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आतंकी होने के आरोप में जेल में बिताए 16 साल, अब अदालत ने कहा- आप बेकसूर हैं

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| मई 21 , 2017 , 12:39 IST | बाराबांकी

साल 2000 में हुए साबरमती एक्सप्रेस धमाके के मामले में उत्तर प्रदेश की एक अदालत की ओर से शनिवार को सुनाए गए फ़ैसले के बाद इस मामले में आरोपी और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के पूर्व शोधार्थी गुलज़ार अहमद वानी 16 साल बाद जेल से रिहा होंगे।

अदालत ने उन्हें साबरमती एक्सप्रेस धमाके की साज़िश रचने के आरोप से बरी कर दिया है। इस धमाके में नौ लोग मारे गए थे।

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साक्ष्य के अभाव में किए गए बरी

वानी के वकील एमएस ख़ान ने बताया कि बाराबंकी के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एमए ख़ान ने हिज़्बुल मुज़ाहिदीन के संदिग्ध सदस्य 43 साल के वानी और सह-आरोपी मोबिन को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।

साल 2001 में कथित तौर पर विस्फोटकों और आपत्तिजनक सामग्रियों के साथ दिल्ली पुलिस की ओर से गिरफ़्तार किए गए वानी श्रीनगर के पीपरकारी इलाके के रहने वाले हैं और लखनऊ की एक जेल में बंद हैं।

कानपुर के पास साबरमती एक्सप्रेस में 14 अगस्त को हुआ था धमाका

स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर कानपुर के पास यह धमाका उस वक़्त हुआ था जब साबरमती एक्सप्रेस मुजफ़्फ़रपुर से अहमदाबाद जा रही थी। इस घटना में नौ लोग मारे गए थे और कई अन्य जख़्मी हो गए थे।

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वकील ने बताया कि,

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एमए ख़ान की अदालत ने दोनों आरोपियों को सभी आरोपों से बरी कर दिया, क्योंकि अभियोजन पक्ष उनके ख़िलाफ़ लगाए गए आरोपों को साबित नहीं कर पाया

कोर्ट ने वानी के मामले को लंबा खींचे जाने को बताया शर्मनाक

अप्रैल में सुप्रीम कोर्ट ने वानी के मामले को इतना लंबा खिंचने को शर्मनाक बताया था। जस्टिस जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले पर टिप्पणी की थी कि अगर साबरमती एक्सप्रेस धमकाके के मामले में 31 अक्टूबर तक अहम गवाहों के बयान दर्ज नहीं हुए तो एक नवंबर को आरोपी को जमानत दे दी जाएगी।

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सुप्रीम कोर्ट ने इसे बेहद दुखद मानकर आश्चर्य व्यक्त करते हुए टिप्पणी की थी कि,

वानी को 11 मामलों में से 10 में बरी कर दिया गया है। परेशानी यह है कि आप लोग उसे जेल में तो रखना चाहते हैं लेकिन साक्ष्य जुटाने और जल्द ट्रायल पूरा करने में आपकी कोई दिलचस्पी नहीं होती। यह शर्मनाक है