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हाईकोर्ट में बोली सरकार, नियम टूटे तो संजय दत्त को दोबारा जेल भेज दें

श्वेता बाजपेई, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जुलाई 27 , 2017 , 18:22 IST | नई दिल्ली

एक बार फिर अभिनेता संजय दत्त पर मुश्किलों के बादल मंडराते नज़र आ रहे हैं। महाराष्ट्र सरकार ने अभिनेता संजय दत्त को 1993 के बम विस्फोट मामले में दी गई सजा की अवधि से आठ महीने पहले रिहा और वीआईपी ट्रीटमेंट दिए जाने के आरोपों पर दोबारा जांच करने के आदेश दिए हैं। महाराष्ट्र सरकार के अनुसार, अगर संजय दत्त का वीआईपी स्टेटस देखकर उन्हें पेरोल दिया गए है तो उन्हें वापस जेल भेजना चाहिए.. गुरुवार को सरकार ने अपनी दलील में कहा,

अगर संजय दत्त को पेरोल या फर्लो देने में नियम तोड़े गए हैं, तो उन्हें वापस जेल भेजे जाने पर सरकार को कोई एतराज नहीं है।

 

इससे पहले संजय को समय से पहले जेल से रिहा किए जाने के खिलाफ अदालत में पुनर्विचार याचिका दायर की गई थी, जिस पर सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया था।

बता दें कि संजय दत्त को उनकी सजा खत्म होने के 8 महीने पहले ही उनके अच्छे बर्ताव को देखते हुए रिहा कर दिया गया था। अपनी सजा के दौरान संजय दत्त कई बार जेल से बाहर आए और उन्हें 100 से ज्यादा दिनों तक पेरोल मिली जिसके बाद कई सवाल उठते हैं कि क्या उन्हें ये सुविधा उनके वीआईपी स्टेटस की वजह से मिली थी।

पिछले महीने बॉम्बे हाईकोर्ट के जज ने अथॉरिटीज से सवाल किए थे कि उन्हें कैसे पता चला की संजय दत्त का जेल में बर्ताव अच्छा था। जज ने पूछा था कि सरकार ने उनका अच्छा बर्ताव किस आधार पर तय किया जबकि आधा टाइम तो वो पेरोल पर जेल से बाहर ही थे।

क्या था मामला?

बताते चलें कि, हथियार रखने के जुर्म में संजय दत्त को पांच साल की जेल की सजा सुनाई गई थी। ये हथियार 1993 के विस्फोटों में इस्तेमाल किए गए हथियारों के जखीरे का हिस्सा थे। इस मामले में मई, 2013 में संजय ने आत्मसमर्पण किया था। उनको पुणे के येरवदा जेल में रखा गया था और अच्छे आचरण को देखते हुए सजा पूरी होने से आठ महीने पहले ही फरवरी, 2016 में रिहा कर दिया गया था।


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