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इस वजह से कोर्ट ने दी 26 हफ्ते की गर्भवती महिला को अबॉर्शन की इजाजत

सतीश वर्मा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जुलाई 3 , 2017 , 16:04 IST | नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए एक गर्भवती को गर्भपात कराने की इजाजत दी है। महिला 26 हफ्ते से गर्भवती हैं और मेडिकल रिपोर्ट के अंदर उसके गर्भ में पल रहा बच्चा गंभीर रुप से बीमार है। महिला के पति ने कोर्ट से गर्भपात की गुहार लगाई थी। कोर्ट में दायर डॉक्टर की मेडिकल रिपोर्ट के हवाले पति ने गुहार लगाई थी कि अगर उसके पत्नी को प्रेग्नेंसी खत्म करने की इजाजत नहीं दी गई तो ये उसके लिए गंभीर मानसिक सदमा पहुंचाएगा।

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जानकारी हो कि कानून 20 हफ्ते के बाद गर्भपात कराने की इजाजत नहीं देता है। ऐसा करने पर 7 साल की सजा हो सकती है।

ECG टेस्ट में पता चला बच्चे की गंभीर बीमारी के बारे में

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस एम खानविलकर की बेंच ने कहा कि अबॉर्शन की प्रॉसेस फौरन कराई जाए। मेडिकल रिपोर्ट्स में बताया गया है कि अगर महिला को प्रेग्नेंसी खत्म करने की इजाजत नहीं दी जाती है और अगर डिलिवरी के बाद बच्चा जिंदा रहता है तो कई बच्चे की कई बार हार्ट की सर्जरी करनी पड़ेगी। अपील पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को 7 मेंबर्स का मेडिकल बोर्ड बनाने और प्रेग्नेंसी की रिपोर्ट तैयार कर पेश करने का ऑर्डर दिया। तब महिला 24 हफ्ते की प्रेग्नेंट थी। 25 मई को जांच में बच्चे को गंभीर बीमारी होने की बात पता चली थी। इसे कंफर्म करने के लिए 30 मई को दोबार ईसीजी कराई गई।

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अपील में मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) एक्ट, 1971 को भी चैलेंज किया गया, जो 20 हफ्ते से ज्यादा के अबॉर्शन की इजाजत नहीं देता है। इसमें कहा गया कि 1971 में टेक्नोलॉजी एडवांस नहीं थी, लेकिन अब 26 हफ्ते और उससे ज्यादा का अबॉर्शन आसानी से हो सकता है।

26 हफ्ते में अबॉर्शन कराने की इजाजत नहीं दी थी

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी महीने में एक महिला को 26 हफ्ते की प्रेग्नेंसी में अबॉर्शन कराने की इजाजत देने से इनकार कर दिया था। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि,

हमारे हाथों में एक जिंदगी है। हम उसे खत्म करने की इजाजत कैसे दे सकते हैं

इस केस में बच्चे को डाउन्स सिंड्रोम था। इसी आधार पर महिला ने अबॉर्शन की इजाजत मांगी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रेग्नेंसी की हालत में 37 साल की इस मां को फिजिकली कोई खतरा नहीं। जस्टिस एसए बोबड़े और एलएन राव की बेंच ने कहा था, "हालांकि सब जानते हैं कि डाउन्स सिंड्रोम वाले बच्चे बेशक कम इंटेलिजेंट होते हैं, लेकिन बढ़िया होते हैं। मुमकिन है कि बच्चे में फिजिकली या मेंटली प्रॉब्लम्स हों, लेकिन डॉक्टरों की सलाह अबॉर्शन कराने की इजाजत नहीं देती।


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