अभी-अभी

मदर टेरेसा की नीली बॉर्डर वाली साड़ी बनी 'इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी', जानें इससे क्या होगा?

श्वेता बाजपेई, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
117
| जुलाई 9 , 2017 , 19:29 IST | कोलकाता

संत मदर टेरेसा की मशहूर नीले बार्डर वाली साड़ी का अब कोई गलत स्तेमाल नहीं कर सकेगा।जी हाँ संत की उपाधि से सम्मानित मदर टेरेसा की मशहूर नीले बार्डर वाली साड़ी को मिशनरीज ऑफ चैरिटी की 'इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी' के तौर पर मान्यता दी गयी है जिसके बाद साड़ी के गलत इस्तेमाल पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

594326302-portrait-taken-in-december-1991-in-new-dehli-shows.jpg.CROP.promo-xlarge2

इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी के वकील बिस्वजीत सरकार के मुताबिक, 'भारत सरकार की व्यापार चिह्न रजिस्ट्री ने नीले बार्डर की साड़ी के पैटर्न के लिये व्यापार चिह्न का पंजीकरण मंजूर कर दिया है।'

नीले बार्डर वाली साड़ी थी मदर टेरेसा की पहचान

अल्बानियाई मूल की मदर टेरेसा थोड़े समय के लिए नन भी रहीं। 1948 से वह कोलकाता की सड़कों पर गरीबों और निसहायों की सेवा करने लगीं। नीले बार्डर वाली सफेद रंग की साड़ी उनकी पहचान बन गयी थी जिसका बाहरी किनारा दो अंदरूनी किनारों से अधिक चौड़ा होता था। सरकार ने बताया, 'नीले बार्डर की डिजाइन वाली साड़ी मिशनरीज ऑफ चैरिटी की नन पहना करती थीं, जिसे चार सितंबर 2016 को मदर को सम्मानित किये जाने के दिन संगठन के लिए इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी के तौर पर मान्यता दी गयी।

'रंग व्यापार चिह्न संरक्षण के विचार के तहत नीले बार्डर का पैटर्न मिशनरीज ऑफ चैरिटी के लिये एक विशेष प्रतीकात्मक पहचान है। इसके लिए 12 दिसंबर 2013 को व्यापार चिहन रजिस्ट्री में आवेदन दायर किया गया था और तीन साल की कानूनी प्रक्रियाओं के बाद इसे मंजूरी मिली। मदर टेरेसा को संत की उपाधि से सम्मानित किये जाने के अवसर पर भारत सरकार ने रविवार होने के बावजूद उसी दिन इस व्यापार चिहन रजिस्ट्रेशन को मंजूरी दी थी।

आपको बता दें कि हर साल ऐसी करीब चार हजार साड़ियां तैयार की जाती हैं और दुनिया भर की ननों में इन्हें वितरित किया जाता है। सरकार ने कहा, 'मिशनरीज ऑफ चैरिटी प्रचार में यकीन नहीं करता इसलिए इसे प्रचारित नहीं किया गया। लेकिन दुनियाभर में इस डिजाइन के गलत और अनुचित इस्तेमाल देखकर हम लोग इस व्यापार चिह्न को लेकर लोगों में जागरुकता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।'


कमेंट करें