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सुप्रीम कोर्ट ने कहा राम जन्मभूमि मसले पर सुनवाई होगी तेज, जल्द आएगा फैसला

सतीश वर्मा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जुलाई 21 , 2017 , 16:26 IST | नई दिल्ली

अयोध्या के राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद केस पर सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर जल्द सुनवाई का भरोसा दिया है। कोर्ट ने कहा कि अयोध्या के भूमि विवाद मामले में दोनों पक्षों की अपील समेत दूसरी अन्य याचिकाओं पर जल्द सुनवाई की जाएगी। राम मंदिर विवाद के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ दाखिल याचिका पर जल्दी सुनवाई के बारे में वह जल्द फैसला लेगा।

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कोर्ट के फैसले के बाद स्वामी ने ट्वीट किया- जय श्री राम

कोर्ट के इस फैसले के बाद बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्वीट कर लिखा, ''जय श्री राम! आज चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को मैंने राम मंदिर केस के मुद्दे पर लेटर दिया। उन्होंने कहा है कि हम इस पर जल्द ही सुनवाई करेंगे।

बता दें कि सुब्रमण्यम स्वामी ने एक याचिका दायर कर मामले की रोज सुनवाई करने की अपील की थी। इसके बाद 31 मार्च को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने जल्द सुनवाई करने से इनकार कर दिया था। सुनवाई के वक्त स्वामी के अलावा इस केस से जुड़े दूसरे पक्षकार भी मौजूद थे, जिन्होंने स्वामी की याचिका पर आपत्ति जताई और कोर्ट को बताया कि ये केस से जुड़े पक्षकार नहीं हैं।

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कोर्ट ने स्वामी से कहा था कि आपने हमें बताया नहीं कि आप पार्टी नहीं हैं। स्वामी ने माना कि वह पक्षकार नहीं है। इसके बाद कोर्ट से उन्होंने कहा कि ये उनकी धार्मिक आस्था का मामला है। स्वामी ने कोर्ट से कहा कि उन्हें प्रॉपर्टी से मतलब नहीं है। उन्होंने बस पूजा करने के अपने संवैधानिक अधिकार के तहत यह याचिका दायर की है।

कोर्ट ने कहा था- सभी पक्ष मिलकर बैठें और आम राय बनाएं

21 मार्च 2017 को मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या के राम मंदिर विवाद का कोर्ट के बाहर निपटारा करने पर जोर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि इस पर सभी संबंधित पक्ष मिलकर बैठें और आम राय बनाएं। अगर बातचीत नाकाम रहती है तो हम दखल देंगे। दूसरी तरफ, सुब्रमण्यम स्वामी ने अयोध्या विवाद के हल के लिए एक फॉर्मूला सुझाया था। उन्होंने कहा था- मस्जिद सरयू नदी के पार बनाई जानी चाहिए। जबकि मंदिर वहीं बनना चाहिए, जहां रामलला विराजे हैं।

क्या है हाईकोर्ट का फॉर्मूला और क्या है विवाद

28 सितंबर 2010 को सुप्रीम कोर्ट ने इलाहबाद हाईकोर्ट को इस विवादित मामले में फैसला देने से रोकने वाली पिटीशन खारिज कर दी थी, जिससे फैसले का रास्ता साफ हो गया। 30 सितंबर 2010 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने विवादित 2.77 एकड़ की जमीन को मामले से जुड़े 3 पक्षों में बराबर-बराबर बांटने का आदेश दिया था।

कौन हैं 3 पक्ष, क्या था फॉर्मूला

निर्मोही अखाड़ा

विवादित जमीन का एक-तिहाई हिस्सा यानी राम चबूतरा और सीता रसोई वाली जगह

रामलला विराजमान

एक-तिहाई हिस्सा यानी रामलला की मूर्ति वाली जगह

सुन्नी वक्फ बोर्ड

विवादित जमीन का बचा हुआ एक-तिहाई हिस्सा।

 

 


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