवाह फैलाने वाली जमात में शामिल हो जाएंगे और उनको बाकायदा हर माह तनख्वाह मिला करेंगी।"

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जबकि यूपी के बागपत से बीजेपी सांसद सत्यपाल सिंह का कहना है कि आज़ादी के बाद नेताओं के कद और चरित्र में लगातार गिरावट आई है। ऐसे में नेताओं के चरित्र निर्माण की पहल का स्वागत होना चाहिए। वो आगे कहते हैं कि लीडर हर क्षेत्र में होता है। जो नये बच्चे हैं जिनका इरादा राजनीति में जाने का है..वो राजनीति या किसी भी क्षेत्र में जाएं उस क्षेत्र में नेतृत्व संभाल सकें मार्गदर्शन दे सकें।

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संस्था की तरफ से दलील दी जा रही है कि मौजूदा वक्त में इस तरह के पाठ्यक्रम की ज़रूरत है। कहा जा रहा है कि राजनीति शास्त्र में स्नातक होना एक बात है और राजनीति को समझना और सकारात्मक सक्रिय भूमिका निभाना दूसरी बात है। संस्थान के ज़रिए सही मायने में राजनीति सीखने और राजनैतिक ज़िम्मेदारी को समझने के लिए प्रोफेशनल तरीके से ट्रेनिंग दी जाएगी।

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कहा जाता है कि संघ और उससे जुड़ी संस्थाओं की पाठशाला में शामिल होने वालों को अनुशासन और राष्ट्रवाद से ओतप्रोत संस्कारों की घुट्टी पिलाई जाती है। अब ढाई लाख रुपये फीस चुकाने और नौ महीने के पाठ्यक्रम में प्रोफेशनल तरीके से क्या संस्कार सिखाये जाएंगे ये तभी साफ होगा जब 40 छात्रों का बैच पास-आउट होकर बाहर निकलेगा।


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